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राज्‍यसभा चुनाव: सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, कांग्रेस बोली- मीनाक्षी का नामांकन रद्द कर BJP ने की 'सीट चोरी'

कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जो उत्साह और एकजुटता दिखाई, उससे नरेन्द्र मोदी और मध्य प्रदेश का पूरा बीजेपी नेतृत्व घबरा गया।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्यसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर बीजेपी और निर्वाचन आयोग ने ‘‘सीट चोरी’’ का नया उदाहरण पेश किया है और दोनों की इस मामले में ‘‘मिलीभगत’’ है।

पार्टी ने दावा किया कि नामांकन रद्द करने का फैसला ‘‘दोषपूर्ण और तर्कहीन’’ आधार पर लिया गया है।

दिल्ली में मध्य प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में नटराजन ने कहा कि उन्होंने फॉर्म-26 पूरी तरह भरा था और उसमें निजी शिकायतों का उल्लेख करने के लिए कोई ‘कॉलम’ ही नहीं था।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि ऐसा कोई कॉलम होता तो मैं उसकी जानकारी जरूर देती।’’

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नटराजन ने कहा, ‘‘पूरे मामले की जड़ फॉर्म-26 है, जिसमें आरोप लगाया गया कि मैंने कुछ जानकारी दर्ज नहीं की और तथ्यों को छिपाया।’’

उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जानकारी तभी देनी होती है जब कोई आपराधिक मामला लंबित हो या किसी व्यक्ति को किसी दंडनीय अपराध में दोषी ठहराया गया हो।

नटराजन ने कहा, ‘‘स्वाभाविक रूप से मैंने इन सभी कॉलमों में ‘लागू नहीं’ (नॉट एप्लिकेबल) लिखा क्योंकि मेरे खिलाफ केवल एक कानूनी नोटिस है। मैंने उस नोटिस का पूरा कानूनी विवरण चुनाव आयोग को दिए गए ज्ञापन में भी शामिल किया था। मेरे खिलाफ केवल वही एक कानूनी नोटिस है, जिस पर अदालत ने अभी तक संज्ञान भी नहीं लिया है। इसलिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि ऐसी जानकारी दर्ज करने के लिए कॉलम वास्तव में कहां था।’’

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कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि भारतीय राजनीति में यह पहला अवसर है जब किसी राज्यसभा उम्मीदवार का नामांकन खारिज किया गया है और यह राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने जो उत्साह और एकजुटता दिखाई, उससे नरेन्द्र मोदी और मध्य प्रदेश का पूरा बीजेपी नेतृत्व घबरा गया।’’

पटवारी ने आरोप लगाया कि इसी कारण बीजेपी ने राज्यसभा चुनाव में वही हथकंडा अपनाया, जो आमतौर पर ‘सरपंच’ या ‘जनपद’ जैसे छोटे स्थानीय चुनावों में देखने को मिलता है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के नेता उमंग सिंघार ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में देश ‘‘चुनावी निरंकुशता’’ की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कार्यपालिका की शक्तियों का केंद्रीकरण, सरकार पर विधायिका की कमजोर निगरानी, आम नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश और पत्रकारों का उत्पीड़न- यह सब आज देश में हो रहा है।’’

उन्होंने कहा कि देश की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता है।

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एक बयान में कांग्रेस ने कहा कि जून 2026 के राज्यसभा चुनाव दो उम्मीदवारों की कहानी हैं- एक ऐसा उम्मीदवार जो प्रधानमंत्री मोदी का अरबपति मित्र और कॉरपोरेट हितों का प्रतिनिधि है और दूसरा जो एक साधारण परिवार से आता है तथा संविधान के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है।

पार्टी ने कहा कि मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास तीसरी राज्यसभा सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं थे और वह आवश्यक संख्या से 10 विधायक कम थी। इसके बावजूद बीजेपी ने चुनाव में अपना आधिकारिक उम्मीदवार उतार दिया।

कांग्रेस ने आरोप लगाया, "जब यह स्पष्ट हो गया कि बीजेपी खरीद-फरोख्त या अन्य तरीकों से मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल को नहीं तोड़ पाएगी, तब उसने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कराने के लिए पर्दे के पीछे की चालें चलीं।"

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पार्टी ने कहा कि नटराजन की उम्मीदवारी को निर्वाचन अधिकारी ने ‘‘दोषपूर्ण और अनुचित तर्कों’’ के आधार पर अमान्य घोषित कर दिया।

कांग्रेस के अनुसार, नामांकन रद्द करने का आधार यह आरोप था कि उन्होंने हैदराबाद में दर्ज एक आपराधिक मामले का खुलासा नहीं किया जबकि उनके खिलाफ ऐसा कोई लंबित आपराधिक मामला है ही नहीं।

पार्टी ने कहा, ‘‘चुनाव आयोग ने दोहरे मानदंड अपनाए हैं: नटराजन के मामले में अत्यधिक कठोर रवैया और परिमल नाथवानी के मामले में उदार और सहयोगी रुख।’’

कांग्रेस ने आरोप लगाया, ‘‘बीजेपी ने तय कर लिया था कि किसी भी कीमत पर उसे मध्य प्रदेश से तीसरी राज्यसभा सीट जीतनी है, जबकि उसके पास पर्याप्त संख्या नहीं थी। जब उसे लगा कि वह कांग्रेस विधायक दल को तोड़ नहीं पाएगी, तो उसने सुनिश्चित किया कि निर्वाचन आयोग नटराजन की उम्मीदवारी खारिज कर दे।’’

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पार्टी ने दावा किया कि निर्वाचन अधिकारी का निर्णय न तो किसी ठोस तर्क पर आधारित है और न ही महज तकनीकी आधार पर, बल्कि यह पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत तथ्यों पर आधारित है।

कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग का पक्षपातपूर्ण रवैया तब और स्पष्ट हो जाता है जब मध्य प्रदेश में उसके व्यवहार की तुलना झारखंड में उसके व्यवहार से की जाए।

पार्टी के अनुसार, ‘‘परिमल नाथवानी ने अपने हलफनामे में अपना नाम तक सही तरीके से दर्ज नहीं किया, फिर भी उन्हें अपने फॉर्म-26 में हुई त्रुटियों को स्पष्ट करने और सुधारने का पूरा अवसर दिया गया।’’

कांग्रेस ने दोहराया कि बीजेपी और निर्वाचन आयोग की ‘‘सीट चोरी’’ के इस ताजा मामले में मिलीभगत है।

कांग्रेस ने 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को अपना इकलौता उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, मंगलवार को निर्वाचन अधिकारी ने यह कहते हुए उनका नामांकन खारिज कर दिया कि उन्होंने नामांकन पत्र के साथ जमा फॉर्म-26 में तेलंगाना में उनके खिलाफ दायर एक न्यायालयीन शिकायत की जानकारी छिपाई है।

बृहस्पतिवार को निर्वाचन अधिकारी ने बीजेपी के तीन उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया। 

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उधर, सुप्रीम कोर्ट से मीनाक्षी नटराजन को इस मामले में रहात नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने मीनाक्षी की राज्यसभा उम्मीदवारी खारिज होने पर दखल देने से शुक्रवार को इनकर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस नेता की याचिका खरिज करते हुए कहा कि हम इसमें दखल नहीं दे सकते हैं। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस चंदूकर की पीठ ने यह फैसला सुनाया।

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