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राहुल गांधी का हमला, मोदी जी का मनरेगा को बर्बाद करने का मकसद क्या है?, आखिर 36 करोड़ मजदूर कहां जाएंगे?

राहुल गांधी ने कहा कि न्यूनतम मज़दूरी, साल-भर काम की गारंटी, आज़ादी और स्वाभिमान के साथ काम करने का हक़ - देश के करोड़ों श्रमिक एक आवाज़ में कह रहे थे “मनरेगा ने हमारी ज़िंदगी बदली।” आज वही श्रमिक कह रहे हैं - “मोदी सरकार मज़दूरों को ग़ुलाम बनाने वाली सरकार है।”

फोटो: विपिन
फोटो: विपिन 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मनरेगा के मुद्दे को लेकर एक बार फिर मोदी सरकार को घेरा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करते हुए कहा कि मोदी जी का मनरेगा को बर्बाद करने का मकसद क्या है?

इस दौरान राहुल गांधी ने मोदी सरकार से पूछा कि

• मज़दूरों से दिहाड़ी के मोल-भाव का हक़ छीन लेना

• पंचायतों की शक्ति छीन कर उनके हाथ बांधना

• राज्यों से अधिकार छीन कर दिल्ली में केंद्रित करना

• देश को फिर से राजा-महाराजाओं के ज़माने में धकेलना, जहां सारी ताकत और संपत्ति गिनती के लोगों के पास हो

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उन्होंने आगे कहा कि न्यूनतम मज़दूरी, साल-भर काम की गारंटी, आज़ादी और स्वाभिमान के साथ काम करने का हक़ - देश के करोड़ों श्रमिक एक आवाज़ में कह रहे थे “मनरेगा ने हमारी ज़िंदगी बदली।” दशकों लगे ये बदलाव लाने में। आज वही श्रमिक कह रहे हैं - “मोदी सरकार मज़दूरों को ग़ुलाम बनाने वाली सरकार है।”

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इसस पहले भी राहुल गांधी ने मनरेगा को खत्म करने में मोदी सरकार को हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि इसका मकसद वही हैं जो "तीन काले कृषि कानूनों" को लाने में थे।

मनरेगा को लेकर राहुल गांधी ने कहा था कि इसके पीछे सोच यह थी कि काम की जरूरत वाला कोई भी व्यक्ति सम्मान के साथ काम मांग सके। मनरेगा सिस्टम के तीसरे स्तर - पंचायती राज सिस्टम के माध्यम से चलाया जाता था। मनरेगा में लोगों की आवाज, उनके अधिकार थे, गरीब लोगों को काम का अधिकार दिया गया था, एक ऐसा कॉन्सेप्ट जिसे नरेंद्र मोदी-बीजेपी अब खत्म करने की कोशिश कर रही है।

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राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बीजेपी की सभी नीतियां देश की दौलत और संपत्ति को कुछ चुने हुए लोगों के हाथों में इकट्ठा करने के मकसद से हैं, और वही लोग इस देश को चलाएं। बीजेपी की विचारधारा यह है कि देश की सारी दौलत अमीरों के हाथों में चली जाए, ताकि गरीब, ज्यादातर दलित, ओबीसी और आदिवासी लोग, अडानी-अंबानी जैसे अमीर लोगों पर निर्भर हो जाएं और उनकी बात मानें और अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो वे भूखे मर जाएं।

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