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केंद्रीय बजट 2027 में घट सकता है राजकोषीय घाटा, मॉर्गन स्टेनली ने जताया अनुमान

मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से टैक्स कलेक्शन में सुधार होगा, जिससे सरकार को वर्ष 2027 में टैक्स से अधिक आय होगी और वह बुनियादी ढांचे तथा सामाजिक सुविधाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेगी।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

आने वाले केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 4.2 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह वित्त वर्ष 2026 के 4.4 प्रतिशत के मुकाबले कम रहेगा।

शुक्रवार को जारी मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे देश का कुल सरकारी कर्ज भी घटकर जीडीपी का 55.1 प्रतिशत रह सकता है, जो वर्ष 2026 में 56.1 प्रतिशत था।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार धीरे-धीरे खर्च और घाटे को कम करने की नीति पर काम कर रही है, जिससे देश का कर्ज नियंत्रित रह सके।

मॉर्गन स्टेनली ने बताया कि नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ से टैक्स कलेक्शन में सुधार होगा, जिससे सरकार को वर्ष 2027 में टैक्स से अधिक आय होगी और वह बुनियादी ढांचे तथा सामाजिक सुविधाओं पर ज्यादा खर्च कर सकेगी।

सरकार का मुख्य ध्यान पूंजीगत खर्च, रोजगार सृजन, सामाजिक क्षेत्र पर लक्षित खर्च और संरचनात्मक सुधारों को आगे बढ़ाने पर रहेगा।

बजट का शेयर बाजार पर असर अब पहले की तुलना में कम होता जा रहा है। हालांकि, बाजार की असली चाल बजट से पहले बनी उम्मीदों पर निर्भर करती है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा कि इस समय बाजार बजट को लेकर थोड़ा सतर्क नजर आ रहा है। बजट के बाद बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ-साथ तेजी की संभावना भी बनी हुई है।

बाजार के लिए बजट में देखने योग्य सबसे अहम बातें-राजकोषीय सुदृढ़ीकरण, पूंजीगत खर्च और क्षेत्रस्तरीय फैसले होंगी।

रिपोर्ट में खास तौर पर पूंजी बाजार सुधारों पर नजर रखने की बात कही गई है, जिससे विदेशी निवेशकों को भारत में दोबारा निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिल सके।

ब्रोकरेज फर्म ने वित्तीय क्षेत्र, उपभोक्ता वस्तुओं और औद्योगिक कंपनियों को निवेश के लिए बेहतर बताया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले सरकारी बॉन्ड की शुद्ध मात्रा लगभग 11.6 लाख करोड़ रुपए रह सकती है, जो पिछले वर्ष के लगभग बराबर है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में कुल सरकारी बॉन्ड जारी करने की मात्रा बढ़कर 15.8 ट्रिलियन रुपए (वित्त वर्ष 2026 में 11.5 ट्रिलियन रुपए) हो सकती है, क्योंकि इस बार पुराने बॉन्ड का भुगतान ज्यादा है।

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो सरकारी बॉन्ड बाजार में कुछ समय के लिए तेजी आ सकती है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर टैरिफ और भू-राजनीति से संबंधित वैश्विक अनिश्चितता विदेशी मांग पर दबाव डाल रही है, लेकिन देश की घरेलू मांग जीडीपी वृद्धि को आगे बढ़ाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 की तिमाही के ताजा आर्थिक आंकड़े मजबूत रहे हैं। इससे साफ होता है कि भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में घरेलू खपत की बड़ी भूमिका रहेगी।

इसके साथ ही सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियों, लोगों की बढ़ती खरीद क्षमता और बेहतर रोजगार स्थिति से उपभोग में लगातार सुधार बना रहेगा।

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