
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए 5 सितंबर को राजधानी दिल्ली में एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च का ऐलान किया है। यह मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाएगा। इस मार्च का नेतृत्व नीट परीक्षा से जुड़े पीड़ितों (जिनकी मौत हो गई) और पुलिस बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे।
यह फैसला सोमवार को सीजेपी की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक में लिया गया। केंद्र के साथ बातचीत के बाद संगठन द्वारा अपना आंदोलन समाप्त किए जाने के करीब एक महीने बाद यह निर्णय लिया गया है। सीजेपी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा नहीं किया जिनके आधार पर उसने परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ 36 दिन का अपना आंदोलन वापस लिया था। पार्टी ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह 25 जुलाई को युवाओं से किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है।
एक बयान में, सीजेपी ने कहा कि राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक में भारत सरकार और बीजेपी/एनडीए शासित राज्यों द्वारा देश के युवाओं से 25 जुलाई 2026 को किए गए अहम वादों के पालन की समीक्षा की गई। इन्हीं वादों के आधार पर देशव्यापी युवा विरोध प्रदर्शनों को अच्छे विश्वास के साथ वापस लिया गया था। समिति के सदस्यों ने इस बात पर गंभीर संदेह जताया कि क्या सरकार अपनी बात का पालन करने का इरादा भी रखती है। पार्टी ने आरोप लगाया कि एक महीने पहले किए गए वादों को लागू करने के बजाय, सरकार ने कार्रवाई में देरी की है और स्पष्ट आश्वासन देने से बचती रही है।
सीजेपी ने कहा कि एक महीने से सरकार अपने वादे को पूरा करने के बजाय टालमटोल कर रही है, तकनीकी खामियों का सहारा ले रही है और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी स्पष्ट प्रतिबद्धता देने से बच रही है। 18 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय की कार्यवाही का जिक्र करते हुए पार्टी ने कहा कि अदालत ने केंद्र सरकार से देश भर में दर्ज एफआईआर की सूची उपलब्ध कराने को बार-बार कहा था ताकि उन्हें सामूहिक रूप से रद्द करने पर विचार किया जा सके। फिर भी, सरकार ने ऐसा करने की कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया। सरकार द्वारा सीजेपी को लिखित आश्वासन भी दिया जाना बाकी है।
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सीजेपी ने यह भी कहा कि उनके धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जा सकता। सीजेपी ने कहा कि यह जारी नहीं रह सकता। हमारे धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जा सकता। हमारी सद्भावना सरकार के लिए हमें धोखा देने का अवसर नहीं बन सकती। बयान में कहा गया कि हम 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च की घोषणा करते हैं, जिसका नेतृत्व नीट परीक्षा में मृत छात्रों और पुलिस बर्बरता के शिकार लोगों के परिवार करेंगे और इसमें देश भर के छात्र और युवा नागरिक शामिल होंगे।
सीजेपी ने कहा कि उसे सड़कों पर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि सरकार देश की युवा पीढ़ी, यानी जेनजी और अपने बच्चों को खो चुके परिवारों साथ विश्वासघात करने पर तुली हुई प्रतीत हो रही थी। सीजेपी ने देशभर के छात्रों, युवा संगठनों और युवाओं से 5 सितंबर के मार्च में शामिल होने की अपील करते हुए जोर दिया कि यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा। सीजेपी ने कहा, ‘‘जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, वे सबसे आगे चलेंगे। पुलिस की ज्यादती के शिकार लोग उनके साथ चलेंगे। उनके पीछे वह पूरी पीढ़ी चलेगी, जो अपनी सरकार से केवल एक चीज की मांग कर रही है- अपना वादा निभाइए।’’
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सीजेपी का आंदोलन परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं और नीट प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे को लेकर 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और बाद में देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। 20 जुलाई को संगठन के नेतृत्व में संसद की ओर निकाला गया मार्च उस समय अफरातफरी और हिंसा में बदल गया, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। इसके बाद जंतर-मंतर पर लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और हर घंटे के साथ आंदोलन और विशाल होता गया।
सीजेपी का आंदोलन 25 जुलाई को उस समय समाप्त हुआ, जब धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा, सीजेपी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद सरकार ने उसकी अन्य मांगों पर भी सहमति जताई, जिनमें आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेना शामिल था। दोनों पक्षों ने व्यापक परीक्षा सुधारों को लेकर आगे भी चर्चा जारी रखने पर सहमति जताई थी। हालांकि, इनमें से तमाम वादे आज भी अधूरे हैं।
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