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छात्रों पर हो रहे हमलों के लिए BJP-RSS की मानसिकता जिम्मेदार, लेकिन युवाओं को अब रोका नहीं जा सकताः राहुल गांधी

राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक राजनीतिक लड़ाई चल रही है। छात्र कह रहे हैं कि हमारे पास अपनी अभिव्यक्ति है और हम व्यक्ति के तौर पर कुछ चीजों में विश्वास करते हैं। मुझे गर्व है कि अब लाखों छात्रों ने इसे समझ लिया है। अब इसे रोका नहीं जा सकता।

छात्रों पर हो रहे हमलों के लिए BJP-RSS की मानसिकता जिम्मेदार, लेकिन युवाओं को अब रोका नहीं जा सकताः राहुल गांधी
छात्रों पर हो रहे हमलों के लिए BJP-RSS की मानसिकता जिम्मेदार, लेकिन युवाओं को अब रोका नहीं जा सकताः राहुल गांधी फोटोः @INCIndia

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों पर हो रहे हमलों के लिए बीजेपी -आरएसएस की मानसिकता जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी बात रखने के लिए सामने आ रहे हैं और उन्हें अब रोका नहीं जा सकता। उन्होंने देश में बुनियादी बदलाव के लिए छात्रों से अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

उनका कहना था, ‘‘महात्मा गांधी के ऐसे भारत के सपने को साकार किया जा सकता है, जहां हर व्यक्ति ‘स्वराज’ के रास्ते पर आगे बढ़ सके। इसके लिए सरकार को युवाओं के लिए अपने दरवाजे खोलने होंगे और देश को उन्हें उस रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद करनी होगी।’’ उन्होंने कहा कि 'स्वराज' शब्द को अंग्रेजी के शब्द फ्रीडम के साथ कन्फ्यूज किया जाता है। स्वराज का मतलब है- 'स्व' पर 'राज', मतलब खुद पर राज। ये एक जिम्मेदारी है, सोचने का तरीका है। कोई किसी को फ्रीडम दे सकता है, लेकिन किसी भी कीमत पर दूसरे को स्वराज नहीं दे सकता। अपने आप को गहराई से समझना स्वराज है। इंसान का दुनिया के साथ व्यक्तिगत रिश्ता स्वराज है। गांधी जी चाहते थे कि देश का हर व्यक्ति इस स्वराज के रास्ते पर चले।

राहुल गांधी ने कहा कि आप इंजीनियर, कुक या शूमेकर बनना चाहते हैं। आपके लिए अच्छा है, शूमेकर बन जाइए। आप एस्ट्रोनॉट बनना चाहते हैं। आपके लिए अच्छा है, वही बन जाइए।सरकार और देश का काम आपकी कल्पना के दरवाज़े खोलना और आपको महसूस कराना और विश्वास दिलाना है। देश को उस रास्ते पर चलने में आपकी मदद करनी चाहिए। यही भारत के लिए गांधीजी का विज़न है, और यही स्वराज का रास्ता है।

राहुल गांधी ने कहा कि गांधीजी का विज़न कुछ बुनियादी चीज़ों के बिना नहीं रह सकता। यह ऐसे एजुकेशन सिस्टम के साथ नहीं रह सकता जो इतना महंगा है। यह ऐसे टेस्टिंग सिस्टम के साथ नहीं रह सकता जो इतना गलत है। यह ऐसे फाइनेंशियल सिस्टम के साथ नहीं रह सकता जिस पर दो या तीन लोगों का कब्ज़ा हो। यह ऐसे पॉलिटिकल सिस्टम के बिना नहीं रह सकता जो देश में गहराई तक पहुँचे। तो असल में आपको यही करना है।

राहुल गांधी ने कहा कि एक बुरा माहौल इंसान को स्वराज से दूर कर देता है, उसकी नैसर्गिक हालत को बदल देता है, जिसकी वजह से इंसान अपनी ज़िंदगी ठीक से नहीं जी पाता। गांधीजी कहते हैं कि हर जीव एक यूनिक एंटिटी है, जिसका सच तक पहुंचने का अपना रास्ता है। लेकिन आरएसएस ने तय किया है कि वे 1.5 बिलियन लोगों का सच जानते हैं। और मैं कहता हूं नहीं, सिर्फ़ 1.5 बिलियन लोग ही अपना सच जान सकते हैं। अगर मैं यह मानने लगूं कि मैं आपका सच जानता हूं, तो भी मैं पागल हूं। क्योंकि मैंने वह नहीं झेला है जिसका आपने सामना किया है, और मैंने वह नहीं देखा है जो आपने देखा है। तो मैं कैसे कह सकता हूं कि मैं आपका सच जानता हूं?

नेता विपक्ष ने कहा कि बीजेपी मुसलमानों, ईसाइयों और सिखों से कहती है कि वे हैं ही नहीं। बीजेपी आदिवासियों से कहती है कि उनकी जमीन ले ली जाएगी, और अगर वे विरोध करेंगे, तो उन्हें गोली मार दी जाएगी। बीजेपी दलितों से कहती है कि उनके ज़ुल्म से कोई फर्क नहीं पड़ता। हमारे देश के साथ यही हुआ है। इसे बदलने की जरूरत है। हर एक इंसान, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति, उम्र या जेंडर का हो, उसे यह महसूस होना चाहिए: मैं यहीं का हूँ। मुझे यहाँ प्यार मिलता है। यहाँ मेरी इज़्ज़त होती है। और सच की मेरी तलाश मायने रखती है।

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने बीजेपी-आरएसएस पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने, आदिवासियों की जमीन छीनने और दलितों पर अत्याचार करने का आरोप लगाया और कहा कि इन चीजों को बदले जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में एक राजनीतिक लड़ाई चल रही है। छात्र कह रहे हैं कि हमारे पास अपनी अभिव्यक्ति है और हम व्यक्ति के तौर पर कुछ चीजों में विश्वास करते हैं। मुझे गर्व है कि अब लाखों छात्रों ने इसे समझ लिया है। वे जिस पीड़ा को महसूस कर रहे थे, उसका कारण यह था कि उन्हें अपनी बात कहने से रोका जा रहा था। अब वह अभिव्यक्ति अचानक सामने आई है और इसे रोका नहीं जा सकता।’’

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राहुल गांधी ने कहा कि केवल अपनी बात रखने से कोई बदलाव नहीं आएगा, बल्कि इस अभिव्यक्ति को देश के युवाओं के लिए व्यवस्था में बदलाव के रूप में परिणत करना होगा।उन्होंने कहा ‘‘यह अभिव्यक्ति हमारे देश की शिक्षा व्यवस्था में बदलाव कैसे लाएगी? शिक्षा व्यवस्था इस तथ्य को कैसे बदलेगी कि आप जो चाहें वह कर सकें? असली सवाल यही है। हम इस जागृति और ऊर्जा का इस्तेमाल आगे युवाओं के लिए बुनियादी बदलाव लाने में कैसे कर सकते हैं? यही लड़ाई है।’’ उन्होंने कहा कि यदि देश के हर कारोबार पर एक व्यक्ति का स्वामित्व हो तो भारत की बड़ी आबादी के लिए ‘स्वराज’ संभव नहीं हो सकता।

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राहुल गांधी ने कहा कि आज, भारत में विचारधारा की लड़ाई है। सिस्टम को कंट्रोल करने वाले कुछ लोगों ने तय कर लिया है कि वे इस देश में हर किसी का सच जानते हैं। इसलिए वे हर दिन स्टूडेंट्स पर हमला करते हैं। लेकिन अगर कोई स्टूडेंट मेरे पास आता है, तो मुझे यह विश्वास है: वे अपना सच मुझसे बेहतर जानते हैं। मेरा काम है सुनना। उसका सम्मान करना। उसे समझना। यही वह पॉलिटिकल लड़ाई है जिसमें हम हैं।

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