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'अडानी समूह को 6 हवाई अड्डों के संचालन का ठेका देने में मोदी सरकार ने ताक पर रख दिए सारे नियम'

सीपीएम सांसद एलाराम करीम ने सीवीसी को पत्र भेजकर गंभीर आरोप लगाए हैं कि मोदी सरकार ने अडानी समूह को देश के 6 हवाई अड्डों के संचालन और देखरेख का ठेका देने में सारे नियमों को ताक पर रख दिया है। सीवीसी ने इस शिकायत को उचित कार्यवाही के लिए नागरिक विमानन मंत्रालय के पास भेजा है।

फोटो : सोशल मीडिया
फोटो : सोशल मीडिया 

  • अडानी एंटरप्राइजेज को देश के 6 हवाई अड्डे 50 साल के लिए देना एएआई एक्ट 1994 का उल्लंघन हैं जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी हवाई अड्डे को किसी निजी व्यक्ति या कार्पोरेट को 30 वर्ष से अधिक के लिए लीज पर नहीं दिया जा सकता

  • नागरिक विमानन मंत्रालय ने गैरजरूरी तत्परता दिखाते हुए 28 फरवरी 2020 को प्रक्रिया पूरी की ताकि अडानी एंटरप्राइजेज को फायदा मिल सके

  • नीलामी की प्रक्रिया में मंत्रालय ने अनावश्यक नियम जोड़े जिससे एयरपोर्ट संचालन करने वाली बड़ी संस्थाएं नीलामी प्रक्रिया से बाहर रहीं

  • एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अडानी एंटरप्राइजेज द्वारा दी गई बोली की मौजूदा प्रतति यात्री शुल्क से तुलना नहीं की जिससे यह पता लग सकता कि नीलामी बोली से कितना फायदा होगा

  • सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) को प्रस्तुत परियोजना रिपोर्ट अनिर्णायक है और एएआई ने हवाई अड्डों को लीज पर देने से पहले परियोजना का सावधानीपूर्वक अध्ययन नहीं किया।

  • अडानी एंटरप्राइजेज को हवाई अड्डों को सौंपने से पहले ऑपरेशन और प्रबंधन के नियम लागू नहीं किए गए, जो बोलीदाता की परिचालन क्षमताओं को मापना अनिवार्य बनाते हैं

  • अडानी एंटरप्राइजेज को पट्टे पर दिए गए सभी छह हवाई अड्डे शहरों के बीच में हैं और गैर-वैमानिकी व्यवसायों से राजस्व प्राप्त करने की गुंजाइश बहुत अधिक है। फिर भी मंत्रालय ने इस संबंध में कोई बाध्यता नहीं रखी।

अडानी एंटरप्राइजेज को छह हवाई अड्डों का पट्टा देने से संबंधित ये चौंकाने वाले आरोप सीपीएम सांसद एलाराम करीम ने लगाए हैं। करीम को पिछले महीने विवादास्पद कृषि बिलों को पारित करने की प्रक्रिया के दौरान राज्यसभा से निलंबन किया गया था।

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गौतम अडानी की कंपनी को छह हवाई अड्डे लीज देने में "घोर अनियमितताओं" और "पक्षपात" की ओर इशारा करते हुए, करीम ने कहा कि "न तो एएआई और न ही नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने किसी भी उचित सावधानी और विवेक का उपयोग किया।"

करीम ने इस मामले में कार्यवाही की मांग करते हुए सितंबर के पहले सप्ताह में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को पत्र लिखा है। पत्र में करीम ने कहा है कि, “बोली के दस्तावेज़ों में कुल परियोजना लागत, न्यूनतम बोली मूल्य आदि सहित अधिकांश महत्वपूर्ण वित्तीय मापदंडों को खुला रखा गया था, जिससे निजी क्षेत्र को अपने तरीके से अनुबंध को आकार देने की स्वतंत्रता मिल गई।” उन्होंने आगे लिखा है कि वित्तीय अनियमितताएं इस स्तर की और गंभीर हैं कि इस मामले की जांच किसी उच्च एजेंसी द्वारा की जानी चाहिए।

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करीम के पत्र के 13 दिन बाद सीवीसी ने इस पत्र को नागरिक विमानन मंत्रालय को इस नोट के साथ भेजा है कि, “संलग्नों सहित शिकायत को नागरिक विमानन मंत्रालय के सीवीओ को आवश्यक कार्यवाही के लिए प्रेषित किया जा रहा है।”

इस बारे में अडानी समूह से संपर्क किया गया लेकिन वहां से कोई उत्तर नहीं मिला। नेशनल हेरल्ड ने इस सिलसिले में 13 अक्टूबर को अडानी समूह को एक प्रश्नावली भेजी थी जिसमें सीपीएम सांसद के आरोपों पर जवाब मांगा गया था, लेकिन अभी तक इस सिलसिल में कोई जवाब नहीं मिला है। जैसे ही अडानी समूह से जवाब मिलेगा हम उसे इस खबर में अपडेट कर देंगे।

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गौरतलब है कि कोरोना महामारी से पहले अडानी समूह ने एयरपोर्ट अथॉरिटी के साथ एक करार किया था जिसमें अहमदाबाद, मेंग्लुरु, लखनऊ हवाई अड्डों के प्रबंधन, संचालन और विकास का काम समूह को मिला था। अडानी समूह ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा था कि उसे इस काम के लिए 50 साल का कंसेशन पीरियड मिला है।

अहमदाबाद, मेंग्लुरु और लखनऊ के अलावा अडानी समूह को जयपुर, गुवाहाटी और तिरुवनंथपुर हवाई अड्डों के संचालन का ठेका भी पिछले साल मिला था।

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