
मणिपुर के कई कुकी संगठनों ने अपने समुदाय के विधायकों को राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही कुकी संगठनों ने शुक्रवार को चुराचांदपुर में ‘पूर्ण बंद’ रखने और कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन करने का भी आह्वान किया है।
एक दिन पहले बुधवार को केंद्र द्वारा मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के कुछ घंटों बाद बीजेपी के विधायक युमनाम खेमचंद सिंह ने मणिपुर के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने यह पदभार बीजेपी नेता एन. बीरेन सिंह के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के लगभग एक वर्ष बाद संभाला। उनके साथ कुकी समुदाय की बीजेपी विधायक नेमचा किपगेन और नगा पीपुल्स फ्रंट विधायक एल. दिखो ने मणिपुर के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्य में मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
Published: undefined
इस घटनाक्रम के बाद चुराचांदपुर जिले के आदिवासी संगठन ‘जॉइंट फोरम ऑफ सेवन’ (जेएफ-7) ने शुक्रवार को सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक कुकी-जो बहुल इलाकों में ‘पूर्ण बंद’ का आह्वान किया है। संगठन ने अलग कुकी प्रशासन की मांग दोहराते हुए समुदाय के सभी सदस्यों से गांवों में लोकतांत्रिक तरीके से विरोध में शामिल होने की अपील की है।
कुकी जो काउंसिल ने कहा कि यदि समुदाय का कोई विधायक संगठन के सामूहिक निर्णय की अनदेखी करता है तो वह ऐसा अपनी व्यक्तिगत हैसियत में करेगा और ऐसे ‘एकतरफा फैसलों’ से उत्पन्न परिणामों के लिए संगठन जिम्मेदार नहीं होगा। कुछ कुकी उग्रवादी संगठनों ने भी समुदाय के विधायकों को सरकार गठन में भाग लेने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी है।
Published: undefined
बुधवार रात कुकी बहुल कांगपोकपी जिले के लेइमाखोंग के पास प्रदर्शनकारियों ने टायर जलाए और सड़क पर बांस रखकर नेमचा किपगेन के उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का विरोध किया। कुकी लिबरेशन आर्मी (लेटखोलुन) ने एक बयान में कहा कि वह एक “स्पष्ट और अंतिम चेतावनी” जारी कर रही है। संगठन ने कहा कि कोई भी कुकी-जो प्रतिनिधि, जो सरकार के गठन में भाग लेने का फैसला करता है, उसे समुदाय के लोगों के साथ विश्वासघात करने वाला माना जाएगा। ऐसे किसी भी कदम के चलते अगर कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उन कुकी-जो विधायकों पर ही होगी।
इस बीच, हमार जनजाति की शीर्ष संस्था हमार इनपुई ने दावा किया कि उसे विश्वसनीय जानकारी मिली है कि कुछ कट्टर तत्व हिंसा भड़काने की कोशिश कर सकते हैं और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की निजी संपत्तियों और आवासों को निशाना बना सकते हैं। संगठन ने बयान में कहा कि उसके विधायकों की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने या उन्हें निशाना बनाने की किसी भी कोशिश को वह समुदाय के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई मानेगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि कोई ऐसा गैरकानूनी कृत्य होता है, तो वह मूक दर्शक बनकर नहीं रहेगा।
Published: undefined
हमार जनजाति के विधायक एन सनाते बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के उस प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे, जिसने राज्य में सरकार गठन का दावा पेश करने के लिए इंफाल में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की थी। एक अन्य कुकी-जो विधायक एल. एम. खाउते भी उक्त प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे।
मणिपुर में तीन मई 2023 से जातीय हिंसा जारी है, जिसकी शुरुआत पहाड़ी जिलों में निकाली गई एक आदिवासी एकजुटता रैली के बाद हुई थी। यह रैली बहुसंख्यक मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में निकाली गई थी। हिंसा में अब तक कुकी और मेइती समुदायों के सदस्यों तथा सुरक्षा कर्मियों सहित कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है, तथा हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined