निर्माता इसे भविष्य की बैलिस्टिक मिसाइल के रूप में पेश कर रहे हैं, जो घातक, लंबी दूरी तक मार करने वाली और बेहद सटीक है। लॉकहीड मार्टिन की इस ‘सटीक मारक क्षमता वाली मिसाइल’ (पीएसएम) के लिए अमेरिकी सेना अपने हथियार भंडार को आधुनिक बनाने पर अरबों डॉलर का निवेश कर रही है।
ईरान युद्ध के पहले दिन युद्ध में इसके कथित तौर पर पहली बार इस्तेमाल की बारीकी से की गई समीक्षा से इस हथियार को आबादी वाले इलाकों के पास तैनात करने के संभावित खतरे सामने आए हैं। संघर्ष निगरानी संस्था ‘एयरवॉर्स’ की समीक्षा और हथियार विशेषज्ञों तथा पूर्व रक्षा अधिकारियों के साक्षात्कार के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि इस मिसाइल के छर्रे बड़े क्षेत्र में फैलते हैं।
एयरवार्स की जांच में पता चला है कि 28 फरवरी को दक्षिणी शहर लामर्ड पर गिरी तीन मिसाइलों ने धमाके की जगह से 50 मीटर (164 फुट) दूर तक मौजूद आम नागरिकों की जान ले ली और उससे तीन गुना ज्यादा दूरी तक नुकसान पहुंचाया।
एयरवार्स के मुताबिक, मिसाइल एक खेल परिसर और रिहायशी इलाकों के ऊपर फटीं। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इन धमाकों में कम से कम 21 आम नागरिकों की मौत हुई, जिनमें सात बच्चे भी शामिल थे।
पीएसएम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह हवा में ही फट जाए और भारी धातु के हजारों छर्रों को तेजी से हर दिशा में फैला दे। ‘एयरवार्स’ के विश्लेषण और ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ की पुष्टि के बाद सामने आई लामर्ड हमलों के बाद की तस्वीरों, वीडियो और उपग्रह तस्वीरों से पता चलता है कि इमारतों, सड़कों और गाड़ियों पर धमाके के निशान बने थे; विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैटर्न पीएसएम की क्षमताओं के अनुरूप है।
अमेरिकी सेना ने ईरान पर पीएसएम दागने की पुष्टि की है, लेकिन लामर्ड पर हमले से इनकार किया है।
यह साफ नहीं है कि लामर्ड में किसे या किस चीज को निशाना बनाया गया था। पास ही इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर का एक परिसर है, लेकिन उपग्रह की तस्वीरों में वहां कोई नुकसान नहीं दिखा।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या और शव मिलने के बाद सोमवार को बढ़कर 939 हो गई जबकि 4,000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं।
आपदा के छठे दिन बचावकर्मी लापता लोगों की तलाश और फंसे हुए लोगों को बचाने के लिए तेजी से काम कर रहे हैं। प्रभावित आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं।
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने के बाद 26 अगस्त को देश में अचानक बाढ़ आ गई थी, जिसने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों व गांवों को तबाह कर दिया, जरूरी बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया और जलविद्युत केंद्रों को भी बहा दिया।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने सोमवार को बताया कि मरने वालों की संख्या बढ़कर 939 हो गई है। एनडीआरआरएमए के अनुसार, चितवन जिले में 279 शव, नवलपरासी ईस्ट में 216, नवलपरा
रूस ने सोमवार को लगातार पांचवें दिन यूक्रेन की राजधानी कीव और उसके आस-पास के शहरों को निशाना बनाया। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख तिमुर तकाचेंको ने बताया कि कीव इलाके के शहरों ब्रोवरी और बोरिस्पिल में रूस के हवाई हमलों से कई गोदामों को नुकसान पहुंचा और चार लोग घायल हुए हैं।
रूस इन हमलों को अंजाम देने के लिए जेट इंजन से लैस ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है जिनका मुकाबला करने में यूक्रेन को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर स्वीकार किया कि उनका देश रूस द्वारा तेज़ी से उड़ने में सक्षम और जेट इंजन संचालित ड्रोन का मुकाबला करने में संघर्ष कर रहा है।
जेलेंस्की ने कहा कि बृहस्पतिवार से रविवार के बीच रूस ने यूक्रेन पर लगभग 1,500 ड्रोन हमले किये जिनमें से करीब 800 ड्रोन जेट इंजन से लैस थे।
उन्होंने बताया कि यूक्रेन की सेना मौजूदा समय में लड़ाकू विमानों की मदद से इन ड्रोन को नाकाम करने की कोशिश कर रही है और इनका मुकाबला करने के लिए प्रभावी तकनीक विकसित करने की कोशिश भी जा रही है।
जेलेंस्की ने कहा, ‘‘चार कंपनियों ने संबंधित ‘इंटरसेप्टर ड्रोन’ विकसित किए हैं, और एक कंपनी के पास सबसे सफल प्रौद्योगिकी है।’’ हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
यूक्रेन ने सोमवार को दावा किया कि रूस लगातार रसद वितरण केंद्रों और खुद्रा बिक्री केंद्रों को निशाना बना रहा है जिससे आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। उसने बताया कि कुछ सुपरमार्केट में सामान खत्म हो गया है और लोगों में आवश्यक वस्तुओं की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है।
इस बीच, रूस के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि वह यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ‘बड़े हमले’ की तैयारी कर रहा है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि यूक्रेन की ओर से रविवार रात को क्रीमिया और काला सागर सहित उसके नियंत्रण वाले 14 इलाकों पर ड्रोन हमले किये गए जिनमें से 239 हमलों को नाकाम कर दिया गया।
कार्यवाहक क्षेत्रीय गवर्नर अलेक्जेंडर शुवायेव ने बताया कि रविवार शाम रूस के सीमावर्ती शहर बे
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर 2 से 4 सितंबर तक भारत के आधिकारिक दौरे पर आएंगे। इस दौरान वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि 3 सितंबर को होने वाली बैठक में बार्ट डी वेवर और पीएम मोदी द्विपक्षीय संबंधों के पूरे आयाम के साथ-साथ आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बार्ट डी वेवर भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के संदर्भ में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक बिजनेस कार्यक्रम में मुख्य भाषण भी देंगे।
पिछले साल फरवरी में पदभार ग्रहण करने के बाद यह बार्ट डी वेवर की पहली भारत यात्रा होगी। बेल्जियम के रक्षा मंत्री थियो फ्रैंकेन भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होंगे।
नई दिल्ली में अपने कार्यक्रम समाप्त करने के बाद बार्ट डी वेवर मुंबई जाएंगे, जहां वह हीरा, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों सहित विभिन्न हितधारकों के साथ बातचीत करेंगे।
विदेश मंत्रालय ने बताया, "यह यात्रा भारत-बेल्जियम साझेदारी को और मजबूत करने और व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंधों सहित आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत-यूरोपीय संघ और भारत-यूरोप संबंधों को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगी।"
पिछले महीने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके बेल्जियम समकक्ष मैक्सिम प्रीवोट ने ब्रसेल्स में मुलाकात की थी और राजनीतिक, आर्थिक, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, मोबिलिटी और फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों सहित द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की थी।
दोनों मंत्रियों ने पश्चिम एशिया सहित वैश्विक घटनाक्रमों पर भी चर्चा की। यह चर्चा 15 जुलाई को ब्रसेल्स में उद्घाटन भारत-बेल्जियम रणनीतिक वार्ता के दौरान हुई थी।
भारत ने एक बार फिर आईडब्ल्यूटी यानी सिंधु जल संधि को लेकर तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (सीओए) के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने स्पष्ट कहा कि वो इस निकाय की वैधता को नहीं मानता है, इसलिए फैसले को स्वीकार नहीं करता है।
सोमवार को एमईए ने इस मुद्दे पर बयान जारी किया। साफ शब्दों में कहा गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई तथाकथित 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' ने 'सिंधु जल संधि' के तहत अंतरिम उपायों और संधि की स्थिति के बारे में अपना फैसला (जिसे उसने 'अवार्ड' कहा है) सुनाया है।
यह तथाकथित कोर्ट विश्व बैंक के संधि की शर्तों का साफ तौर पर उल्लंघन करते हुए बनाया गया था। भारत इसके तथाकथित फैसले को पूरी तरह से खारिज करता है, ठीक वैसे ही जैसे उसने इस गैर-कानूनी संस्था के पहले के सभी फैसलों को सख्ती से खारिज किया है।
आगे लिखा है कि भारत ने कभी भी गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई इस तथाकथित 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' के कानूनी अस्तित्व को मान्यता नहीं दी है। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि इस तथाकथित आर्बिट्रल संस्था का गठन ही 'सिंधु जल संधि' का गंभीर उल्लंघन है। इसलिए, भारत कभी भी इस संस्था के सामने पेश नहीं हुआ और न ही उसने इसके पहले के फैसलों को तवज्जो दी।
भारत का मत है कि इस तथाकथित 'कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन' को देश के संप्रभु फैसलों पर कोई भी निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। इसके फैसलों का, चाहे अभी हों या भविष्य में, भारत द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं से जुड़े भारत के कामों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। साथ ही 'सिंधु जल संधि' को स्थगित रखने का भारत का निर्णय लागू रहेगा।
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए