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TMC सिंबल फ्रीज मामले में हुई सुनवाई, SC ने EC से पूछा- कब तक होगा अंतिम फैसला? 28 सितंबर को अगली तारीख

टीएमसी के नाम और घास-फूल चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा बताने को कहा है और 28 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।

फोटोः IANS
फोटोः IANS 

  • TMC के नाम-सिंबल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा पूछी।

  • ममता गुट ने कहा, देरी हुई तो नवंबर के कॉरपोरेशन चुनाव पर असर पड़ सकता है।

  • कपिल सिब्बल ने पार्टी का मूल नाम और ‘घास-फूल’ सिंबल बनाए रखने की मांग की।

तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और उसके पारंपरिक ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न को फ्रीज करने के चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले के खिलाफ दायर ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह बताने को कहा कि वह इस विवाद पर अंतिम फैसला कब तक ले सकता है। कोर्ट ने मामले का जल्द निपटारा करने की जरूरत पर जोर दिया।

मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उस दिन चुनाव आयोग को अंतिम फैसला लेने की समयसीमा के बारे में कोर्ट को जानकारी देनी होगी।

कपिल सिब्बल बोले- 'ये हमारे अस्तित्व का सवाल'

ममता बनर्जी गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि अगर चुनाव आयोग जल्द अंतिम फैसला नहीं लेता है तो नवंबर में होने वाले कॉरपोरेशन चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका पक्ष चुनाव रोकने की मांग नहीं कर रहा, बल्कि पार्टी का मूल नाम और चुनाव चिह्न बनाए रखने की अनुमति चाहता है।

सिब्बल ने कहा कि “ये हमारे अस्तित्व का सवाल है” और कोर्ट को इस मामले में उचित उपाय करना चाहिए। उन्होंने यह भी दलील दी कि चुनावी प्रक्रिया के बीच आयोग ने पार्टी का चुनाव चिह्न फ्रीज किया है।

'चुनाव के बीच सिंबल बदलने की मिसाल बनेगी'

सुनवाई के दौरान सिब्बल ने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट आयोग के इस आदेश में दखल नहीं देता है तो भविष्य में भी चुनाव के बीच चुनाव चिह्न बदलने की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने आयोग के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस तरह का कदम उठाया गया है।

इस पर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इसका उपाय यही है कि निर्वाचन आयोग इस विवाद पर जल्द फैसला करे। सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं।

दोनों गुटों को दिए गए अलग नाम और चुनाव चिह्न

दरअसल, चुनाव आयोग ने TMC के भीतर चल रहे विवाद के बीच पार्टी के मूल नाम और ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है। इसके बाद दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए हैं। ममता बनर्जी गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है, जबकि दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है।

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के इस अंतरिम फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब 28 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई में आयोग को यह बताना होगा कि वह TMC के नाम और चुनाव चिह्न के विवाद पर अंतिम फैसला कब तक लेगा।  

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