
देश में एलपीजी संकट के बीच भी कोई कमी नहीं होने का दावा करती आ रही मोदी सरकार ने एलपीजी की सप्लाई को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब जिन घरों में पहले से पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शन मौजूद हैं, उन्हें घरेलू एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। यदि किसी उपभोक्ता के पास पीएनजी और एलपीजी दोनों कनेक्शन हैं, तो उन्हें अपना एलपीजी कनेक्शन तुरंत सरेंडर करना होगा। यह फैसला शनिवार को जारी अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है और यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
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मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना में तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) आदेश, 2000 में संशोधन किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार पीएनजी कनेक्शन रखने वाला कोई भी व्यक्ति नया घरेलू एलपीजी कनेक्शन नहीं ले सकेगा। पीएनजी और एलपीजी दोनों रखने वाले उपभोक्ता एलपीजी सिलेंडर का रिफिल नहीं प्राप्त कर सकेंगे।
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ऐसे उपभोक्ताओं को एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना अनिवार्य होगा। सरकारी तेल कंपनियां (आईओसीएल, बीपीसीएल, एचपीसीएल) और उनके वितरक ऐसे घरों में एलपीजी प्रदान नहीं कर सकेंगे। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि यदि उनके पास दोनों कनेक्शन हैं, तो वे तुरंत नजदीकी एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर या कंपनी के पोर्टल पर जाकर कनेक्शन सरेंडर करें। सरेंडर करने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा, लेकिन नियम तोड़ने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
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सरकार का कहना है कि इस नियम का उद्देश्य है कि एलपीजी की सीमित आपूर्ति बेहतर तरीके से प्रबंधित हो और उन जरूरतमंद परिवारों तक सिलेंडर पहुंचे, जिनके पास पीएनजी जैसा विकल्प नहीं है। पीएनजी मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों में उपलब्ध है, जहां पाइपलाइन के माध्यम से सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल गैस मिलती है। वहीं ग्रामीण और छोटे शहरों में अभी भी एलपीजी ही मुख्य ईंधन है। इस बदलाव से पीएनजी वाले क्षेत्रों में एलपीजी की मांग कम होगी, जिससे ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी वाले सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ेगी। पहले भी सरकार ने दोहरे कनेक्शन पर रोक लगाने की कोशिश की थी, लेकिन अब यह नियम स्पष्ट और सख्त रूप से लागू किया गया है।
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