
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'सेव अमेरिका एक्ट' के समर्थन में भारत की चुनाव प्रणाली का जिक्र करने वाले बयान विपक्ष की प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने आरोप लगाया है कि जब भारत के चुनाव आयोग की साख और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, ऐसे समय में सरकार विदेशी नेता के बयान को प्रमुखता देकर चुनाव आयोग को सही साबित करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने कहा कि देश में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भारी आलोचना हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब सरकार को चुनाव आयोग के बचाव के लिए विदेशों से मदद मांगनी पड़ रही है और इसी वजह से ट्रंप के बयान को इतनी प्रमुखता से प्रचारित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत का चुनाव आयोग पहले बेहतरीन तरीके से काम करता था और उसे पूरी दुनिया में प्रशंसा मिलती थी। सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि यह स्थिति तब तक थी, जब तक ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं बने थे और केंद्र में बीजेपी की सरकार नहीं आई थी।
कांग्रेस नेता ने कहा कि आज चुनाव आयोग संदेह के घेरे में है और ऐसे में ट्रंप के बयान का सहारा लेकर उस संदेह को गलत साबित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे शर्म की बात बताया।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने भी ट्रंप के बयान को लेकर सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने अमेरिका जाकर यह सवाल किया था कि बिना फोटो पहचान-पत्र के अमेरिका में इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं।
सपा प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा कि सवाल यह नहीं होना चाहिए था, बल्कि यह पूछा जाना चाहिए था कि अमेरिका में लोकतंत्र पर हमला क्यों नहीं हुआ और वहां लोकतंत्र पर सवाल क्यों नहीं उठाए गए।
आशुतोष वर्मा ने कहा कि ज्ञानेश कुमार अमेरिका जाकर फोटो आईडी और वोटर आईडी की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि देश के 80 प्रतिशत लोग उन पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने कहा कि इन सवालों पर भी बात होनी चाहिए।
सपा प्रवक्ता ने कहा कि लोकतंत्र में संवाद एकतरफा नहीं होना चाहिए। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोकतंत्र जीवित है और यह दिखाई देता है। उनका कहना था कि अमेरिका में आज भी बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं।
कांग्रेस और सपा नेताओं की इन टिप्पणियों के साथ ट्रंप की भारत की चुनाव प्रणाली पर की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि विदेशी नेता के बयान को भारत में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता के समर्थन के तौर पर पेश किया जा रहा है।