
सोमवार (12 अक्टूबर) को दिल्ली में 'इंडिया' ब्लॉक के 'दिल्ली चलो मार्च' के दौरान दिल्ली के बाराखंबा रोड पर हज़ारों प्रदर्शनकारी जमा हुए। वे चुनावी गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। इसी दौरान, प्रदर्शनकारियों के एक समूह को एनडीए के तीन अहम सहयोगियों — नीतीश कुमार, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान — की तस्वीर वाले पोस्टर को पीटते हुए देखा गया।
यह विरोध प्रतीकात्मक रूप से काफी महत्वपूर्ण था। क्योंकि, गुस्सा अब सिर्फ़ बीजेपी के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ भी सामने आने लगा है। यह वे सहयोगी हैं , जिनके संसदीय समर्थन की वजह से नरेंद्र मोदी 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को बहुमत न मिलने के बावजूद अपनी सरकार बना पाए और अभी चला रहे हैं।
हाथ में बैनर लिए एक प्रदर्शनकारी ने कहा, "अगर उन्होंने मोदी सरकार का समर्थन न किया होता, तो यह 'चोर' सरकार अब तक गिर गई होती।" वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए याद दिलाया कि कैसे जेडीयू नेता ने कभी खुद को मोदी को चुनौती देने वाले के तौर पर पेश किया था और उन्हें प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जाता था।
इस प्रदर्शनकारी ने कहा, "सत्ता की भूख में उन्होंने (नीतीश कुमार ने) देश के साथ धोखा किया है।" उसका तर्क था कि बीजेपी के साथ मिलकर नीतीश ने अपनी राजनीतिक साख को नुकसान पहुंचाया है। प्रदर्शनकारी ने यह भी अनुमान लगाया कि बीजेपी आखिरकार बिहार में नीतीश की जेडीयू को निगल जाएगी।
बीजेपी के सहयोगी दलों को निशाना बनाना इस विरोध-प्रदर्शन में एक अहम मोड़ है और यह दिखाता है कि विपक्ष इन प्रदर्शनों का राजनीतिक दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मुख्य रूप से आलोचना का केंद्र रहे हैं, लेकिन नीतीश, नायडू और चिराग की आलोचना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है: क्या बीजेपी के सहयोगी मोदी सरकार का समर्थन जारी रखेंगे और रखेंगे तो कब तक?
गौर करने वाली बात है कि एनडीए सहयोगियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन सिर्फ़ दिल्ली तक ही सीमित नहीं थे। बिहार में भी आम लोगों और विपक्षी समूहों ने नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) और चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को निशाना बनाया।
2024 के आम चुनावों से पहले 'अबकी बार, 400 पार' का नारा देने के बावजूद, बीजेपी सिर्फ़ 240 सीटें ही जीत पाई, जो बहुमत के आंकड़े से 32 सीटें कम थीं। इसके बाद उसने अपने एनडीए सहयोगियों, खासकर तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), जेडीयू और एलजेपी (राम विलास) के समर्थन से सरकार बनाई।
2024 में टीडीपी ने 16 सीटें, जेडीयू ने 12 और एलजेपी (राम विलास) ने पांच सीटें जीतीं। उनके कुल 33 सांसदों की ताकत उन्हें सरकार के संसदीय अस्तित्व के लिए अहम बनाती है, भले ही गठबंधन में बीजेपी ही सबसे बड़ी पार्टी बनी हुई है।
लेकिन साथ ही, इससे सहयोगियों के लिए एक राजनीतिक विरोधाभास भी पैदा होता है। उनकी संख्या उन्हें मज़बूत स्थिति में तो रखती है, लेकिन लगातार समर्थन की वजह से उन्हें अपने समर्थकों और विपक्षी दलों की आलोचना का भी सामना करना पड़ता है; विपक्षी दल वोट की चोरी के लिए पूरे सत्ताधारी गठबंधन को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, चिराग पासवान ने कई बार ऐसी बातें कही हैं जिनसे बीजेपी असहज स्थिति में आ गई है। 10 अक्टूबर को, विरोध-प्रदर्शन से पहले लगी पाबंदियों और ट्रेनों के रद्द होने के बीच, उन्होंने युवाओं को दिल्ली पहुँचने से रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाए थे।
यह पूछते हुए कि कितनी ट्रेनें रोकी जा सकती हैं, कितनी कनेक्टिविटी बाधित की जा सकती है और कितनी सड़कें जाम की जा सकती हैं, पासवान ने तर्क दिया कि युवाओं को अपनी चिंताएं उठाने से अनिश्चित काल तक नहीं रोका जा सकता।
बिहार के मामलों पर नज़र रखने वालों का मानना है कि पासवान की टिप्पणियों से एनडीए के भीतर एसआईआर और पेपर लीक-विरोधी विरोध प्रदर्शनों से निपटने के तरीकों को लेकर मतभेदों की झलक मिलती है।
यही बात नीतीश कुमार और नायडू पर भी लागू होती है। दोनों ही ऐसी पार्टियों के नेता हैं जिनकी संसद में अच्छी-खासी मौजूदगी है, लेकिन बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को लगातार समर्थन देने की वजह से ही बीजेपी सत्ता में बनी हुई है।
प्रदर्शनकारियों का उन्हें निशाना बनाने का फ़ैसला यह दिखाता है कि विपक्ष उनके समर्थन को 'वोट चोरी' का हिस्सा बताना चाहता है। इंडिया ब्लॉक के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा यह है कि क्या वह चुनावी जवाबदेही के नारे को राजनीतिक नतीजे में बदल पाता है या नहीं?
फ़िलहाल, बीजेपी के सहयोगियों के प्रति गुस्सा विरोध-प्रदर्शन का ही एक हिस्सा है, और गठबंधन में दिख रही दरारें कम से कम इस बात का तो अभी संकेत नहीं हैं कि सत्ताधारी गठबंधन हाल-फिलहाल ध्वस्त होने वाला है।
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