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दो-तिहाई बहुमत के लिए विपक्षी दलों को तोड़ने में लगे हैं शाह, दुर्भावनापूर्ण मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे: कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इससे पहले कभी किसी ने लोकसभा में अपनी पार्टी के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की ऐसी कोशिश नहीं की, जैसी केंद्रीय गृह मंत्री इन दिनों संसद के मानसून सत्र से पहले पूरी बेचैनी से कर रहे हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश फोटोः सोशल मीडिया

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बिना चुनाव के लोकसभा में बीजेपी के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया और कहा कि वह लोकतंत्र का पूरी तरह से मजाक उड़ाते हुए विपक्षी दलों को तोड़ने में व्यस्त हैं लेकिन उनके दुर्भावनापूर्ण मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘इससे पहले कभी किसी ने लोकसभा में अपनी पार्टी के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की ऐसी कोशिश नहीं की, जैसी केंद्रीय गृह मंत्री इन दिनों संसद के मानसून सत्र से पहले पूरी बेचैनी से कर रहे हैं।’’

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जयराम रमेश ने कहा, ‘‘स्वयंभू चाणक्य को 17 अप्रैल, 2026 को अपमानित होना पड़ा था, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई और परिसीमन से जुड़ा खतरनाक संविधान संशोधन विधेयक अच्छे अंतर से खारिज हो गया।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि उस करारी हार से तिलमिलाए हुए शाह अब विपक्षी दलों को तोड़ने और लोकतंत्र का मजाक बनाने में व्यस्त हैं। रमेश ने कहा, ‘‘लड़ाई जारी है। उनके दुर्भावनापूर्ण मंसूबे सफल नहीं होने चाहिए और सफल नहीं होंगे।’’

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जयराम रमेश का यह बयान तब आया जब तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता जगदीश चंद्र वर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी के बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सोमवार को मुलाकात कर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस’ के तौर पर मान्यता दिये जाने की मांग करेंगे। बसुनिया ने दावा किया कि अभी 19 लोकसभा सदस्य इस गुट का समर्थन कर रहे हैं। कूचबिहार से सांसद और लोकसभा में एनडीए का समर्थन करने के इच्छुक सांसदों में शामिल बसुनिया ने बताया कि यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेगा।

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के अंदर हुई बगावत के कारण तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकट का सामना कर रही है। इस बगावत ने पार्टी की संगठनात्मक और विधायी ताकत को काफी कमजोर कर दिया है। पिछले हफ्ते, पार्टी के दो-तिहाई से ज़्यादा विधायकों- 80 में से 58 ने अलग गुट बनाकर रिताब्रता बनर्जी को पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष घोषित कर दिया, जिसे स्पीकर ने भी मान्यता दे दी।

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बाद में, यह संकट संसद सदस्यों तक भी पहुंच गया, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 20 से ज़्यादा लोकसभा सदस्यों ने बगावत करते हुए एनडीए को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। हालांकि अभी तक बागी सांसदों की संख्या को लेकर संशय है, क्योंकि अभी तक सभी 20 सांसद एक सा सामने नहीं आए हैं। अब कहा जा रहा है कि इस गुट ने 20 सांसदों के हस्ताक्षर का दावा करते हुए खुद को असली तृणमूल घोषित करने की मांग की है।

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