विचार

विष्णु नागर का व्यंग्यः योर ऑनर चाहे जितना डांट-फटकार लो, ये ढीठ सरकार है, बेहद ही इनकी हद है!

इसकी भी कोई पक्की गारंटी नहीं कि हमेशा यस माई लार्ड करते ही रहेंगे। कल कह नहीं सकते कि क्या करेंगे। गोदी चैनल को छू लगा दें, भक्तों को इशारा कर दें तो भी आश्चर्य नहीं। ये कुछ भी कर सकते हैं। किसी भी हद तक जा सकते हैं। बेहद ही इनकी हद है।

फोटोः सोशल मीडिया
फोटोः सोशल मीडिया 

जज साहेबान, आप लगभग रोज हमारी चुनी हुई सरकार को डांटते-फटकारते रहते हो, यह अच्छी बात नहीं है। बच्चों को भी रोज डांटो-फटकारो तो वे ढीठ बन जाते हैं। परवाह नहीं करते।हद से हद मारोगे, तो, लो मार लो। जज साहेबान, आप सरकार को डांट सकते हो। हद से हद थोड़ा धमका सकते हो। डांट लो, धमका लो, निंदा कर लो। रोज ऐसा करना चाहो, तो रोज करके देख लो। वे इस सबसे डरते नहीं। दुनिया भर में उनकी रोज निंदा होती रहती है। कभी इसलिए, कभी उस लिए। आप भी करके देख लो। वे ढीठ हैं माननीय। आप हार जाओगे, वे हार नहीं मानेंगे। अगर उन्होंने देश का सत्यानाश करना तय कर लिया है तो किसी की नहीं सुनेंगे, करके रहेंगे। नौकरशाही उन्हें बचने-बचाने के सौ रास्ते, हजार बहाने बनाना सिखा चुकी है!

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इसके अलावा उनके पास गोदी चैनल है। आपके पास है? उनके पास आईटी सेल है। आपके पास है? उनके पास सोशल मीडिया है। आपके पास है? उनके पास अकूत पैसा है। आपके पास है? उनके अपने भक्त हैं। आपका एक भी भक्त है? वे रोज झूठ बोल सकते हैं, आप एक बार भी बोल सकते हो? आप कानून, संविधान और तर्क के सिवाय कोई आदेश दे सकते हो? अब आप ही बताओ, वे क्यों सुनें आपकी बात? बस, यस माई लार्ड, यस माई लार्ड करते रहेंगे। और इसकी भी कोई पक्की गारंटी नहीं कि हमेशा ऐसा करते ही रहेंगे। कल कह नहीं सकते कि क्या करेंगे। गोदी चैनल को छू लगा दें, भक्तों को इशारा कर दें तो भी आश्चर्य नहीं। ये कुछ भी कर सकते हैं। किसी भी हद तक जा सकते हैं। बेहद ही इनकी हद है!

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अब एक दिन सुप्रीम कोर्ट के जज साहेबानों ने मोदी सरकार को डांट दिया और कहा, सुनो और इस बार ठीक से सुनना कि भूख मिटाना सरकार का पहला कर्तव्य है। जाओ और सामुदायिक रसोईघर की ठोस योजना बनाकर तीन हफ्ते में हमारे सामने लाओ। बहानेबाजी बहुत हो चुकी।हो रहा है, कर रहे हैं, जानकारी इकट्ठा की जा रही है, मीटिंग बुलाई जा रही है, यह सब बहुत हो चुका। और यह भी सुन लो, सरकार का अवर सचिव स्तर का कनिष्ठ अधिकारी अब से हमारे सामने शपथपत्र नहीं देगा, सचिव देगा। जाओ। मालूम है न, कल्याणकारी राज्य का पहला काम अपनी जनता को भोजन मुहैया कराना है, चाहे किसी के पास राशन कार्ड हो न हो। भूख राशन कार्ड नहीं देखती। यह कुपोषण का नहीं, भूख का मसला है।

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जज साहेबान आपसे किसने कहा कि भारत अब एक कल्याणकारी राज्य रह गया है? रहा होगा कभी, अब नहीं है। यह शब्द आपने हमारे प्रधानमंत्री के मुंह से एक बार भी सुना? गृहमंत्री, रक्षा मंत्री, कृषि मंत्री, खाद्य मंत्री के मुंह से कभी सुना? सुना हो तो मैं गुनाहगार। इन्होंने संविधान की कसम जरूर खाई है। यह इनकी मजबूरी है। इसका यह मतलब नहीं कि इन्होंने संविधान पढ़ा भी है और पढ़ा है तो उसे मानते भी हैं। पढ़ना और उसकी शपथ लेना दो भिन्न बातें हैं। न ये पढ़ते हैं, न शपथ इन्हें याद रहती है!

हमारे भाजपाई मंत्रियों, विधायकों, सांसदों को यह पता है कि मोदी जी ने क्या कहा है और बिना कहे, क्या-क्या कह दिया है और क्या उनके कान में कहलवाया है। वही इनके लिए संविधान है, कानून है, संसद है, अदालत है। स्वयं मोदी जी और शाह जी ने पूरा संविधान तो छोड़िए, उसकी प्रस्तावना भी पढ़ी होगी क्या? उनका पढ़ने से क्या लेनादेना माई लार्ड? वह तो जन्मजात ज्ञानी हैं।जन्मजात वक्ता हैं। जन्मजात प्रधानमंत्री-गृहमंत्री हैं। जन्मजात वीर हैं!

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पढ़ना-लिखना जज साहेबान या तो आपका काम है या वकीलों का या विद्वानों का। जज साहेबान कुसूर माफ करना मगर आपकी बिरादरी के भी कुछ लोग कितने पढ़े-लिखे होते हैं, इसके उदाहरण भी समय-समय पर मिलते रहते हैं। एक माननीय उच्च न्यायालय के माननीय उच्च न्यायाधीश ने कहा था कि गाय ऑक्सीजन लेती भी है, छोड़ती भी है। और यहां तक कि बहुत से विद्वान भी माननीय इन्हीं नेताओं-मंत्रियों-सेठों की सेवाटहल में रहकर गौरवान्वित महसूस करते हैं। इनके नाज-नखरे उठाते हैं। इनके तर्क को अपने तर्क की तरह पेश करते हैं। तो विद्वता भी अनेक बार मूर्खता, घमंड की चेरी बनी रहती है।

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तो माननीय भूल जाइए कि यह सरकार भूख से लड़ेगी। यह भूख बढ़ाएगी और लोग खुद उससे लड़ते-लड़ते मर जाएंगे। हां माननीय एक अर्थ में भारत कल्याणकारी राज्य अब भी है। देश के उन दस प्रतिशत पैसे वालों के लिए यह कल्याणकारी राज्य है, जिनके पास देश की 74 प्रतिशत संपत्ति है। यह हमारे प्रधानमंत्री जी आदि के लिए कल्याणकारी राज्य है, जो उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति जैसे अत्याधुनिक और बेहद सुरक्षित हवाई जहाज देता है। जो उनके लिए वैसी कार खरीद का प्रबंध करता है, जिसे चंद पूंजीपति, चंद फिल्मी हीरो ही खरीद सकते हैं। और इसी कल्याणकारी राज्य ने महोदय हमें 116 देशों के गरीबी सूचकांक में 101वें स्थान पर ला दिया है। इसी गति से महोदय इसी तरह राज्य कल्याणकारी बनता रहा तो शायद 2024 तक हम भूख सूचकांक में 116वां नहीं तो 115वां स्थान हासिल करके दुनिया को दिखा देंगे और भक्त कहेंगे-हमने चीन और पाकिस्तान को धूल चटा दी है!

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