
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में चीन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि चीन ने करीब 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का संवेदनशील डेटा चुरा लिया है। ट्रंप ने इस दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और चुनावी व्यवस्था समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखी।
ट्रंप ने कहा कि चोरी किए गए डेटा में मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दलों से जुड़ी प्राथमिकताएं और अन्य संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की जानकारी का इस्तेमाल चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि कुछ सरकारी अधिकारियों और तथाकथित "डीप स्टेट" से जुड़े लोगों ने इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश की। उनका कहना था कि मौजूदा चुनावी प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष नहीं है तथा इसमें सुधार की जरूरत है।
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने न्याय विभाग (DoJ), एफबीआई और सीआईए को निर्देश दिए हैं कि इस मामले से जुड़ी जानकारी छिपाने के आरोपों की जांच की जाए और यदि आवश्यक हो तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।
ट्रंप ने दावा किया कि चीनी सरकार ने अमेरिकी पत्रकारों की पहचान करने का प्रयास किया, जिन्होंने राष्ट्रपति के खिलाफ नकारात्मक खबरें प्रकाशित की थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे पत्रकारों को और अधिक नकारात्मक रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए आर्थिक मदद देने की कोशिश भी की गई।
राष्ट्रपति ने कहा कि चीन की मंशा थी कि वह अगला अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हार जाएं। उन्होंने यह भी दावा किया कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और कुछ गैर-राज्य समूह अमेरिकी चुनावी ढांचे को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।
अपने संबोधन के अंत में ट्रंप ने अमेरिकी नागरिकों से अपील की कि वे अपने सांसदों और सीनेटरों से संपर्क कर 'सेव अमेरिका एक्ट' को जल्द से जल्द पारित कराने की मांग करें। उनका कहना था कि कई राज्यों में मतदान व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और इसे सुधारना बेहद जरूरी है।
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