
व्हिसल ब्लोअर का आरोप है कि पीएम ने मार्च, 2016 में लिखे उनके उस पत्र को नजरअंदाज कर दिया था, जिसमें उन्होंने आईसीआईसीआई बैंक द्वारा वीडियोकॉन को दिए गए लोन में हितों के टकराव की बात कही थी। वीडियोकॉन के वेणुगोपाल धूत ने उस कंपनी को लोन दिया था जिसके वे और आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर के पति साझीदार थे। अरविंद गुप्ता ने यह दावा किया कि वे आईसीआईसीआई और वीडियोकॉन दोनों के शेयरधारक हैं।
इंडियन एक्सप्रेस ने गुरूवार को वेणुगोपाल धूत की कंपनियों और चंदा कोचर के पति के बीच हुए लेन-देन और कई डील पर सवाल उठाया था।
आईसीआईसीआई ने गुरूवार को फिर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह कई बैंकों के साथ वीडियोकॉन की हुई डील का हिस्सा था जो वीडियोकॉन को 40 हजार करोड़ रुपए का लोन देने के लिए तैयार हुए थे। आईसीआईसीआई को इसमें 10 फीसदी से भी कम लोन देना था।
बैंक ने यह भी बताया कि इस पूरे मामले में हितों का कोई टकराव नहीं था और बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर ने नियामकों को सारी जरूरी जानकारी दे दी थी।
व्हिसल ब्लोअर ने नेशनल हेरल्ड को बताया कि उसने अपना पत्र पीएमओ को डाक और ई मेल के द्वारा भी भेजा था। अपने पत्र में उन्होंने पीएमओ का इस ओर ध्यान खींचा था कि एक प्रतिष्ठित आर्थिक रिसर्च फर्म ने वीडियोकॉन को उन चार भारतीय कंपनियों में शामिल किया था जो कर्ज से दबी हुई हैं।
व्हिसल ब्वोअर ने अपनी चिट्ठी में ये भी इशारा किया कि 2014 में 40 हजार करोड़ से भी ज्यादा के कर्ज से दबे होने के बावजूद वीडियोकॉन ने बीजेपी को 10 करोड़ रुपए का चंदा दिया, जबकि 2013 में इसने बीजेपी को सिर्फ 5 लाख रुपये चंदा दिया था।
गुप्ता ने नेशनल हेरल्ड को यह भी बताया कि उन्होंने 18 फरवरी, 2017 को फिर से एक पत्र लिखा (उस पत्र को यहां प्रस्तुत किया जा रहा है)।
Published: 29 Mar 2018, 10:57 PM IST
वेणुगोपाल धूत के भाई राजकुमार धूत एनडीए के सहयोगी शिव सेना के राज्यसभा सांसद हैं।
गुरुवार को आईसीआईसीआई बैंक के चेयरमैन एमके शर्मा ने कहा कि एमडी और सीईओ चंदा कोचर द्वारा अपने पति को फायदा पहुंचाने के आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है और ये सिर्फ बदनाम करने के लिए लगाए गए आरोप हैं। शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि कोई व्यक्ति बैंक द्वारा किसी को दिए जाने वाले कर्ज को प्रभावित नहीं कर सकता है। उन्होंने लोन को हरी झंडी देने वाली समिति से एमडी के अलग नहीं होने के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि चंदा कोचर ने बैठक की ‘अध्यक्षता’ नहीं की थी।
नेशनल हेरल्ड ने पीएमओ को कुछ सवाल भेजे हैं और यह पूछा है कि मार्च 2016 के अरविंद गुप्ता के पत्र पर कोई कार्रवाई हुई, अगर हुई तो क्या और अगर इस पत्र का कोई जवाब दिया गया तो वह क्या था। इस खबर के छपने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। जैसे ही जो भी प्रतिक्रिया मिलेगी, उसे इस रिपोर्ट में जोड़ दिया जाएगा।
Published: 29 Mar 2018, 10:57 PM IST
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Published: 29 Mar 2018, 10:57 PM IST