
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में आम बजट 2022-23 पेश किया। यह मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का चौथा बजट है। आम बजट में आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसके साथ ही युवाओं, मध्य वर्ग, गरीबों के लिए सरकार ने कोई ऐलान नहीं किया है। वहीं कांग्रेस ने इस बजट को निराशाजनकर बताया है।
राहुल गांधी ने बजट पर क्या कहा? - कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आम बजट को निराशजनक बताते हुए कहा है कि इस बजट में नौकरीपेशा, मध्य वर्ग, गरीबों, युवाओं, किसानों और एमएसएमई के लिए कुछ भी नहीं है।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या कहा? - मल्लिकार्जुन खड़गे ने बजट को सिर्फ अमीरों का बताया। उन्होंने कहा कि इस बजट में गरीबों के लिए कुछ नहीं है। यह अर्जुन और द्रोणाचार्य का बजट है, एकलव्य का नहीं, (महाभारत से)। उन्होंने क्रिप्टो करेंसी का भी उल्लेख किया, जिसका कोई कानून नहीं है, और न ही इस पर पहले चर्चा की गई है। खड़गे ने कहा कि बजट से उनके दोस्तों को फायदा होता है।
शशि थरूर ने बजट को लेकर क्या कहा? - थरूर ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस बजट में कुछ भी नहीं है। यह निराशाजनक बजट है। जब आप भाषण सुनते हैं, तो इसमें मनरेगा, रक्षा, जनता के सामने आने वाली किसी भी अन्य जरूरी प्राथमिकताओं का कोई उल्लेख नहीं होता है। उन्होंने कहा है कि हम भयानक मुद्रास्फीति का सामना कर रहे हैं और मध्यम वर्ग के लिए कोई कर राहत नहीं है। यह एक ऐसा बजट है जो 'अच्छे दिनों' की मृगतृष्णा को और भी दूर धकेलता दिख रहा है। अब भारत 100 पर है, 'अच्छे दिनों' के आने के लिए हमें 25 साल और इंतजार करना होगा।
शशि थरूर ने आगे कहा कि बहुत स्पष्ट है कि जहां तक डिजिटल मुद्रा का संबंध है, सरकार उस दिशा में आगे बढ़ रही है। मेरी जानकारी के अनुसार, एक उचित प्रस्ताव है, मुझे नहीं लगता कि हम इसकी आलोचना करेंगे। लेकिन हम बजट में आम नागरिकों के लिए सामग्री की कमी के बारे में अधिक चिंतित हैं।
CM ममता बनर्जी ने क्या कहा?- पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा है कि बेरोजगारी और महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों के लिए केंद्रीय बजट में शून्य है। सरकार बड़े शब्दों में खो गई है, जिसका कोई मतलब नहीं है, एक पेगासस स्पिन बजट है।
सुरजेवाला ने बजट को रोज़गार विरोधी बताया - रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 7 साल पहले ‘मेक इन इंडिया’ चलाया, कहा 2 करोड़ रोज़गार हर साल देंगे, यानी 7 साल में 14CR रोज़गार, पर कितने दिए, ये नहीं बताते, हाँ, कोरोना में 12.20CR रोज़गार गए। अब कहते हैं PLI से 60 लाख रोज़गार देंगे, कब तक और कैसे? और पहला वादा? जुमला था?
बजट पर मायावती की प्रतिक्रिया - BSP प्रमुख मायावती ने बजट पर कहा कि संसद में आज पेश केन्द्रीय बजट नए वादों के साथ जनता को लुभाने के लिए लाया गया है, जबकि गत वर्षों के वादों व पुरानी घोषणाओं आदि के अमल को भुला दिया गया है, यह कितना उचित. केन्द्र बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई व किसानों की आत्महत्या जैसी गंभीर चिन्ताओं से मुक्त क्यों?
कांग्रेस सांसद अनंद शर्मा की प्रतिक्रिया- उम्मीद थी कि बजट गरीबों और आम लोगों के लिए राहत लाएगा। इस बजट से छोटे उद्योगों को भी कोई राहत नहीं मिली है।
'मनरेगा के बजट में भी बढ़ोतरी नहीं'- मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आज मंगलवार को आरोप लगाया कि आम बजट में नौकरियों के सृजन एवं शहरी रोजगार गारंटी का उल्लेख नहीं किया गया और मनरेगा के बजट में भी बढ़ोतरी नहीं हुई, जो युवाओं की जीविका पर ‘आपराधिक प्रहार’ है. माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया, ‘‘बजट किसके लिए है? सबसे अमीर 10 प्रतिशत भारतीय देश की कुल संपत्ति के 75 प्रतिशत के स्वामी हैं. नीचे के 60 प्रतिशत लोग सिर्फ पांच प्रतिशत संपत्ति के मालिक हैं. महामारी के दौरान सबसे अधिक मुनाफा कमाने वालों पर अधिक कर क्यों नहीं लगाया गया?
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