
सत्यवादी रक्षक पार्टी, आम जनमत पार्टी, गरीब कल्याण पार्टी, स्वतंत्र अभिव्यक्ति पार्टी, भारतीय नेशनल जनता दल, न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी और अन्य। ये वे सारी राजनीतिक पार्टियां हैं जिनका मुख्यालय गुजरात में है। इनमें से पांच के दफ्तर अहमदाबाद में और एक का दफ्तर आणंद में है। इन सभी पार्टियों के दफ्तरों में सन्नाटा है। इन सभी 6 राजनीतिक पार्टियों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 15 उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, लेकिन इनको जो चंदा मिला है वह बीजेपी के अलावा सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिले कुल चंदे से कहीं ज्यादा है। इनमें से हर एक को 2022-23 में 138 से 620 करोड़ रुपए तक चंदे में मिले। ये सारा खुलासा किया है बीबीसी हिंदी के लिए काम करने वाली शुभांगी मिश्रा ने। बीबीसी हिंदी ने अपने सोशल मीडिया पर इस खुलासे को शेयर किया है।
इनमें से आम जनमत पार्टी को सबसे ज्यादा 620 करोड़ रुपए का चंदा मिला। जबकि सबसे कम गरीब कल्याण पार्टी के हिस्से में आया जोकि 138 करोड़ रुपए है। सत्यावादी रक्षक पार्टी को 330 करोड़ रुपए और न्यू इंडिया यूनाइटेड पार्टी को 200 करोड़ रुपए चंदे के रूप में मिले। ये सारा चंदा वर्ष 2023-24 के दौरान मिला जोकि 2024 के लोकसभा चुनाव से ऐन पहले वाला साल है। इन सभी 6 राजनीतिक दलों को मिले वाला कुल चंदा 1500 करोड़ से ज्यादा है।
कानूनन इन पार्टियों को काम करने और चंदा लेने की इजाज़त है। चंदा देने वालों और राजनीतिक पार्टियों, दोनों के लिए इस चंदे पर कोई टैक्स नहीं लगता। बीबीसी की जांच में किसी भी तरह की गैर-कानूनी गतिविधि का आरोप नहीं लगाया गया है, लेकिन इसमें यह ज़रूर बताया गया है कि इनकम टैक्स विभाग मिले चंदे की जांच कर रहा है और उसने चंदा देने वालों कुछ लोगों से इसका एक हिस्सा टैक्स के तौर पर वसूला भी है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने बीबीसी की टीम को बताया कि इसका तरीका यह है कि चंदा देने वाले इनकम टैक्स में छूट पाने के लिए चंदे का सर्टिफ़िकेट लेते हैं और समय के साथ राजनीतिक पार्टियों से चंदे का ज़्यादातर हिस्सा वापस पा लेते हैं; पार्टियां 'सर्विस चार्ज' काटकर पैसे वापस कर देती हैं।
बीबीसी की पड़ताल में यह नहीं बताया गया है कि क्या उस साल के बाद चंदा मिलना बंद हो गया। अगर चंदा मिलना बंद हो गया, लेकिन पार्टियां कागज़ों पर सक्रिय बनी रहीं, तो इससे संकेत मिलता है कि अगले चुनावी चक्र से पहले चंदे का एक और दौर आ सकता है। बीबीसी हिंदी की टीम हर पार्टी के आधिकारिक रजिस्टर्ड पते का पता लगाने में कामयाब रही—कुछ पते रिहायशी इमारतों में फ्लैट थे तो कुछ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में। बीबीसी हिंदी की टीम ने पाया कि ज़्यादातर दुकानें बंद थीं। सत्यवादी रक्षक पार्टी की अध्यक्ष स्वाति बेन, जो आणंद में उसी रिहायशी कॉम्प्लेक्स के एक और फ्लैट में रहती हैं जहां पार्टी का रजिस्टर्ड ऑफिस है, उन्होंने बीबीसी को बताया कि चंदे की रकम चैरिटी पर खर्च की गई थी, लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया।
चुनाव आयोग के पास 2,800 राजनीतिक पार्टियां रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनमें से सिर्फ़ 73 को ही चुनाव आयोग से मान्यता मिली हुई है। इनमें से सिर्फ़ छह को 'राष्ट्रीय पार्टी' का दर्जा हासिल है, जिनमें बीजेपी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, बीएसपी, सीपीएम और एनपीपी शामिल हैं। बाकी पार्टियों को राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा मिला हुआ है। हालांकि, सभी रजिस्टर्ड पार्टियों के लिए ज़रूरी है कि वे अपने खातों का ऑडिट करवाएं और चुनाव आयोग को सालाना रिटर्न फाइल करें, जिसमें 20,000 रुपये से ज़्यादा चंदा देने वालों की जानकारी हो। बीबीसी ने अपनी पड़ताल उन छह गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों तक सीमित रखी है, जिन्हें 2022-23 में सबसे ज़्यादा चंदा मिला था।
रिपोर्ट से पता चलता है कि सत्यवादी रक्षक पार्टी ने 2024 के आम चुनाव में सिर्फ़ एक उम्मीदवार उतारा था और दावा किया कि उसने प्रचार पर आठ करोड़ रुपये खर्च किए। उसे ठीक पिछले साल चंदे के तौर पर 330 करोड़ रुपये मिले थे और उसने दावा किया कि उसने चैरिटी पर 316 करोड़ रुपये खर्च किए। असल में, 2022-23 में इन छह गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों को बीजेपी को छोड़कर बाकी सभी राष्ट्रीय पार्टियों से ज़्यादा चंदा मिला।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने 800 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टियों का पंजीकरण रद्द कर दिया है क्योंकि वे चुनाव में भाग लेने और एक भी उम्मीदवार खड़ा करने में नाकाम रही थीं। इससे जाहिर है कि गुजरात में पंजीकृत छह राजनीतिक दलों ने जांच और सूची से बाहर होने से बचने के लिए 15 उम्मीदवार क्यों खड़े किए।