
पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लोगों को घर देने की प्रक्रिया काफी धीरे चल रही है। बीते 3 सालों में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत केवल 8 फीसदी ही मकान बने है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में 3 साल में सरकार ने 40.6 लाख मकानों को बनाने का वादा किया था, लेकिन अब तक इनमें से महज 3 लाख यानी 8 फीसदी ही तैयार हो सके हैं। ग्रामीण आवास योजाना की बात करे तो वहां कुछ हालात बेहतर दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीण आवास योजना के अंतर्गत तय किए गए 95.4 लाख मकानों में से 28.8 लाख आवास तैयार कर दिए गए हैं। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने यह लक्ष्य स्कीम लॉन्च होने के 15 महीने के भीतर ही हासिल कर लिया।
केंद्रीय शहरी विकास और ग्रामीण विकास मंत्रालयों की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़े बताते है कि शहरी क्षेत्रों में 40.6 लाख मकानों के निर्माण के लिए 8,341 परियोजनाओं पर काम कर रही है। इससे पता चलता है कि 18 लाख मकानों पर काम चल रहा है यानी योजना के तहत 44 फीसदी लक्ष्य पूरा किया जा सकता है। हालांकि इस डेटा से यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि इन मकानों का काम कहां तक हुआ है।जिन मकानों पर काम पूरा हो चुका है, उनमें से करीब 3 लाख में लोगों ने रहना शुरू कर दिया है।
25 जून, 2015 को प्रधानमंत्री मोदी ने प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना शुरूआत की थी। इसके तहत 2022 तक शहरी गरीबों के लिए 2 करोड़ आवास तैयार करने की योजना थी। पीएम मोदी ने कहा था कि आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर देश के हर नागरिक के पास अपना घर होगा। लेकिन जिस गति से आवासों का निर्माण का काम चल रहा है, उसके मुताबिक सरकार 2022 तक 2 फीसदी ही काम पूरा कर पाएगी।
योजना के तहत केंद्रीय निगरानी में स्थानीय निकायों और विभिन्न एजेंसियों द्वारा सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में इन मकानों का निर्माण होना था।
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Published: 22 Mar 2018, 11:33 AM IST