
झारखंड विधानसभा चुनाव के अब तक आए नतीजों के मुताबिक राज्य की मौजूदा रघुवर दास के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार का जाना तय है और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनती दिख रही है। जेएमएम, कांग्रेस और आरजडी के महागठबंधन के आगे निकलने के बाद माना जा रहा है कि हेमंत सोरेन की अगुवाई में ही झारखंड में नई सरकार बनेगी। इस जीत का पूरा श्रेय हेमंत सोरेन को ही दिया जा रहा है।
निश्चित तौर पर झारखंड के चुनावी परिणाम से जेएमएम और कांग्रेस खेमे में खुशी और जश्न का माहौल है, लेकिन इस समय यह जानना भी जरूरी है कि ये कमाल कर दिखाने वाले हेमंत सोरेन राजनीति में कब आए और उनका राजनीतिक सफर कैसा रहा है। यहां यह जान लेना जरूरी है कि हेमंत सोरेन को राजनीति विरासत में मिली है। हेमंत सोरेन झारखंड के कद्दावर नेता और राज्य में गुरू जी के नाम से लोकप्रिय शिबू सोरेन के बेटे हैं।
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बात राजनीतिक सफर की करें तो ऐसा पहली बार नहीं होगा जब हेमंत सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे। इससे पहले वह साल 2013 के जुलाई में कांग्रेस और आरजेडी के समर्थन से राज्य के पांचवें सीएम बने थे, लेकिन 2014 के चुनाव में हार के बाद सत्ता से बाहर हो गए थे। इसके अलावा वह राज्य की अर्जुन मुंडा सरकार में उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 2009 में की थी, जब 24 जून 2009 को उन्हें राज्यसभा के सदस्य के तौर पर चुना गया था। पिछले चुनाव में हार के बाद हेमंत सोरेन विधानसभा में विपक्ष के नेता बने और पूरी ताकत के साथ इस अहम भूमिका को निभाया भी।
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हेमंत सोरेन राजनीति में सक्रिय तो कई सालों से थे, लेकिन उनकी जिंगदी में निर्णायक बदलाव साल 2009 में उस समय आया, जब उनके बड़े भाई दुर्गा सोरेन की मौत हो गई। दुर्गा सोरेन को ही पिता की राजनीति का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। लेकिन भाई की मौत और पिता शिबू सोरेन के अस्वस्थ्य रहने के चलते जेएमएम का पूरा भार हेमंत सोरेन पर आ गया और उन्होंने उसे बखूबी संभाला भी।
शुरुआती जीवन की बात करें तो 10 अगस्त, 1975 को जन्मे हेमंत सोरेन की स्कूली शिक्षा बिहार की राजधानी पटना से हुई है। इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई बिहार से करने के बाद उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग के लिए रांची के बीआईटी मेसरा में दाखिला लिया था, लेकिन वह अपनी डिग्री पूरी नहीं कर पाए। फिर उसके बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं की उन्हें राजनीति में आना पड़ा और पिता की राजनीतिक विरासत को संभालना पड़ा। बात करें परिवार की तो हेमंत सोरेन की पत्नी का नाम कल्पना सोरेन है और उनके दो बच्चे हैं।
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इस बार राज्य बीजेपी से लेकर केंद्रीय बीजेपी की पूरी ताकत के सामने न सिर्फ हेमंत ने जेएमएम के गढ़ और अपने पिता शिबू सोरेन की विरासत को बचाए रखा, बल्कि बीजेपी को उसके कई पारंपरिक सीटों पर भी झटका दिया है। इसके लिए चुनाव के पहले कांग्रेस से मजबूत गठबंधन से लेकर प्रचार की उनकी सधी रणनीति को श्रेय दिया जा रहा है। बीजेपी ने इस बार सोरेन को उन्हीं के गढ़ में घेरने के लिए सारा दम लगाते हुए दुमका और बरहेट दोनों सीटों पर पीएम नरेंद्र मोदी की जनसभा रखवाई थी। लेकिन इन दोनों ही सीटों पर बीजेपी को पीएम मोदी के चेहरे का भी लाभ नहीं मिला और जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन दोनों सीटों पर आगे चल रहे हैं।
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