
युद्धविराम पर सहमति बनने के कुछ ही समय बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने शनिवार को 24 घंटे के भीतर दूसरी बार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरानी सैन्य ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई, जिसमें ईरान के सैन्य निगरानी ढांचे, संचार नेटवर्क, एयर डिफेंस साइट्स, ड्रोन भंडारण केंद्रों और समुद्री बारूदी सुरंग (माइन) बिछाने की क्षमताओं को निशाना बनाया गया।
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ईरान के सरकारी मीडिया IRIB ने सैन्य सूत्रों के हवाले से बताया कि दक्षिणी शहर सिरिक के पास कई विस्फोटों की आवाज सुनी गई। रिपोर्ट के अनुसार, कई प्रोजेक्टाइल एक दूरसंचार टावर से टकराए, हालांकि इस घटना में हुए नुकसान या अन्य विवरण तत्काल साझा नहीं किए गए। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को भी अमेरिका ने ईरान के भीतर मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ रडार ठिकानों पर बड़े हमले किए थे।
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अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने शनिवार तड़के वन-वे अटैक ड्रोन के जरिए पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर हमला कर युद्धविराम का उल्लंघन किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह टैंकर 20 लाख से अधिक बैरल कच्चा तेल लेकर होर्मुज के पास से गुजर रहा था, तभी उसे निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना का कहना है कि शुक्रवार की कार्रवाई के बाद ईरान को युद्धविराम का पालन करने का अवसर दिया गया था, लेकिन उसने तनाव कम करने के बजाय ताजा हमला कर हालात को और गंभीर बना दिया।
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अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और अमेरिकी सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क और तैयार है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि शुक्रवार की एयर स्ट्राइक 25 जून को सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज M/V Ever Lovely पर कथित ईरानी ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी। बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका ने उसका पालन किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यदि समझौते को लेकर कोई मतभेद है तो उसे बातचीत से सुलझाया जा सकता है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा।
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