
झारखंड की राजधानी रांची में शुक्रवार सुबह एक जंगली हाथी के घुस आने से अफरातफरी मच गई और लोग सहम गए। हाथी बिरसा चौक और रांची एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में घूमता रहा। करीब पांच घंटे तक शहर में दहशत फैलाने के बाद हाथी वापस जंगल में लौट गया। इस दौरान जिसने जहां भी हाथी को देखा वो वहीं दुबक गया। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि वन विभाग की एक टीम ने सुबह करीब 10 बजे सफलतापूर्वक उसे शहर से बाहर जंगल में भेज दिया।
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रांची के संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) श्रीकांत वर्मा ने बताया, ‘‘हाथी संभवत: अपने मार्ग से भटक गया और रांची में प्रवेश कर गया। चूंकि बच्चों के स्कूल का समय था, इसलिए हमने सभी सुरक्षा उपायों का पालन किया।’’ वर्मा ने बताया कि अपराह्न करीब ढाई बजे हाथी रांची शहर से लगभग 12 किलोमीटर दूर एक वन क्षेत्र में था।
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उन्होंने कहा, ‘‘इससे शहर में कोई नुकसान नहीं हुआ।’’ डीएफओ ने कहा कि हाथी अक्सर हलहू वन क्षेत्र से धुर्वा बांध तक आ जाते हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि हाथी को सुबह करीब पांच बजे राष्ट्रीय उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएएमटी) के पास देखा गया था।
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यह पहली बार नहीं है जब कोई हाथी रांची शहर के आसपास के इलाके में घुस आया हो। जून 2024 में एक हाथी रांची के बाहरी इलाके कुटे में झारखंड विधानसभा के पास भटककर आ गया था। दो हाथी शहर से लगभग 16 किलोमीटर दूर रांची के रातू में एक खाली पड़े कोल्ड स्टोरेज में घुस गए थे। जनवरी 2013 में एक हाथी रांची शहर के दिपटोली आर्मी कैंटोनमेंट क्षेत्र में घुस गया था।
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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल में राज्य में मानव-हाथी संघर्षों के कारण होने वाली मौत की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की थी और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया था कि हाथियों के हमलों के कारण किसी भी मनुष्य की मृत्यु न हो। उन्होंने कहा था कि पिछले कुछ महीनों में रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चाईबासा, जमशेदपुर, लोहरदगा, गुमला और दुमका सहित कई जिलों में हाथियों के हमलों के कारण लगभग 27 लोगों की मौत हो गई, जो ‘‘गंभीर चिंता का विषय’’ है।
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