राजनीति

बिरला ने उद्धव गुट के 6 सांसदों के शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी दी, TMC के 20 बागी सांसद अलग बैठेंगे

लोकसभा स्पीकर ने तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की लोकसभा में अपनी मूल पार्टी से अलग बैठने की मांग मान ली है। हालांकि, इन बागी सांसदों की एनसीपीआई के सांसदों के रूप में आधिकारिक मान्यता दिए जाने की मांग पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है।

बिरला ने उद्धव गुट के 6 सांसदों के शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी दी, TMC के 20 बागी सांसद अलग बैठेंगे
बिरला ने उद्धव गुट के 6 सांसदों के शिंदे की शिवसेना में विलय को मंजूरी दी, TMC के 20 बागी सांसद अलग बैठेंगे फाइल फोटोः शिवसेना

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दे दी। इसके अलावा बिरला ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 बागी सांसदों की सदन में अलग बैठने की मांग को स्वीकार कर लिया है। हालांकि टीएमसी के इन सांसदों के ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय पर स्पीकर ने अभी फैसला नहीं लिया है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के छह बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में विलय को औपचारिक मंजूरी दे दी है। लोकसभा सचिवालय से सभी छह सांसदों को मंजूरी मिल गई है, मतलब यह है कि उद्धव गुट के सांसदों का शिंदे गुट में विलय मान्य हो गया है। इस तरह से इन छह सांसदों के विलय के बाद शिवसेना शिंदे गुट के लोकसभा में कुल 13 सांसद हो गए हैं।

इसके अलावा अधिकारियों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों की मांग स्पीकर ने मान ली है। इसके बाद आगामी सत्र में ये सांसद लोकसभा में अपनी मूल पार्टी से अलग बैठेंगे। हालांकि, इन बागी सांसदों की एनसीपीआई के सांसदों के रूप में आधिकारिक मान्यता दिए जाने की मांग पर अभी कोई स्पष्टता नहीं है।

एकनाथ शिंदे की शिवसेना में 6 यूबीटी सांसदों के विलय पर शिवसेना यूबीटी के प्रवक्ता आनंद दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी। दुबे ने कहा कि 2022 में जब हमारी पार्टी को तोड़ा जा रहा था, तब से हम लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन, तब से आज तक हमें यह पता नहीं चल पाया कि हमारी गलती क्या है? हमारी पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह चुरा लिया गया है। इसमें तत्कालीन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कितनी बड़ी भूमिका निभाई, वो जगजाहिर है। अब 2026 में एक बार फिर हमारी पार्टी को तोड़ दिया गया। हमारे छह सांसद चुरा लिए गए। इसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बड़ी भूमिका निभाई है।

उन्होंने आगे कहा कि हम कोर्ट जाते हैं तो समय लगता है, तारीख पर तारीख मिलती है। इस बार हमारे जो सांसद चुराए गए, उन्हें एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना का सांसद बताया जा रहा है, जबकि वो हमारे नाम और हमारे चुनाव चिन्ह पर चुनकर आए। ऐसे में लोकसभा स्पीकर ने दोनों पक्षों को सुने बिना अपना फैसला दे दिया। यह दिखाता है कि लोकतंत्र कमजोर होता जा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले महीने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 'ऑपरेशन टाइगर' को अंजाम दिया, जिसके तहत उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में फूट पड़ गई। यूबीटी गुट के छह लोकसभा सांसद औपचारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल हो गए। छह बागी सांसदों में ओमप्रकाश भूपालसिंह उर्फ ओमराजे निंबालकर (धाराशिव/उस्मानाबाद), नागेश बापुराव पाटिल आष्टीकर (हिंगोली), संजय हरिभाऊ जाधव (परभणी), संजय उत्तमराव देशमुख (यवतमाल-वाशिम), भाऊसाहेब राजाराम वाकचौरे (शिरडी) और संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर पूर्व) शामिल हैं।

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इस राजनीतिक उथल-पुथल के बाद लोकसभा में शिवसेना यूबीटी की संख्या 9 से घटकर 3 हो गई है, जबकि शिंदे गुट की संख्या 7 से बढ़कर 13 हो गई है। उद्धव ठाकरे के खेमे में अरविंद सावंत (मुंबई दक्षिण), अनिल देसाई (मुंबई दक्षिण मध्य) और राजभाऊ वाजे (नासिक) बचे हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इस बार का मानसून सत्र बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच शुरू हो रहा है। एनडीए की कोशिश है कि संसद में अपनी ताकत बढ़ाकर कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराया जाए। सरकार की प्राथमिकता महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की है। इस बिल के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। वहीं, विपक्ष सरकार को नीट पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद, महंगाई और अन्य मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है।

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