
राष्ट्रीय जनता दल की रविवार को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से कुछ घंटे पहले पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया कि पार्टी का नियंत्रण ‘‘घुसपैठियों और साजिशकर्ताओं के हाथों में चला गया है, जिनका एकमात्र उद्देश्य लालूवाद को नष्ट करना है।’’
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रोहिणी आचार्य ‘एक्स’ पर अपने पोस्ट में किसी का नाम लिए बगैर कहा कि पार्टी में नेतृत्व के लिए जिम्मेदार लोगों को ‘‘सवालों से बचने या भ्रम पैदा करने के बजाय आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।’’
आचार्य ने दावा किया, ‘‘वर्त्तमान की कड़वी, चिंताजनक एवं दुःखद सच्चाई यही है कि ‘आज जनता के हक - हकूक की लड़ाई लड़ने के लिए जानी जाने वाली, जन - जन की पार्टी की असली कमान फासीवादी विरोधियों के द्वारा भेजे गए वैसे घुसपैठियों - साजिशकर्ताओं के हाथों में है, जिन्हें लालूवाद को तहस - नहस करने के ‘टास्क’ के साथ भेजा गया है, कब्ज़ा जमाए बैठे ऐसे लोग अपने गंदे मकसद में काफी हद तक सफल होते भी दिखते हैं।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘वे लालूवाद और पार्टी की हित की बात करने वालों के साथ दुर्व्यवहार, अभद्र आचरण, अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं। अगर "वो" चुप्पी साधता है, तो उस पर साजिश करने वाले गिरोह के साथ मिलीभगत का दोष व आरोप स्वतः ही साबित होता है।’’
आचार्य ने रविवार को पटना में होने वाली राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से कुछ घंटे पहले ‘एक्स’ पर यह पोस्ट लिखी। वह सिंगापुर में अपने पति और बच्चों के साथ रहती हैं। इससे पहले, उन्होंने आरजेडी के मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई थी।
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उन्होंने लिखा, ‘‘जो सही मायनों में लालूवादी होगा, जिस किसी ने भी लालू जी के द्वारा, हाशिए पर खड़ी आबादी - वंचितों के हितों के लिए मजबूती से लड़ने वाली, खड़ी की गयी पार्टी के लिए निःस्वार्थ भाव से संघर्ष किया होगा, जिस किसी को भी लालू जी के द्वारा सामाजिक - आर्थिक न्याय के लिए किए गए सतत संघर्ष एवं प्रयासों का गौरवबोध होगा, जिसे लालू जी की राजनीतिक विरासत व विचारधारा को गर्व के साथ आगे ले जाने की परवाह होगी, वो अवश्य ही पार्टी की मौजूदा बदहाली के लिए जिम्मेवार लोगों से सवाल करेगा एवं ऐसे लोगों की संदिग्ध - संदेहास्पद भूमिका के खिलाफ अंजाम की परवाह किए बिना अपनी आवाज उठाएगा।’’
पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव में राजद की करारी हार के बाद लालू यादव की बेटी ने घोषणा की थी कि वह ‘‘राजनीति छोड़ रही हैं’’ और उन्होंने परिवार से संबंध तोड़ लिए थे।
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उन्होंने पिछले साल नवंबर में अपने पोस्ट में लिखा था, ‘‘मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं...…संजय यादव और रमीज ने मुझे ऐसा करने को कहा था…...और मैं सारी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले रही हूं।’’
संजय यादव आरजेडी के राज्यसभा सदस्य हैं और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद के बेटे तेजस्वी यादव के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक हैं। रमीज तेजस्वी के पुराने दोस्त बताए जाते हैं और पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। कुछ साल पहले अपने पिता को किडनी दान करने के कारण सुर्खियों में आयीं आचार्य ने 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण से चुनाव मैदान में उतरी थीं लेकिन हार गई थीं।
ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह तेज प्रताप यादव को पार्टी से निकाले जाने से नाखुश थीं। हालांकि, विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें तेजस्वी के लिए प्रचार करते देखा गया था।
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