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फिर उगला हिमंत बिस्वा सरमा ने 'मियां' के खिलाफ ज़हर, सीपीएम की मांग, जेल में डालो असम सीएम को

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर 'मियां' के खिलाफ भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर मियां रिक्शा वाला पांच रुपए मांगे तो उसे 4 रुपए दो। उनके बयान पर सीपीएम ने मांग की है कि सरमा को तुरंत जेल में डालना चाहिए।

असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा लगातार मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ बयान दे रहे हैं
असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा लगातार मुसलमानों के खिलाफ भड़काऊ बयान दे रहे हैं 

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर मुसलमानों के खिलाफ बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि, “यह छिपाने की बात नहीं है....हम मियां के खिलाफ हैं....हां, हम उनके वोट चुरा रहे हैं....हां यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है कि हम फॉर्म 7 भरकर उनके नाम मतदाता सूची से कटवाने के लिए चुनाव आयोग को दें...मैंने खुले तौर पर बीजेपी कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे ऐसा काम करें, हम उन्हें वोट के अधिकार से वंचित करना चाहते हैं...वे जाएं और बांग्लादेश में वोट डालें....।” ये कुछ ऐसे बयान हैं जो हिमंत लगातार दे रहे हैं।

हालांकि बुधवार 28 जनवरी को उन्होंने इसमें एक बात और जोड़ी कि वे मुसलमानों के खिलाफ नहीं बल्कि बांग्लादेशियों के खिलाफ हैं। बीते कई दिनों से असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं जब वे ऐसे बयान नहीं दे रहे हैं। उन्होंने तो यहां तक लोगों का आह्वान किया कि ‘मियां’ लोगों को परेशान करने के लिए क्या-क्या किया जाए। उन्होंने कहा कि अगर मिंयां रिक्शावाला है और उसका किराया पांच रुपया होता है तो सिर्फ 4 रुपया ही दें।

सरमा के बयानों पर राष्ट्रीय मीडिया खामोश है। विपक्ष भी एक तरह से कुछ खास नहीं बोल रहा है और उनके बयानो को गंभीरता से नहीं ले रहा है।। हालांकि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जरूर इस बाबत एक्स पर पोस्ट लिखी है। उन्होंने कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रिक्शा वालों को पांच के बजाए 4 रुपए देने से असम के लोग अमीर नहीं होने वाले। अगर असम के लोगों को अमीर करना है तो 1.5 लाख बीघा अधिसूचित जमीन कार्पोरेट दे दी गई है, उसे वापस लाया जाए तो शायद ऐसा हो। उन हजारों करोड़ की बात करो जो आपने अपनी जेबें भरने के लिए असम से लूटे हैं।

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इस बीच मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी – सीपीएम ने एक बयान जारी कर हिमंत बिस्वा सरमा के बयानों की तीखी आलोचना की है। पार्टी ने बयान में कहा है कि एक संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा ऐसे बयान देना शर्मनाक हैं। बयान में कहा गया है कि, “वह भारत और इसके धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के लिए एक धब्बा हैं, उन्हें तुरंत सलाखों के पीछे डालना चाहिए।” पार्टी ने आगे कहा है कि, "जब सुप्रीम कोर्ट अभी भी एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, तब यह आदमी खुलेआम इस प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल की वकालत कर रहा है और अपने समर्थकों को भी ऐसा करने के लिए उकसा रहा है। क्या अदालत उसके द्वारा दिए जा रहे अत्यधिक सांप्रदायिक भड़काऊ बयानों का स्वतः संज्ञान लेगा और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने और समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने के लिए कार्रवाई करेगा?"

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हिमंत बिस्वा सरमा यह तर्क दे सकते हैं कि वह कुछ भी नया नहीं कह रहे हैं; कि वह सिर्फ़ वही दोहरा रहे हैं जो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इतने लंबे समय से कह रहे हैं; कि बांग्लादेशी मुसलमान दीमक की तरह हैं और बीजेपी सरकार उनमें से हर एक की पहचान करके उन्हें बांग्लादेश वापस भेज देगी। पिछले साल देश भर में पुलिस ने बंगाली बोलने वाले लोगों को निशाना बनाया, उनमें से कई को हिरासत में लिया और कुछ को तो सीमा पार बांग्लादेश भेज दिया।

लेकिन, पिछले पांच दिनों में लगभग हर दिन हिमंत बिस्वा सरमा के नए बयानों का क्या मतलब है? उन्होंने खुलकर यह माना कि वह वोटरों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। उनके हवाले से कहा गया है, "अगले 30 सालों तक असम को ध्रुवीकरण की राजनीति करनी होगी - और यह ध्रुवीकरण हमारी पहचान बचाने की लड़ाई है। यह असम के मूल निवासियों और अवैध बांग्लादेशियों के बीच है।" 

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असमिया राष्ट्रवाद और पहचान को बढ़ावा देना और लोगों को अपनी परेशानियों के लिए मुसलमानों को दोषी ठहराने के लिए उकसाने के खतरनाक अंजाम हो सकते हैं। पहले से ही सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदार तत्व मुख्यमंत्री के रुख का स्वागत करते दिख रहे हैं, इसे मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हरी झंडी मान रहे हैं। अगर हालात बेकाबू हो जाते हैं और राज्य में हिंसा भड़कती है, तो इसकी बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री पर होगी। अगर ऐसा होता है, तो क्या तब भी सरमा बचे रह सकते हैं?

असम के मुख्यमंत्री के गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार के लिए कई तरह की वजहें बताई जा रही हैं, जिनमें से एक यह है कि उनकी लापरवाही की वजह बीजेपी के अंदर से मिल रहे संकेत हैं कि वह चुनाव हार सकते हैं; और अगर वह बीजेपी और सहयोगियों को किसी तरह जीत दिला भी देते हैं, तो भी शायद उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर पसंद न किया जाए। शायद इसी वजह से उनके बयानों में बेचैनी नजर आ रही है

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