
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपस्टीन फाइलों का इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धमकाने के लिए किया ताकि वह एक ऐसे व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करें, जिससे भारतीय किसानों की ‘बलि’ दी जा सके।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कन्नूर जिले के पेरावूर में एक किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार इस आम सी बात को नहीं समझती कि किसान भारत की नींव हैं।
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राहुल ने कहा कि आईटी और अन्य क्षेत्रों के बारे में लंबे-लंबे भाषण दिए जाते हैं लेकिन नींव को मजबूत किए बिना कुछ भी नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने कहा, “अगर नींव का सम्मान नहीं किया जाता, तो कुछ भी नहीं बन सकता। नींव बनाने वाले को न तो सम्मान मिलता है और न ही संरक्षण। हम प्रतिदिन भोजन करते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि उसे हमारे खाने की मेज पर कौन रखता है।”
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राहुल ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ जो समझौता किया है, वह “नींव खोदने जैसा” है।
उन्होंने कहा, “भारतीय किसान छोटे किसान हैं और उनमें मशीनों को लेकर समझ कम है। अमेरिकी किसानों के पास विशाल खेत हैं और उन्हें मशीनों की जानकारी ज्यादा है। अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजारों में प्रवेश देना एक आपराधिक कृत्य है।”
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि किसी भी पूर्व प्रधानमंत्री ने अमेरिकी किसानों को भारत में सोयाबीन, सब्जियां और फल जैसे उत्पाद बेचने की अनुमति नहीं दी होगी।
उन्होंने कहा, “इससे भारतीय कृषि की नींव हिल जाएगी। हरित क्रांति और श्वेत क्रांति किसानों के लिए हुई थी।”
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राहुल के अनुसार, कृषि संबंधी मतभेदों के कारण भारत-अमेरिका समझौता चार महीने से रुका हुआ था।
उन्होंने आरोप लगाया, “भारतीय सरकार अमेरिकी कंपनियों के लिए कृषि क्षेत्र खोलना नहीं चाहती थी। कोई प्रगति नहीं हो रही थी और अमेरिकी राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को धमका रहे थे।”
राहुल ने दावा किया कि राष्ट्रपति के भाषण के बाद उन्हें संसद में बोलने नहीं दिया गया क्योंकि वे दो मुद्दे उठाना चाहते थे।
उन्होंने कहा, “एक मुद्दा एपस्टीन की उन 35 लाख फाइलों से जुड़ा है जो अब तक सामने नहीं आई हैं। ये फाइलें अमेरिकी सरकार द्वारा गुप्त रखी गई हैं और कथित तौर पर इनमें भारत के प्रधानमंत्री से संबंधित जानकारियां हैं। दूसरा मुद्दा अमेरिका में अडानी मामला है।”
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राहुल ने आरोप लगाया कि अमेरिका में अडानी समूह के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है और इसका संबंध प्रधानमंत्री से है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया, “इन्हीं कारणों से प्रधानमंत्री भारत की नींव को नष्ट करने को तैयार हैं। भारतीय किसानों की बलि दी जा रही है ताकि प्रधानमंत्री अपनी और बीजेपी की वित्तीय संरचना की रक्षा कर सकें।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारत और केरल के किसानों को बलि का बकरा नहीं बनाने देगी।
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राहुल ने केरल का जिक्र करते हुए कहा कि एक घोषणापत्र तैयार किया जा रहा है, जिसमें जनहित के मुद्दों को शामिल किया जाएगा और किसी भी भावी संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार को यह याद रखना होगा कि उसकी नींव किसानों और मजदूरों पर टिकी है।
उन्होंने कहा, “सरकार को किसानों के लिए सेवा प्रदाता के रूप में काम करना चाहिए। किसानों को समर्थन मूल्य, कोल्ड चेन और भंडारण सुविधाओं की जरूरत है। मुश्किल समय में उन्हें सुरक्षा चाहिए।”
वायनाड के पूर्व सांसद राहुल ने कहा कि उन्होंने इस क्षेत्र में मानव-पशु संघर्ष की घटनाएं देखी हैं।
उन्होंने इसे एक “जटिल मुद्दा” बताया।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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