
बिलकिस बानो केस में दोषियों की रिहाइ पर राहुल गांधी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “5 महीने की गर्भवती महिला से बलात्कार और उनकी 3 साल की बच्ची की हत्या करने वालों को 'आज़ादी के अमृत महोत्सव' के दौरान रिहा किया गया। नारी शक्ति की झूठी बातें करने वाले देश की महिलाओं को क्या संदेश दे रहे हैं? प्रधानमंत्री जी, पूरा देश आपकी कथनी और करनी में अंतर देख रहा है।”
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इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने गुजरात में बिलकिस बानो के दोषियों का 'स्वागत' किए जाने वाले एक वीडियो पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोगों से महिलाओं का सम्मान करने का आह्वान 'मात्र शब्द' है, जबकि गुजरात सरकार का फैसला 'कार्रवाई' है, सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को शेष सजा में छूट देती है। उन्होंने कहा कि लोग 'शब्द' को 'कार्रवाई' से मिलाएंगे।
चिदंबरम ने कहा था, "प्रधानमंत्री के लोगों से महिलाओं का सम्मान करने के आह्वान के कुछ घंटे बाद उनकी चुनी हुई गुजरात सरकार सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को शेष सजा में छूट देती है।"
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मंगलवार को कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि आजादी के अमृत महोत्सव के दिन गुजरात सरकार ने बिलकिस बानो केस के 11 अभियुक्तों को, आरोपी नहीं, अभियुक्तों को जेल से बाहर कर दिया, रिहा कर दिया। ये केस और ये निर्णय, इसको हम आइसोलेशन में न देंखें, तो एक पैटर्न दिखाई देता है, बीजेपी की मानसिकता दिखाई देती है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा था कि कठुआ, उन्नाव, ये दो मील का पत्थर होंगे, इस देश के इतिहास में और शर्मिंदा करते रहेंगे हम सबको, जो राजनीति में हैं। ये मैं कह रहा हूं, जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं और किसी कारण से कह रहा हूं।
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पवन खेड़ा ने कहा था कुछ लोग अभी भी प्रधानमंत्री के मुंह से निकली हुई बातों को गंभीरता से लेते हैं। कल प्रधानमंत्री जी ने लाल किले की प्राचीर से बड़ी-बड़ी बातें की- नारी सुरक्षा, नारी सम्मान, नारी शक्ति, अच्छे-अच्छे शब्द इस्तेमाल किए। कुछ घंटों के बाद गुजरात सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया, जो अप्रत्याशित था, जो कभी नहीं हुआ। बलात्कार के अभियुक्तों को रिहा कर दिया गया। फिर आज हमने ये भी देखा कि जो रिहा हुए हैं, उनकी आरती उतारी जा रही है, उनका तिलक किया जा रहा है, कांग्रेस ने पूछा था- क्या ये है अमृत महोत्सव! ये प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में अंतर! या तो प्रधानमंत्री की सुननी लोगों ने बंद कर दी है, उनके अपने लोगों ने, उनकी अपनी सरकारों ने या फिर प्रधानमंत्री जी देश को कुछ और कहते हैं और फोन उठाकर अपनी राज्य सरकारों को कुछ और कहते हैं।
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बता दें कि बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के सभी 11 दोषियों को गुजरात सरकार की छूट नीति के तहत रिहा कर दिया गया। वे सोमवार को गोधरा उप-जेल से बाहर चले गए।
मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को बिलकिस बानो के परिवार के सात सदस्यों के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के आरोप में 11 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने बाद में उनकी सजा को बरकरार रखा था।
रिपोर्टों के अनुसार, दोषियों ने 15 साल से अधिक समय तक जेल में बिताया था और उनमें से एक ने समय से पहले रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस पर शीर्ष अदालत ने गुजरात सरकार को छूट के मुद्दे पर गौर करने का निर्देश दिया था।
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