
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और कुछ अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने पश्चिम एशिया संकट और भारत पर इसके प्रभाव को लेकर सोमवार को संसद परिसर में प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर देश हितों के साथ समझौता करने का आरोप लगाया।
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संसद भवन के निकट हुए इस विरोध प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कुछ अन्य दलों के नेता शामिल हुए।
उन्होंने एक बड़ा बैनर ले रखा था, जिस पर ‘इंडिया नीड्स लीडरशिप, नॉट साइलेंस’ (भारत को नेतृत्व की जरूरत है, चुप्पी की नहीं)’ लिखा हुआ था।
विपक्षी सांसदों ने ‘अमेरिका के सामने सरेंडर करना बंद करो’ जैसे नारे लगाए।
विपक्ष की मांग है कि संसद में पश्चिम एशिया संकट पर अल्पकालिक चर्चा होनी चाहिए।
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वहीं कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने संसद में विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयान पर असंतोष जताते हुए कहा कि इस मामले पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को अस्वीकार कर दिया गया, जिसके बाद विपक्ष को वॉकआउट करना पड़ा।
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रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘जैसा कि अपेक्षित था, विदेश मंत्री ने राज्यसभा में स्थिति पर स्वत: संज्ञान लेते हुए वक्तव्य दिया, जिस पर कोई प्रश्न नहीं पूछा जा सकता या स्पष्टीकरण नहीं मांगा जा सकता। संपूर्ण विपक्ष पश्चिम एशिया के हालात पर तत्काल चर्चा चाहता था। इसे अस्वीकार कर दिया गया और इसलिए विपक्ष ने विरोध के बाद वॉकआउट कर दिया।’’
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पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत शांति, संवाद और कूटनीति की ओर लौटने का पक्षधर है तथा तनाव कम करने, संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की वकालत करता है।
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर अपनी ओर से दिए गए एक बयान में उन्होंने कहा कि क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय का कल्याण और सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
पीटीआई के इनपुट के साथ
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