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सोनम वांगचुक लद्दाख भवन में अनशन पर बैठे, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति

सोनम वांगचुक ने कहा कि हमें देश के शीर्ष नेतृत्व से मिलने का जो आश्वासन दिया गया था, अब तक उसके लिए कोई तारीख नहीं दी गई है, इसलिए हमें फिर से भूख हड़ताल शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हम बस देश के शीर्ष नेताओं से मिलकर अपनी शिकायतें रखना चाहते हैं।

सोनम वांगचुक लद्दाख भवन में अनशन पर बैठे, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति
सोनम वांगचुक लद्दाख भवन में अनशन पर बैठे, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की नहीं मिली अनुमति फोटोः सोशल मीडिया

लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने सहित विभिन्न मांगों की लेकर पैदल मार्च कर दिल्ली पहुंचे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर आंदोलन की अनुमति नहीं मिलने पर रविवार को लद्दाख भवन में ही अनशन शुरू कर दिया है। वांगचुक ने केंद्र पर दिए गए आश्वासन के अनुसार मिलने के लिए कोई तारीख नहीं देने का आरोप लगाया। वांगचुक ने कहा कि हम एक ऐसी जगह की तलाश कर रहे थे जहां हम अपनी शांतिपूर्ण भूख हड़ताल कर सकें, लेकिन हमें वह जगह नहीं दी गई। इसलिए हमारे पास लद्दाख भवन से (भूख हड़ताल) शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, जहां हम वस्तुतः हिरासत में हैं।

सोनम वांगचुक ने आगे कहा कि हमें देश के शीर्ष नेतृत्व से मिलने का जो आश्वासन दिया गया था, हमें उसके लिए कोई तारीख नहीं दी गई है, इसलिए हमें फिर से अपनी भूख हड़ताल शुरू करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जिसे हमने राजघाट पर तोड़ा था। हमारी हमेशा से यही अपील रही है- 30 से 32 दिनों तक चलने के बाद, हम यहां आए हैं और राजधानी में अपने देश के कुछ शीर्ष नेताओं से मिलकर अपनी शिकायतें उनके साथ साझा करना चाहते हैं। मैं किसी से समर्थन नहीं मांग रहा हूं। हम उन लोगों का स्वागत करते हैं जो समझते हैं कि भारत में क्या हो रहा है, लद्दाख के साथ क्या हो रहा है और हमारे अधिकार क्या हैं।

अनशन शुरू करने से पहले वांगचुक ने कहा कि अपने आंदोलन के लिए कोई स्थान न मिलने पर उन्हें लद्दाख भवन में ही विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा। वांगचुक ने ‘एक्स’ पर कहा कि उन्हें जंतर-मंतर पर अनशन करने की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा, ‘‘एक और अस्वीकृति, एक और हताशा। अंततः आज सुबह हमें विरोध प्रदर्शन के लिए आधिकारिक रूप से तय स्थान के लिए यह अस्वीकृति पत्र मिला।’’ वांगचुक सहित करीब 18 लोग लद्दाख भवन के गेट के पास बैठे हैं और ‘‘हम होंगे कामयाब’’ गीत गा रहे हैं और ‘भारत माता की जय’, ‘जय लद्दाख’ और ‘लद्दाख बचाओ, हिमालय बचाओ’ जैसे नारे लगा रहे हैं।

जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक ‘दिल्ली चलो पदयात्रा’ का नेतृत्व कर रहे हैं, जो एक महीने पहले लेह से शुरू हुई थी। मार्च का आयोजन ‘लेह एपेक्स बॉडी’ ने किया है, जो कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथ मिलकर पिछले चार वर्ष से लद्दाख को राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने के लिए आंदोलनरत है। ज्यादातर प्रदर्शनकारी शनिवार को लद्दाख लौट गए, जबकि शेष प्रदर्शनकारी वांगचुक के साथ अनशन में शामिल होने के लिए यहीं रुके हैं।

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