
केंद्र की मोदी सरकार ने मंगलवार को सांसदों के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 का मसौदा साझा किया। यह महिला आरक्षण विधेयक में प्रस्तावित संशोधन है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना है। यह बिल राज्यों के निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव द्वारा चुने जाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ाकर 815 करता है, जबकि इसमें केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के लिए 35 सीट रखने का प्रावधान किया गया है, जिनका चुनाव उस तरीके से किया जाएगा जैसा संसद कानून द्वारा निर्धारित करे।
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वर्तमान में राज्यों से लोकसभा के 530 सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हैं। हालांकि, एक परिसीमन आयोग ने यह संख्या 543 निर्धारित की थी। बिल में एक और जरूरी बदलाव आबादी की परिभाषा है, जिससे पार्लियामेंट को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। संविधान के आर्टिकल 81 के क्लॉज (3) में बदलाव के लिए बिल यह प्रस्ताव करता है, "(3) इस आर्टिकल में ‘आबादी’ का मतलब ऐसी जनगणना में पता लगाई गई आबादी है, जिसे संसद कानून बनाकर तय कर सकती है और जिसके जरूरी आंकड़े पब्लिश हो चुके हैं।"
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केंद्रीय मंत्रिमंडल इससे पहले उस विधेयक को मंजूरी दे चुका है, जिसका उद्देश्य लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द से जल्द लागू करने के लिए संविधान में संशोधन करना है। साथ ही, इसके जरिए संसद के निचले सदन में सीटों की संख्या बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। संशोधन विधेयक अनुच्छेद 82 में भी परिवर्तन प्रस्तावित करता है, जिसके तहत "प्रत्येक जनगणना के पूरा होने पर, "सीटों का आवंटन" शब्द रखे जाएंगे।
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प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य कोटे के कार्यान्वयन को 2027 की जनगणना से अलग करना और इसके बजाय इसे 2011 की जनगणना पर आधारित करना है, जिससे 2029 के आम चुनावों से पहले इसे लागू किया जा सके। अनुच्छेद 82 में संशोधन विधेयक परिसीमन आयोग की भूमिका को भी शामिल करने का प्रस्ताव करता है। यह विधेयक लोकसभा और विधानसभाओं में रोटेशन के आधार पर सीटों के आरक्षण की बात भी करता है और इसमें उन अवधियों से संबंधित अनुच्छेद भी शामिल हैं, जिनके लिए महिलाओं का आरक्षण लागू रहेगा, बशर्ते संसद द्वारा इसे आगे बढ़ाया जाए।
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बता दें कि सरकार ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा करने और उसे पारित करने के लिए 16 अप्रैल से तीन दिवसीय विशेष संसद सत्र बुलाया है। इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण अधिनियम 2023 (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को शीघ्रता से लागू करने के लिए एक संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन कानून से जुड़ा एक विधेयक और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी (विधानसभा वाले तीन केंद्र शासित प्रदेशों) के लिए एक विधेयक पेश किए जाने की योजना है।
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