विचार

महिला सुरक्षा और आंकड़ों के पीछे की बाजीगरी

महिला सुरक्षा पर बयानबाजी का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं। जैसा कि बलात्कार के आरोपी की जेल से रिहाई पर समर्थकों द्वारा जुलूस निकालने वाले हालिया वीडियो से जाहिर होता है, अपराधी आश्वस्त हैं कि सजा से बच निकलेंगे।

फोटो: Getty Images
फोटो: Getty Images 

ग्रेटर नोएडा में 24 वर्षीय दीपिका नागर की हालिया मौत से वह कड़वी सच्चाई फिर सामने आ गई कि आंकड़े कुछ भी बोलें, महिलाओं के विरुद्ध अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है।दीपिका की मौत 18 मई की सुबह हुई। आरोप है कि दहेज लोभी ससुराल वालों ने उसे छत से नीचे फेंक दिया। दीपिका के माता-पिता का कहना है कि वह 20 लाख का दहेज पहले ही दे चुके थे, लेकिन उसके पति और ससुराल वाले कथित रूप से 50 लाख कैश और एक टोयोटा फॉर्च्यूनर और देने पर अड़े थे।

Published: undefined

बमुश्किल एक हफ्ते पहले ही 12 मई को मॉडल और अभिनेत्री ट्विशा शर्मा भोपाल स्थित अपनी ससुराल में फंदे से लटकी मिलीं। रिटायर्ड प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशंस जज गिरिबाला सिंह उनकी सास हैं। जांचकर्ता पोस्टमॉर्टम के दौरान आत्महत्या में इस्तेमाल बेल्ट प्रस्तुत नहीं कर पाए। सेंटर फॉर सोशल रिसर्च की महिला अधिकार कार्यकर्ता डॉ. रंजना कुमारी का सवाल था: दहेज से जुड़ी मौत जैसी संवेदनशील जांच में ऐसी चूक कैसे संभव है।

Published: undefined

यह कोई अलग-थलग मामले नहीं हैं। एक बड़ी राष्ट्रीय आपात स्थिति का हिस्सा हैं, जो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) का ताजा डेटा आंशिक रूप से दिखाता है। इसके अनुसार, 2024 में 4.41 लाख मामले दर्ज हुए, जो 2023 में दर्ज 4.48 लाख मामलों से कुछ ही कम हैं। अपराध दर भी थोड़ी कम होकर 66.2 से 64.6 प्रति लाख महिलाओं पर आ गई। तो क्या महिलाएं ज्यादा सुरक्षित हैं? चलिए देखते हैं!

भारत में 2024 में दहेज से जुड़ी 5,737 मौतें दर्ज हुईं, यानी औसतन हर दिन लगभग 16 महिलाओं की मौत। त्रासदी यह कि जहां महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, और जिसका श्रेय एनसीआरबी बेहतर रिपोर्टिंग को देता है, लेकिन दोषसिद्धि की दर अब भी शर्मनाक है।

Published: undefined

भारत में हर 18 मिनट में एक बलात्कार रिपोर्ट होता है, लेकिन ऐसे मामलों में राष्ट्रीय दोषसिद्धि दर महज 24.4 प्रतिशत है। व्यावहारिक तौर पर आशय यह कि, रिपोर्ट किए गए हर 100 मामलों में से 25 से भी कम मामलों में सजा हो पाती है। उत्तर प्रदेश-हरियाणा सरीखे गहरी पितृसत्तात्मक जड़ों वाले राज्यों में दोषसिद्धि दर प्रायः 20 प्रतिशत से नीचे रह जाती है; वहीं बिहार और झारखंड जैसे गरीब राज्यों में यह 10 प्रतिशत से भी नीचे रहती है। दहेज हत्या में राष्ट्रीय दोषसिद्धि दर 11 से 17 प्रतिशत के बीच रहती है।

Published: undefined

भारतीय न्याय व्यवस्था में होने वाली कुख्यात लेट-लतीफी हालात और बिगाड़ती है। गवाह डरा-धमका कर चुप करा दिए जाते हैं, और बेहतर रसूख वाले संसाधन संपन्न आरोपी तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित करने को कुख्यात ही हैं।

इस संस्थागत विफलता का दिल्ली जीता-जागता उदाहरण है। देश में बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले (1,058) दर्ज होने के बावजूद, यहां दोषसिद्धि दर 33.5 प्रतिशत पर कायम है, जो तकनीकी रूप से तो राष्ट्रीय औसत से ऊपर है, लेकिन चिंताजनक रूप से नाकाफी। और भी शर्मनाक यह कि पिछले 12 वर्षों से पुलिस के सीधे केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन होने के बावजूद, दिल्ली का महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित का दर्जा कायम है।

Published: undefined

घरेलू हिंसा महिलाओं के विरुद्ध सबसे व्यापक, लेकिन सबसे कम दर्ज होने वाला अपराध है। दिल्ली में दर्ज 13,396 मामलों में से 4,647 मामले पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के थे। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के खिलाफ दर्ज सभी अपराधों में से 42.3 प्रतिशत मामले घरेलू हिंसा के होते हैं। एक्टिविस्ट मानते हैं कि असली आंकड़े कहीं ज्यादा हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़े बताते हैं कि शादीशुदा भारतीय महिलाओं में से लगभग हर तीसरी महिला अपने पति के हाथों शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का शिकार है। ज्यादातर महिलाएं पुलिस के पास कभी जातीं ही नहीं। यहां तक ​​कि दर्ज मामलों में भी, सजा मिलने की दर का औसत महज 11 प्रतिशत है। अपराध के राज्यवार आंकड़े भी कम चिंताजनक नहीं हैं।

Published: undefined

अपराध के राज्यवार आंकड़े भी कम चिंताजनक नहीं

गुजरात, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आंखों का नूर है और ‘गुजरात मॉडल’ के तौर पर मशहूर भी। वहां 2023 के मुकाबले 2024 में हिंसक अपराध 33 प्रतिशत बढ़े (6.15 लाख मामले)। 2025 में यह और बढ़ा। अहमदाबाद में बलात्कार के 62 और सूरत में 84 मामले दर्ज हुए। पूरे देश में आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार के सबसे ज्यादा मामले भी गुजरात में ही दर्ज हुए; एक साल में 384 एफआईआर। नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न के 7,355 और मामले दर्ज हुए, जिनमें से कई में छोटी बच्चियां शिकार बनीं।

महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित माने जाने वाले ओडिशा में भााजपा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के कुर्सी संभालने के बाद स्थिति में गंभीर गिरावट आई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में संज्ञेय अपराधों में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और कुल मामले 14,113 से बढ़कर 2,29,881 पर पहुंच गए। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, और दर्ज मामले 32,000 के पार पहुंच गए। अकेले भुवनेश्वर में ही अपराध लगभग 9 प्रतिशत बढ़े।

Published: undefined

मध्य प्रदेश महिला सुरक्षा को लेकर देश के सबसे खराब राज्यों में है। यहां जून 2025 तक, 23,000 से ज्यादा महिलाओं और लड़कियों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुईं। बलात्कार के आरोप में करीब 1,500 आरोपी फरार हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव को तो शर्म से डूब जाना चाहिए, क्योंकि यह उन्हीं का राज्य है जहां लगातार तीसरे साल गर्भवती महिलाओं से बलात्कार के सबसे ज्यादा केस दर्ज हुए। भोपाल, धार, शिवपुरी और सतना जैसे जिलों से मिली रिपोर्टों में राजनीतिक रसूखदार लोगों द्वारा की गई गंभीर यौन हिंसा की बार-बार होने वाली घटनाओं का विस्तृत ब्योरा है।

Published: undefined

हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में हिंसक अपराध बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, जबकि गृह विभाग उन्हीं के पास है। एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हर दिन पांच यौन अपराध होते हैं। कांग्रेस नेता कुमारी शैलजा ने हाल ही में बताया कि 2024 में हरियाणा में बच्चों के खिलाफ अपराध के 7,547 मामले दर्ज हुए, जो 2023 में दर्ज 6,401 की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत ज्यादा हैं। इनमें यौन शोषण, अपहरण, हिंसा और हत्या जैसे गंभीर अपराध शामिल थे।

Published: undefined

बिहार में दर्ज घटनाएं 2023 में 52,165 से बढ़कर 2024 में 1,07,303 से भी ज्यादा हो गईं, यानी 105 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर। 2026 की शुरुआती रिपोर्ट बताती हैं कि सामूहिक बलात्कार की घटनाएं बार-बार हो रही हैं, और इनमें गांवों, ट्रेनों और ग्रामीण जिलों में नाबालिगों पर हमले शामिल हैं।

महाराष्ट्र में भी 89 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 2023 में यह संख्या 46,249 थी, जो 2024 में बढ़कर 87,791 हो गई। राज्य में बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा (24,171 मामले) रही, और बड़े महानगरों में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले में मुंबई, दिल्ली के बाद दूसरे स्थान पर रहा।

Published: undefined

उत्तराखंड में महिला अपराध 36 प्रतिशत बढ़े और यहां 2022 के बाद सिर्फ बलात्कार के मामले 30 प्रतिशत बढ़े। यहां इन मामलों की जांच-पड़ताल भी सवालों के घेरे में है; पुलिस पर आरोप है कि सत्ताधारी दल से रिश्तों के चलते उसने संदिग्धों को ‘क्लीन चिट’ दे दी।

5 मई 2026 को चंपावत में 16 साल की, 10वीं की छात्रा से कथित गैंगरेप का उदाहरण लीजिए (चंपावत सीएम धामी के चुनाव क्षेत्र में है)। लड़की के पिता ने एक भाजपा पदाधिकारी और उसके साथियों पर रेप का आरोप लगाया। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शनों के सामने बेबस धामी ने वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस को तत्काल कार्रवाई का आदेश दिया। कार्रवाई भी ऐसी त्वरित हुई कि मामला 24 घंटे के अंदर ही ‘सुलझ’ गया। पुलिस ने ऐलान किया कि कोई रेप हुआ ही नहीं था और लड़की के पिता ने शिकायत वापस भी ले ली।

Published: undefined

उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” के दावों के बावजूद, महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामले में सबसे आगे बना हुआ है। रिपोर्ट किए गए मामले 49,385 (2020) से बढ़कर 56,083 (2021) और फिर 65,000 से भी ज्यादा (2022-2024) हो गए। जाहिर है, मार्च 2017 और दिसंबर 2025 के बीच हुए 15,726 ‘एनकाउंटर’ भी सारे “कट्टर अपराधियों” को खत्म नहीं कर पाए हैं।

दक्षिण की ओर चलें तो, तेलंगाना में 2024 में कुल संज्ञेय अपराधों में लगभग 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखी। जहां एक ओर बेंगलुरु 19 महानगरों में हिंसक अपराध के 5,612 मामलों के साथ तीसरे स्थान पर रहा, कर्नाटक में 2024 में अपराध दर में गिरावट दर्ज हुई।

Published: undefined

राष्ट्रीय अपराध दर में मामूली कमी से राहत महसूस करने वालों को भूलना नहीं चाहिए कि महिला सुरक्षा पर होने वाली राजनीतिक बयानबाजी जमीनी हकीकत के सामने खोखली साबित हो रही है। जैसा कि बलात्कार के आरोपी (हिन्दू युवा वाहिनी का पूर्व सदस्य सुशील प्रजापति) की जेल से रिहाई पर समर्थकों द्वारा माला पहनाकर जुलूस निकालने वाले हालिया वीडियो (17 मई) से जाहिर होता है, अपराधी पूरी तरह आश्वस्त हैं कि वे अपने किए की सजा से बच निकलेंगे, और वे वाकई ऐसा करने में सफल हैं।

Published: undefined