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तेजस्वी यादव का सरकार पर हमला, 'खजाना खाली, वित्तीय हालात चिंताजनक, NDA की दिवालिया राजनीति से बिहार बदहाल'

तेजस्वी यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि एनडीए की ‘‘दिवालिया राजनीति’’ और ‘‘अदूरदर्शी नीतियों’’ के कारण बिहार कंगाल होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का खजाना खाली होने से वित्तीय हालात चिंताजनक हो गए हैं।

फोटो: IANS
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आरजेडी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश घटते राजस्व, बढ़ते राजकोषीय घाटे, अत्यधिक कर्ज और भारी ब्याज अदायगी के कारण गंभीर वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है।

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तेजस्वी यादव ने एक बयान जारी कर कहा कि एनडीए की ‘‘दिवालिया राजनीति’’ और ‘‘अदूरदर्शी नीतियों’’ के कारण बिहार कंगाल होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का खजाना खाली होने से वित्तीय हालात चिंताजनक हो गए हैं।

आरजेडी नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में सरकार का बजटीय प्रबंधन इतना कमजोर है कि वित्त वर्ष 2026-27 के केवल तीन महीने बीतने के बाद ही सामान्य मासिक पेंशन जैसे नियमित भुगतानों के लिए भी आकस्मिकता निधि से 3,662 करोड़ रुपये की निकासी करनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार को वित्तीय संकट की वास्तविक स्थिति स्वीकार करते हुए जनता को यह बताना चाहिए कि नियमित भुगतान के लिए नियमित बजट व्यवस्था के बजाय आकस्मिकता निधि का सहारा लेने की नौबत क्यों आई।

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तेजस्वी यादव ने कहा, “मेरे तथ्यात्मक और तर्कपूर्ण सवालों का जवाब देने के बजाय सरकार भ्रामक प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर रही है।” उन्होंने सवाल किया कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन, जो वर्षों से नियमित रूप से लाभार्थियों के खातों में भेजी जाती रही है, उसके भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि का इस्तेमाल क्यों किया गया।

तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर सरकार को नियमित खर्चों के लिए भी आकस्मिकता निधि का सहारा लेना पड़ रहा है, तो विकास योजनाओं और अन्य परियोजनाओं के लिए संसाधन कहां से आएंगे।

आरजेडी नेता ने कहा कि पेंशन कोई आकस्मिक खर्च नहीं है और न ही पेंशनधारक किसी आपदा की श्रेणी में आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के बजाय लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है।

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तेजस्वी यादव ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को केवल बजटीय प्रबंधन का मुद्दा बताकर इसके मूल कारणों और सैद्धांतिक पक्ष पर चर्चा से बच रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की आर्थिक स्थिति दयनीय है और सरकार इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से बच रही है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार के वित्तीय हालात को लेकर संकेत चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट दस्तावेजों में वर्ष 2025-26 के लिए राज्य का राजकोषीय घाटा 11.8 फीसदी बताया गया है, जबकि राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के तहत यह तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।

तेजस्वी यादव ने बिहार आकस्मिकता निधि से जुड़े हालिया संशोधन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसा प्रावधान किया है, जिसके तहत किसी भी वित्त वर्ष में आकस्मिकता निधि का आकार उस वर्ष के कुल बजटीय व्यय के 10 फीसदी तक बढ़ाया जा सकता है।

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तेजस्वी ने कहा कि पहले बिहार आकस्मिकता निधि का आकार 350 करोड़ रुपये था, लेकिन नये प्रावधान के तहत इसे हजारों करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 के अनुमानित बजटीय व्यय 3,24,925 करोड़ रुपये के आधार पर आकस्मिकता निधि का आकार 32,492 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जो राष्ट्रीय आकस्मिकता निधि के आकार 30,000 करोड़ रुपये से भी अधिक होगा।

आरजेडी नेता ने कहा, “आकस्मिकता निधि का उद्देश्य केवल अप्रत्याशित और आपात स्थितियों में तत्काल व्यय की व्यवस्था करना है। इसे समानांतर बजट या नियमित वित्तीय प्रबंधन की कमियों को छिपाने के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि सरकार यह स्पष्ट करे कि आखिर ऐसी कौन-सी संभावित परिस्थितियां हैं, जिनके लिए 350 करोड़ रुपये की निधि को बढ़ाकर 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक तक ले जाने की शक्ति अपने पास रखी गई है।

तेजस्वी यादव ने कहा कि लोकतांत्रिक वित्तीय व्यवस्था का आधार पारदर्शिता और विधायिका की निगरानी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में वित्तीय प्रबंधन के मामले में असाधारण शक्तियां हासिल कर ली गई हैं, जबकि उनके औचित्य को लेकर अब भी सवाल बने हुए हैं।

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