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बंगाल: विरोधियों पर बरसीं ममता बनर्जी, 'TMC को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत कर रहे हैं हमारे दुश्मन'

ममता बनर्जी ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को अराजक बताते हुए कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि उनका वर्णन करने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों और सांसदों को डराकर, धमकाकर या प्रलोभन देकर टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

फोटोः PTI
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर विपक्ष और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोगों के पार्टी छोड़ने से टीएमसी कमजोर नहीं होगी, बल्कि और अधिक मजबूत होकर उभरेगी।

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ममता बनर्जी ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को अराजक बताते हुए कहा कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि उनका वर्णन करने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ विधायकों और सांसदों को डराकर, धमकाकर या प्रलोभन देकर टीएमसी को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन इससे पार्टी की ताकत और बढ़ रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह प्रचार किया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ा नहीं है, जबकि यह पूरी तरह भ्रामक और गलत जानकारी है।

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उन्होंने सांसद पर हुए कथित हमले की आलोचना करते हुए कहा कि घायल सांसद के इलाज के लिए डॉक्टरों को बुलाया गया था, लेकिन अस्पतालों को उपचार न करने के निर्देश दिए गए हैं। ममता ने इसे तानाशाही मानसिकता का उदाहरण बताया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने छात्रों से भी सवाल किया कि वे विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे पहले भी अन्याय के खिलाफ लगातार आंदोलन करती थीं आगे भी करती रहेंगी। उन्होंने नीट में कथित अनियमितताओं का भी उल्लेख किया और कहा कि छात्रों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए।

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आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले और नंदीग्राम की घटनाओं का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने हमेशा लोगों की मांगों और सुझावों को महत्व दिया है। उन पर भी कई बार हमले हुए, गोलियां चलाई गईं और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया, लेकिन उन्होंने लोकतांत्रिक मर्यादा और संयम बनाए रखा।

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टीएमसी प्रमुख ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग लंबे समय तक सत्ता का लाभ उठाते रहे, लेकिन चुनावी हार के बाद उन्होंने दूसरी राजनीतिक पार्टियों से नजदीकियां बढ़ा लीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि टीएमसी किसी एक नेता की नहीं, बल्कि अपने कार्यकर्ताओं की पार्टी है। जिन लोगों को कुछ व्यक्तियों पर अत्यधिक भरोसा था, उनके जाने से पार्टी को नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने भरोसा जताया कि कार्यकर्ताओं के सहयोग से टीएमसी को नए सिरे से और अधिक मजबूती के साथ खड़ा किया जाएगा।

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