हालात

सुलगते मणिपुर में हालात चिंताजनक, गुस्साई भीड़ ने BJP विधायक पर किया हमला, गंभीर हालात में अस्पताल में भर्ती

मणिपुर में हिंसा के बाद हालात चिंताजनक है। गुरुवार को गुस्साई भीड़ ने बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर हमला किया। बीजेपी विधायक पर उस वक्त हमला किया गया, जब सीएम एन बीरेन सिंह से मुलाकात कर प्रदेश सचिवालय से लौट रहे थे।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

मणिपुर में भड़की हिंसा के बाद हालात खराब हैं। चारों तरफ अफरा-तफरी है, कई जिलों में कर्फ्यू है, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दिया है। हालात इतने बेकाबू हो गए हैं दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। गुरुवार को गुस्साई भीड़ ने बीजेपी विधायक वुंगजागिन वाल्टे पर हमला किया।

खबरों के मुताबिक, बीजेपी विधायक पर उस वक्त हमला किया गया, जब सीएम एन बीरेन सिंह से मुलाकात कर प्रदेश सचिवालय से लौट रहे थे। खबरों के मुताबिक, फिरजावल जिले के थानलॉन से तीन बार के विधायक वाल्टे पर उस वक्त हमला किया गया, जब वो इंफाल में अपने सरकार आवास जा रहे थे। आक्रोशित भीड़ ने विधायक और उनके ड्राइवर पर भी हमला किया। जबकि उनके PSO भागने में सफल रहे। विधायक वुंगजागिन वाल्टे की हालत गंभीर बनी हुई है। उनको इंफाल के क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में भर्ती कराया गया है। जहां उनका इलाज चल रहा है।

कैसे भड़की हिंसा? 

हिंसा की शुरुआत चूराचांदपुर जिले के तोरबंग इलाके में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन, मणिपुर (एटीएसयूएम- ATSUM) के आह्वान पर हुए आदिवासी एकता मार्च से मानी जा रही है। इस मार्च का आयोजन मैती समुदाय द्वारा उन्हें राज्य की अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग के खिलाफ किया गया था। इस मार्च में विभिन्न आदिवासी समुदाय के लोगों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया था। मार्च का नारा था – Come now, let us reason together…यह मार्च जब इलाके के सेनापति, उखरुल, कांगपोकपी, तामेंगलॉंग, चूराचांदपुर, चांदेल और तेंगनुपल से गुजरा तो नारे और बुलंद हो गए।

इस रैली में हजारों की तादाद में लोग शामिल थे। इसी मार्च के दौरान आदिवासी और गैर-आदिवासियों के बीच तोरबंग इलाके में हिंसा शुरु हो गई।

बवाल की वजह क्या है?

मैतेई समुदाय की आबादी यहां 53 फीसदी से ज्यादा है, लेकिन वो सिर्फ घाटी में बस सकते हैं। वहीं, नागा और कुकी समुदाय की आबादी 40 फीसदी के आसपास है और वो पहाड़ी इलाकों में बसे हैं, जो राज्य का 90 फीसदी इलाका है। मणिपुर में एक कानून है। जिसके मुताबिक, आदिवासियों के लिए कुछ खास प्रावधान किए गए हैं। इसके तहत, पहाड़ी इलाकों में सिर्फ आदिवासी ही बस सकते हैं। चूंकि मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला है, इसलिए वो पहाड़ी इलाकों में नहीं बस सकते। जबकि, नागा और कुकी जैसे आदिवासी समुदाय चाहें तो घाटी वाले इलाकों में जाकर रह सकते हैं। मैतेई और नागा-कुकी के बीच विवाद की यही असल वजह मानी जा रही है, इसलिए मैतेई ने भी खुद को अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग की थी।

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Published: 05 May 2023, 8:41 AM IST

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