
अमेरिका के साथ हुई टैरिफ डील को लेकर मोदी सरकार भले ही अपनी बड़ी कामयाबी बता रही हो लेकिन इस डील को लेकर जो असल डर है उससे अब पर्दा उठता दिख रहा है। अब ‘व्हाइट हाउस’ ने भी यह साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने और प्रमुख अमेरिकी क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश पर भी सहमति व्यक्त की है। इसके बाद भारतीय कृषि का जो डर था वह सच होता दिख रहा है।
‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मंगलवार कहा कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्रमुख अमेरिकी क्षेत्रों में 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश पर भी सहमति व्यक्त की है।
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कैरोलिन ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा, ‘‘ राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने भारत के साथ एक और बड़ा व्यापार समझौता किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से सीधे बात की। दोनों देशों के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। भारत न केवल रूस से तेल खरीदना बंद करने के लिए प्रतिबद्ध है बल्कि अमेरिका से तेल खरीदने के लिए भी प्रतिबद्ध है। संभवतः वेनेजुएला से भी जिससे हमें पता है कि अब अमेरिका और अमेरिकी जनता को सीधा लाभ होगा।’’
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है जिसमें परिवहन, ऊर्जा एवं कृषि उत्पाद भी शामिल हैं। इसलिए राष्ट्रपति ट्रंप की बदौलत यह एक और शानदार व्यापार समझौता है।
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इससे पहले, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर ‘फॉक्स न्यूज’ के साथ बातचीत में कैरोलिन ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच सोमवार को एक ‘‘शानदार बातचीत’’ हुई जिसके बाद द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की गई।
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इस बीच, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने मंगलवार को ‘सीएनबीसी स्क्वॉक बॉक्स’ के साथ साक्षात्कार में व्यापार समझौते के तहत भारत के अमेरिकी औद्योगिक एवं कृषि उत्पादों, जैसे कि ‘‘फल व सब्जियां’’ पर शुल्क घटाकर शून्य प्रतिशत करने को ‘‘बड़ी जीत’’ करार दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘ समय आ गया है और अब समझौता पक्का हो गया है। हम कागजी कार्रवाई पूरी कर लेंगे लेकिन हमें सारी बारीकियां पता हैं। हमें सारी जानकारी है। यह एक बहुत ही बेहतरीन अवसर है।
समझौते की जानकारी देते हुए ग्रीर ने कहा कि भारत के साथ औद्योगिक वस्तुओं पर वर्तमान में औसत शुल्क करीब 13.5 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘ यह सभी वस्तुओं पर लगभग शून्य हो जाएगा। लगभग कहने का मेरा मतलब 98-99 फीसदी से है। कृषि क्षेत्र में कृषि उत्पादों की एक विशाल श्रृंखला है। इसलिए यह शुल्क शून्य हो जाएगा।’’
ग्रीर ने कहा ‘‘ अमेरिका समेत दुनिया के हर देश की तरह भारत में भी कुछ खास क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था है, जिन पर हमारा नियंत्रण बना रहेगा। हम पहुंच सुनिश्चित करने के लिए काम करते रहेंगे। हालांकि कई चीजों जैसे मेवे, शराब, ‘स्पिरिट’, फल, सब्जियां आदि पर लगभग शून्य शुल्क होगा। यह एक बड़ी जीत है।’’
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दरअसल, भारतीय किसान, जिनमें से ज़्यादातर छोटे ज़मीनों पर खेती करते हैं और उन्हें सरकार से बहुत कम मदद मिलती है, वे भारी सब्सिडी वाली अमेरिकी खेती का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं हैं। मक्का, सोयाबीन तेल, बादाम, सेब या डेयरी प्रोडक्ट्स के सस्ते इंपोर्ट से घरेलू कीमतें कम हो सकती हैं, जिससे देश के बड़े हिस्सों में ग्रामीण आमदनी खतरे में पड़ सकती है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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