
NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने CJI सूर्यकांत के सामने 5 सितंबर को प्रस्तावित इंडिया गेट मार्च वापस लेने की घोषणा भी की। इसके बाद CJI ने इस फैसले की सराहना की।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार में छात्रों के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ी FIR रद्द होंगी। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से 2,873 लोगों के खिलाफ दर्ज FIR जारी रहेगी। इन लोगों पर प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ और हिंसा में शामिल होने के आरोप हैं। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि NEET-UG पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ अब कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी।
मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कर रही है। सौरव दास की ओर से मार्च वापस लेने की घोषणा के बाद CJI सूर्यकांत ने कहा कि अगर दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा दिखाएं तो सभी मुद्दों को धीरे-धीरे सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई मुद्दा नहीं है, जिसका खुले दिमाग से बातचीत के जरिए समाधान न निकाला जा सके।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि केंद्र सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत हुई थी। इसमें तीन बातों पर भरोसा दिया गया था। पहली, जिन छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज हुई हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। दूसरी, आगे कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। तीसरी, प्रदर्शन के दौरान आत्महत्या करने वाले छात्रों के मामलों में मुआवजा दिया जाएगा।
सौरव दास ने अदालत में CJP का बयान पढ़ते हुए कहा कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासन, न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के आदेश को देखते हुए 5 सितंबर का प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि CJP अदालत के आदेश का पालन करने की उम्मीद करता है और इस फैसले के लिए अदालत, दोनों पक्षों के वकीलों तथा सॉलिसिटर जनरल के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया।
इस दौरान SG तुषार मेहता ने प्रदर्शनकारियों के रुख को रचनात्मक और सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से भी पूरी तरह रचनात्मक और सकारात्मक रवैया रहा और दोनों पक्ष एक-दूसरे के दुश्मन नहीं हैं।
दरअसल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फिलहाल ऐसी कोई ठोस वजह नहीं है, जिसके आधार पर यह माना जाए कि CJP के प्रस्तावित मार्च से कोई अप्रिय घटना हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर 5 सितंबर को लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित मार्च को 12-13 सितंबर को होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन के बाद तक रोकने की मांग की गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश रिटायर्ड पुलिस अधिकारी के वकील डॉ. रिजवान ने कहा था कि प्रदर्शन करना हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी मार्च या प्रदर्शन के लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है।
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