हालात

दिल्ली में रावण दहन से 12 घंटे पहले रामलीला की अनुमति रद्द करने पर सियासी घमासान, आप ने सरकार को घेरा

आप के एमसीडी सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने रावण दहन से महज 12 घंटे पहले रामलीला आयोजन की अनुमति रद्द कर दी, जबकि समिति सभी निर्धारित नियमों का पालन करते हुए कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर चुकी थी।

फोटो: सोशल मीडिया
फोटो: सोशल मीडिया 

दिल्ली के लाजपत नगर स्थित कस्तूरबा निकेतन ग्राउंड में रामलीला और रावण दहन के आयोजन की अनुमति कथित तौर पर ऐन मौके पर रद्द किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस मामले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है।

पार्टी के एमसीडी सह-प्रभारी प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने रावण दहन से महज 12 घंटे पहले रामलीला आयोजन की अनुमति रद्द कर दी, जबकि समिति सभी निर्धारित नियमों का पालन करते हुए कार्यक्रम की तैयारियां पूरी कर चुकी थी। उन्होंने इसे धार्मिक आयोजन में बाधा डालने वाला कदम बताते हुए बीजेपी सरकार से जवाब मांगा है। प्रवीण कुमार के अनुसार, कस्तूरबा निकेतन ग्राउंड में रावण दहन के आयोजन के लिए रामलीला समिति को 15 अक्टूबर को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) से विधिवत अनुमति मिली थी।

उन्होंने दावा किया कि आयोजन के लिए समिति ने 35 हजार रुपए का शुल्क भी जमा कराया था। अनुमति मिलने के बाद आयोजकों ने रावण का निर्माण कराने के साथ ही कार्यक्रम की तैयारियां शुरू कर दी थीं। 15 अक्टूबर से ही मैदान में टेंट और अन्य जरूरी सामान पहुंचना शुरू हो गया था। समिति ने आयोजन से संबंधित सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली थीं। प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम से कुछ घंटे पहले डूसिब के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आयोजकों को अनुमति रद्द किए जाने की जानकारी दी।

उन्होंने दावा किया कि बीजेपी विधायक तरविंदर सिंह मारवाह के दबाव में यह निर्णय लिया गया। उनके मुताबिक, अधिकारियों ने ऊपर से फोन आने का हवाला देते हुए आयोजन की अनुमति निरस्त किए जाने की बात कही। हालांकि, ये आरोप आम आदमी पार्टी की ओर से लगाए गए हैं और मामले में सरकार या संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। प्रवीण कुमार ने कहा कि दशहरा असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है और देशभर में इस अवसर पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में दिल्ली में एक आयोजन की अनुमति अचानक रद्द किए जाने वाली दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल किया कि आखिर दशहरे जैसे त्योहार के आयोजन में बाधा क्यों डाली जा रही है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या मुख्यमंत्री रावण को जलता हुआ नहीं देखना चाहतीं? आप नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार एक ओर भगवान राम के नाम का इस्तेमाल करती है, वहीं दूसरी ओर दशहरे जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को रोकने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि समिति को पहले से अनुमति दी गई थी और आयोजकों ने निर्धारित शुल्क जमा करने के साथ जरूरी नियमों का पालन किया था, तो कार्यक्रम से ठीक पहले अनुमति रद्द करने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।

प्रवीण कुमार ने बताया कि आयोजन स्थल पर टेंट, रावण और कार्यक्रम से संबंधित अन्य व्यवस्थाएं पहले ही की जा चुकी थीं। ऐसे में अंतिम समय पर अनुमति रद्द होने से आयोजकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई। उन्होंने कहा कि समिति ने आयोजन के लिए प्रशासन की ओर से बताई गई शर्तों को पूरा किया था और इसके बावजूद अनुमति वापस लिए जाने से कई सवाल उठ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि दशहरा समाज को सत्य, न्याय और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है। ऐसे पर्व के आयोजन को लेकर अंतिम समय में पैदा हुई स्थिति से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। प्रवीण कुमार ने कहा कि आयोजन स्थल पर समाज के लोग मौजूद हैं और समिति रावण दहन करने के अपने फैसले पर कायम है।

उन्होंने कहा कि अनुमति रद्द होने के बावजूद आयोजक कार्यक्रम करने के पक्ष में हैं। उनके मुताबिक, हिंदू समाज इतना कमजोर नहीं है कि केवल अनुमति पत्र रद्द होने के कारण अपना पारंपरिक कार्यक्रम छोड़ दे।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए