
अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक दशहरा मंगलवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान लोग रावण के पुतलों का दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में रामलीला मैदानों में पहुंचे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ द्वारका में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया और रावण का पुतला दहन किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंद्रप्रस्थ रामलीला मैदान में विजयादशमी समारोह में हिस्सा लिया। वहीं, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने लाल किले के पास रामलीला मैदान में आयोजित लव कुश रामलीला समारोह में भाग लिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने रावण के पुतले के दहन से पहले भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता की पारंपरिक आरती की। इसके बाद उन्होंने तीर चलाकर रावण के पुतले को आग लगाई।
राष्ट्रपति ने दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए लोगों से भगवान राम के गुणों को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि भगवान राम की कहानी लोगों को प्रकृति का सम्मान करने, पर्यावरण की रक्षा करने और सभी का ख्याल रखने की प्रेरणा देती है।
पश्चिम बंगाल में कोलकाता की सड़कों पर महा नवमी के अवसर पर श्रद्धालुओं और उत्सव मनाने वालों की भारी भीड़ उमड़ी। दुर्गा पूजा के अंतिम पूर्व दिन शहर में लोगों ने त्योहार का भरपूर आनंद लिया। बड़ी संख्या में लोग प्रसिद्ध सामुदायिक पूजा पंडालों और मंदिरों में पूजा-अर्चना करने पहुंचे।
हालांकि, उत्सव के बीच लोगों में सावधानी भी बढ़ी हुई थी। इसकी वजह 17 अक्टूबर को चोरबागान में हुई भगदड़ थी, जिसमें 19 लोगों की मौत हो गई थी। भीड़ को नियंत्रित करने और पंडालों में ज्यादा भीड़ जमा होने से रोकने के लिए पुलिसकर्मी और पूजा आयोजक लगातार निगरानी कर रहे थे। पंडालों में लोगों के प्रवेश को भी नियंत्रित किया जा रहा था।
विजयादशमी के अवसर पर बिहार के पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 71वां वार्षिक रामलीला उत्सव और रावण वध समारोह मनाया गया। इस दौरान हजारों लोग बुराई पर अच्छाई की प्रतीकात्मक विजय के साक्षी बनने के लिए उमड़ पड़े। दशहरा कमेटी ट्रस्ट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में रावण के 90 फुट ऊंचे पुतले, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को जलाया गया।
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू शहर के ढालपुर मैदान में एक सप्ताह तक चलने वाला अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा बुधवार से शुरू होगा। कुल्लू दशहरा केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि सात दिन तक चलने वाला उत्सव है। इसकी शुरुआत तब होती है, जब देश के बाकी हिस्सों में दशहरा उत्सव समाप्त हो जाता है।
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