
अमेरिका के कुख्यात अपराधी जेफरी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज जैसे-जैसे सार्वजनिक हो रहे हैं, वैसे-वैसे इसका असर सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं रह गया है। ईमेल संपर्क, निजी मुलाकातें, सोशल नेटवर्क और कथित लेन-देन से जुड़ी जानकारियों ने कई देशों की राजनीति और प्रशासन में हलचल मचा दी है।
इन खुलासों का नतीजा यह हुआ कि यूरोप और अमेरिका में कई प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों को सार्वजनिक दबाव के चलते इस्तीफा देना पड़ा। हालांकि, इन मामलों में यह भी साफ है कि हर इस्तीफा अपराध सिद्ध होने के कारण नहीं हुआ, बल्कि संस्थागत साख और नैतिक जिम्मेदारी को लेकर लिया गया फैसला था।
Published: undefined
ब्रिटेन में एपस्टीन फाइल्स का असर सबसे पहले प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की टीम तक पहुंचा। प्रधानमंत्री के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।
दरअसल, मैकस्वीनी पर दबाव इसलिए बढ़ा क्योंकि उन्होंने पीटर मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त करने की सिफारिश की थी। बाद में सामने आया कि यह फैसला विवादों से जुड़ गया।
मैकस्वीनी ने खुद स्वीकार किया कि यह सलाह गलत थी और इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने का फैसला किया।
Published: undefined
नॉर्वे में भी एपस्टीन से जुड़े मामलों ने बड़ा असर डाला। विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि वरिष्ठ राजनयिक मोना जूल अपने पद से हटेंगी।
66 वर्षीय मोना जूल पहले मंत्री रह चुकी हैं और इजरायल, ब्रिटेन तथा संयुक्त राष्ट्र में नॉर्वे की राजदूत के रूप में भी काम कर चुकी हैं।
सरकारी बयान में कहा गया कि एपस्टीन से जुड़े संबंधों के मामले में उनसे “फैसले में गंभीर गलती” हुई, जिसके बाद यह कदम उठाया गया।
इस इस्तीफे को यूरोप में फैलते बड़े विवाद की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
Published: undefined
एपस्टीन फाइल्स का असर अमेरिका में भी साफ दिखाई दिया। फरवरी 2026 में मशहूर वकील ब्रैड कार्प ने एक बड़ी लॉ फर्म के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया। उनके एपस्टीन से जुड़े ईमेल संपर्क सामने आए थे, जिसके बाद दबाव बढ़ता गया।
इससे पहले नवंबर 2025 में लैरी समर्स ने भी एक महत्वपूर्ण बोर्ड पद छोड़ा। उन्होंने सार्वजनिक रूप से माना कि एपस्टीन से संपर्क रखना उनकी गलती थी।
Published: undefined
दिसंबर 2025 में विवाद ने अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी तक दस्तक दी। एफबीआई के डिप्टी डायरेक्टर डैन बोंजिनो ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
हालांकि उनके मामले में एपस्टीन से सीधा रिश्ता सामने नहीं आया, लेकिन फाइल्स से जुड़े विवाद और बढ़ते राजनीतिक दबाव ने हालात ऐसे बना दिए कि पद छोड़ना पड़ा।
Published: undefined
एपस्टीन फाइल्स का असर सिर्फ ब्रिटेन और नॉर्वे तक सीमित नहीं रहा।
फ्रांस में पूर्व मंत्री जैक लैंग ने एक सांस्कृतिक संस्थान के प्रमुख पद से इस्तीफा दिया।
स्लोवाकिया में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मिरोस्लाव लाजचाक को ईमेल विवाद के बाद पद छोड़ना पड़ा।
स्वीडन में भी एक अधिकारी ने इस्तीफा दे दिया, जब उनके एपस्टीन के निजी द्वीप से जुड़े आरोप सामने आए।
Published: undefined
एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम जुड़ चुका है। एपस्टीन के एक ईमेल में पीएम मोदी के इजरायल दौरे का जिक्र है। जैसे ही एपस्टीन फाइल्स में पीएम मोदी का जिक्र आया भारत सरकार ने सफाई दी।
31 जनवरी 2026 को विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हमने एपस्टीन फाइल्स से जुड़े एक ई-मेल को लेकर आई खबरें देखीं, जिनमें प्रधानमंत्री के इजरायल दौरे का जिक्र है> जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री का इजरायल जाना आधिकारिक और सच बात है। ई-मेल में इसके अलावा कही गईं अन्य बातें एक दोषी की बकवास और निराधार कल्पनाएं हैं, जिन्हें पूरी तरह तिरस्कार के साथ खारिज किया जाना चाहिए।”
कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने 'X' पर एक पोस्ट में लिखा था, “यह पूरे राष्ट्र के लिए शर्म की बात है कि जेफरी एप्स्टीन- अमेरिका का एक सजायाफ्ता मानव तस्कर, बाल यौन अपराधी और सीरियल बलात्कारी- ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसकी सलाह ली और इजरायल में अमेरिकी राष्ट्रपति के लाभ के लिए नाचे-गाए। वे कुछ हफ्ते पहले मिले थे, जो काम कर गया। भारत के प्रधानमंत्री की इस बदनाम व्यक्ति से इतनी निकटता और उनके निर्णय लेने की क्षमता, पारदर्शिता और राजनयिक शिष्टाचार पर इससे गंभीर सवाल खड़े होते हैं।”
Published: undefined
दुनियाभर में जहां-जहां जिनके-जिनके नाम एपस्टीन फाइल्स में सामने आए और इस्तीफे हुए, उनमें एक बात खास तौर पर सामने आई है कि हर इस्तीफा अपराध सिद्ध होने के कारण नहीं हुआ। कई जगहों पर सिर्फ संपर्क, ईमेल या नाम जुड़ने भर से विवाद खड़ा हो गया।
सार्वजनिक दबाव और संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए संबंधित लोगों ने पद छोड़ना बेहतर समझा। लेकिन क्या भारत में ऐसा होना मुमकिन है?
Published: undefined
Google न्यूज़, नवजीवन फेसबुक पेज और नवजीवन ट्विटर हैंडल पर जुड़ें
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए, यहां क्लिक करें @navjivanindia
Published: undefined