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‘वोट चोरी’ हमारे लोकतंत्र पर एटम बम, राहुल गांधी के खुलासे से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल

8 अगस्त को बेंगलुरु में राहुल गांधी का विरोध प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा कि यह मतदाता सूची में व्यापक पैमाने पर हुई कथित छेड़छाड़- खास तौर पर बिहार तथा महाराष्ट्र के हालिया घटनाक्रमों के मद्देनजर- राष्ट्रीय बहस के बीच हुआ।

राहुल गांधी के वोट चोरी के खुलासे से खलबली (फोटोः विपिन)
राहुल गांधी के वोट चोरी के खुलासे से खलबली (फोटोः विपिन) फोटोः विपिन

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 2024 लोकसभा चुनावों में जिस तरह सबूतों के साथ वोट चोरी’ को लेकर रहस्योद्घाटन किए हैं, उसने बेंगलुरु मध्य संसदीय क्षेत्र पर भी ध्यान खास तौर पर केन्द्रित किया है। नई दिल्ली में 7 अगस्त को राहुल ने वोटर सूची में अनियमितताओं, संदिग्ध टर्नआउट पैटर्न, और इलेक्ट्रॉनिक डेटा को छिपाने के चुनावी धोखेबाजी के विस्फोटक प्रमाण’ पेश किए। उन्होंने वोटों को चुराने को हमारे लोकतंत्र पर एटम बम’ सरीखा बताया। यह सीट बीजेपी के पी.सी. मोहन ने लगातार चौथी बार बरकरार रखी, लेकिन जीत का अंतर 32,707 वोटों का रहा, जबकि 2019 में यह अंतर 70,968 वोटों का था, जो 2014 के 1,37,500 वोटों के अंतर से काफी कम था। एआईसीसी सचिव मंसूर अली खान की इतने कम अंतर से हार ने कांग्रेस के चुनाव प्रबंधकों को 2024 के चुनावों के बाद के आंकड़ों पर गहराई से सोचने के लिए मजबूर कर दिया।

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2008 में परिसीमन के बाद बेंगलुरु मध्य को बेंगलुरु उत्तर और दक्षिण लोकसभा क्षेत्रों से अलग किया गया था। लोकसभा क्षेत्र के आठ विधानसभा क्षेत्रों में से कांग्रेस पांच और बीजेपी तीन का प्रतिनिधित्व करती है। इस निर्वाचन क्षेत्र में अल्पसंख्यक मतदाताओं का वर्चस्व है, और यह भी एक कारण है कि कांग्रेस 2009 से इस सीट से किसी मुस्लिम या ईसाई को मैदान में उतारती रही है। भाजपा 2009 से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से ताल्लुक रखने वाले पी.सी. मोहन के साथ खड़ी रही है। इस निर्वाचन क्षेत्र में लगभग पांच लाख मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग के छह लाख मतदाता हैं।

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2024 के आम चुनावों में, खान कांग्रेस के प्रतिनिधित्व वाले विधानसभा क्षेत्रों में अच्छी बढ़त बनाने में सफल रहे थे, जिसके  बाद उनका बीजेपी से यह सीट छीनने की शुरुआती उम्मीद बांधना स्वाभाविक था। हालांकि पार्टी के गढ़ महादेवपुरा (सबसे बड़े आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों में से एक) और राजाजीनगर के नतीजों ने बाजी बीजेपी के पक्ष में पलट दी। 7 अगस्त के प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल ने कहा कि महादेवपुरा में 6.5 लाख वोटों में से 1 लाख वोटों की चोरी’ कर ली गई। 

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कांग्रेस के पूर्व विधान पार्षद प्रकाश के. राठौड़ इस मुद्दे पर कहते हैं कि वोट चोरी कोई नई बात नहीं है। उन्होंने विजयपुरा लोकसभा (आरक्षित) निर्वाचन क्षेत्र में अपनी हार का कारण 2009 और 2014 में हुए प्रॉक्सी वोटिंग को बताया।

लंबानी समुदाय से आने वाले राठौड़ ने बताया कि समुदाय के 99 प्रतिशत लोगों ने उन्हें वोट दिया था। लेकिन बाद में एक विश्लेषण से पता चला कि लगभग 32,000 लंबानी वोट भाजपा प्रत्याशी  को मिले थे। राठौड़ ने आरोप लगाया, “हमारा संदेह था कि ईवीएम में कुछ गड़बड़ है और 2023 के विधानसभा चुनावों में विजयपुरा के लंबानी थांडा (राजस्व क्षेत्र) भुटनाल में 4,000 प्रॉक्सी मतदाता डुप्लीकेट वोटर कार्ड के साथ पकड़े भी गए।”

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8 अगस्त को बेंगलुरु में राहुल गांधी का विरोध प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा कि यह मतदाता सूची में व्यापक पैमाने पर हुई कथित छेड़छाड़- खास तौर पर बिहार तथा महाराष्ट्र के हालिया घटनाक्रमों के मद्देनजर- राष्ट्रीय बहस के बीच हुआ। हालांकि कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी और चुनाव आयोग ने आरोपों को ‘गुमराह करने वाला’ करार दिया है, लेकिन राहुल गांधी ने जिस सूक्ष्म ब्योरे के साथ इसे प्रस्तुत किया है, उसने एक बार फिर चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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