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झारखंड के मंत्री के बेटे का नाम था तबलीगियों की सूची में, कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने पर अब मच गया बवाल

झारखंड पुलिस ने राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री के बेटे का नाम तबलीगियों की सूची में शामिल कर लिया और उनका सैंपल लेकर क्वारंटाइन सेंटर भेज दिया। सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद अब बवाल मच गया है और मामले की शिकायत सीएम तक पहुंची है।

फोटो : सोशल मीडिया
फोटो : सोशल मीडिया 

झारखंड सरकार के मंत्री हाजी हुसैन अंसारी की आपत्ति के बावजूद उनके बेटे की कोरोना जांच कराने का मामला अब विवादों में है। रांची के राजेंद्र इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में हुई जांच में उनके बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आई है। मतलब, उनमें कोविड-19 का संक्रमण नहीं है।

दरअसल मंत्री के बेटे की जांच झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच के उस पत्र के बाद करायी गई थी, जिसमें मंत्री के बेटे का नाम तबलीगी जमात के सम्मेलन में शामिल होने वालों की सूची में शामिल था। हालांकि, मंत्री हाजी हुसैन अंसारी ने तब भी दावा किया था कि उनका बेटा पिछले कई साल से दिल्ली नहीं गया और न ही उसका तबलीगी जमात से कुछ लेनादेना है। लेकिन देवघर जिले के एक अस्पताल में कोरोना जांच के लिए उनका सैंपल लेने के बाद उन्हें मधुपुर के क्वारंटीन सेंटर में भर्ती करा दिया गया। इसके साथ ही मंत्री और उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी होम क्वारंटीन रहने की सलाह दी गई थी।

अब सैंपल की रिपोर्ट आ गई है और मंत्री जी के बेटे में कोरोना वायरस का संक्रमण नहीं पाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के देवघर स्थित नोडल अफसर डा विधु विबोध ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि “राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के बेटे की जांच रिपोर्ट शुक्रवार की शाम हमें प्राप्त हुई। उनके सैंपल में कोविड-19 का स्टेटस निगेटिव है। वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। अब वे क्वारंटीन सेंटर में बने रहेंगे या उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी, यह वरीय अधिकारियों को तय करना है।”

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रिपोर्ट के बाद स्पेशल ब्रांच की लिस्ट पर सवाल

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दरअसल, झारखंड पुलिस की स्पेशल ब्रांच की एसपी संध्या रानी मेहता ने राज्य के सभी उपायुक्तों को एक पत्र लिखकर तबलीगी जमात में शामिल लोगों की मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया था। उन्होंने इस चिट्ठी के साथ 37 लोगों के नाम और फ़ोन नंबर भी उपलब्ध कराया था। इनमें देवघर के भी तुछ लोगों के नाम थे। यह पत्र देवघर के एसपी को भी भेजा गया था। तब किसी को यह नहीं पता था कि इस सूची में शामिल एक नाम मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के बेटे का भी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने जब उन नाम और नंबरों की खोज की तो उन्हें मंत्री पुत्र के बारे मे पता चला।

देवघर के सिविल सर्जन डा विजय कुमार ने बताया कि इसके बाद प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ लोग उनके घऱ पर पहुंचे और स्पेशल ब्रांच के पत्र का हवाला देकर मंत्री पुत्र से कोरोना जांच कराने की बात कही। थोड़ी-बहुत आपत्ति के बाद वे सैंपल देने पर राजी हो गए। फिर एक अप्रैल को उनका सैंपल कलेक्ट कर उसे जांच के लिए रांची भेजा जा सका।

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तबलीगी जमात से संबंधों से इनकार

मीडिया से बातचीत में मंत्री पुत्र जफर (बदला हुआ नाम) ने कहा कि अधिकारियों ने उनका सैंपल जबरन लिया है। जबकि मैंने उनसे बार-बर कहा कि मेरा कोई संबंध तबलीगी जमात से नही है। अव्वल तो यह कि साल 1992 के बाद मैं कभी दिल्ली भी नहीं गया। इसके बावजूद किसी ने मेरी बात नहीं सुनी और मुझे सैंपल देना पड़ा और मुझे क्वारंटीन किया जा रहा है।

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मामले की मुख्यमंत्री से हुई शिकायत

हाजी हुसैन अंसारी ने अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देवघर जिला प्रशासन ने उन्हें और उनके परिवार को बेवजह होम क्वारंटीन करा दिया। अगर मेरा बेटा यह कह रहा था कि उसका कोई संबंध तबलीगी जमात से नहीं है, तो प्रशासन को यह बात सुननी चाहिए थी। पहले वे इसकी जांच कर लेते, तब सैंपल लेते। लेकिन, प्रशासन ने हमारी बात नहीं सुनी। मेरा सिर्फ यह कहना है कि अगर गृह मंत्रालय ने कोई सूची भेजी है, तो उसका आधार क्या है। एक नाम के कई लोग हो सकते हैं और आजकल टेलीफोन नंबर दोबारा अलाट कर दिए जाते हैं। ऐसे में किसी शरीफ आदमी को तंग करना उचित नहीं है।

उन्होंने बताया कि मेरे बेटे की बाइक की दुकान है। वहां सीसीटीवी लगा है। मैंने प्रशासन से कहा था कि चाहें तो सीसीटीवी की जांच कर लें, कि उन तारीखों पर (तबलीगी जमात के सम्मेलन के दौरान) मेरा बेटा दुकान में था या कहीं गायब था। जब वह कह रहा है कि उसे दिल्ली गए 25 साल से भी अधिक हो गए, तब यह बात सुननी चाहिए थी।

बकौल अंसारी, उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फ़ोन कर प्रशासनिक अधिकारियों के इस व्यवहार की शिकायत भी की। इधर, राज्य के कई और नेताओं ने इस पूरे प्रकरण पर चिंता जाहिर की और गृह मंत्रालय द्वारा भेजी गई सूची पर भी सवाल उठाए।

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