
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में आदिवासियों के विकास की गति पर सवाल उठाने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पर निशाना साधा और उन पर बीजेपी के इशारों पर विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए राष्ट्रपति कार्यालय का दुरुपयोग कर रही है।
उत्तर बंगाल की यात्रा के दौरान मुर्मू द्वारा की गई टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी ने कोलकाता में एसआईआर विरोधी धरना स्थल पर कहा, ‘‘बीजेपी इतना नीचे गिर गई है कि वह राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इस्तेमाल राज्य को बदनाम करने के लिए कर रही है।’’ उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में राज्य के प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति के बारे में उन्हें दी गई जानकारी गलत थी।
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ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से पहले ऐसे कार्यक्रमों में हमेशा शामिल होना उनके लिए संभव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप साल में एक बार आती हैं तो मैं आपका स्वागत कर सकती हूं, लेकिन अगर आप चुनाव के दौरान आती हैं, तो मेरे लिए आपके कार्यक्रमों में शामिल होना संभव नहीं होगा क्योंकि मैं लोगों के अधिकारों के लिए काम कर रही हूं।’’
ममता बनर्जी ने कहा कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को दूर करना अभी उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “मैं लोगों के अधिकारों और एसआईआर पर काम कर रही हूं, ये मेरी प्राथमिकताएं हैं।” उन्होंने बीजेपी शासित राज्यों में आदिवासी कल्याण के क्षेत्र में बीजेपी के प्रदर्शन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, “क्या आपको (राष्ट्रपति मुर्मू) पता है कि बीजेपी अपने शासन वाले राज्यों में आदिवासियों के अधिकारों को कैसे छीन रही है?”
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मणिपुर में हुई जातीय हिंसा का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि बीजेपी शासित राज्यों में आदिवासियों के साथ कैसा व्यवहार किया गया, इस पर सवाल उठाए जाने चाहिए। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने कहा, “राष्ट्रपति मुर्मू आदिवासियों की बात कर रही हैं, लेकिन जब मणिपुर और बीजेपी शासित अन्य राज्यों में आदिवासियों को प्रताड़ित किया जा रहा था, तब आप चुप क्यों थीं?”
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के विवादित बयान पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, आपने कभी अल्पसंख्यकों के बारे में नहीं सोचा। आपने अनुसूचित जाति, बौद्ध, पंजाबी, पारसी, जैन या हिंदुओं के बारे में भी कुछ नहीं कहा। आपको राजनीति करना आता है। हमें राजनीति करना नहीं आता। मैं डेरेक और सुदीप से कहूंगी कि वे भारत के राष्ट्रपति से मिलने का समय मांगें और जो कुछ भी हमने ट्राइबल लोगों, खासकर संताली लोगों के लिए किया है, उसे बताएं।"
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बता दें कि इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मू ने सिलीगुड़ी के पास बिधाननगर में आदिवासियों की एक सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी को अपनी ‘छोटी बहन’ बताया और हैरानी जताई कि क्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री किसी बात को लेकर ‘नाराज’ हैं, क्योंकि उत्तर बंगाल दौरे के दौरान उनका स्वागत करने के लिए न तो मुख्यमंत्री आईं और न ही कोई अन्य मंत्री मौजूद था। मुर्मू ने आदिवासी समुदाय के वार्षिक कार्यक्रम के आयोजन स्थल को बिधाननगर से गोशाईपुर स्थानांतरित किए जाने पर भी सवाल उठाया, जहां कथित तौर पर उपस्थिति कम रही।
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