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प्रधानमंत्री मोदी युवाओं को गुमराह कर रहे हैं, त्वरित अदालतों की घोषणा महज लीपापोती, कांग्रेस ने दागे कई सवाल

जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि पिछले 24 घंटों में हुई दो घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों में कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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फोटो: Getty Images Hindustan Times

कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी युवाओं को गुमराह कर रहे हैं और पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने के बजाय त्वरित अदालतों की घोषणा के जरिए महज सुर्खियां बटोरने की कोशिश की जा रही है।

पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि पिछले 24 घंटों में हुई दो घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक मामलों में कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा सचिव का तबादला कर उनकी जगह ऐसे अधिकारी को नियुक्त किया गया, जिनके परिवार के सदस्यों ने कथित तौर पर कृषि मंत्रालय से भारी-भरकम सब्सिडी ली थी, जबकि वह संबंधित पशुपालन, मत्स्य पालन एवं डेयरी मंत्रालय में शीर्ष नौकरशाह के रूप में कार्यरत थे।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने संजीव मुखिया को क्लीन चिट दे दी है, जिन्हें पहले नीट-यूजी 2024 पेपर लीक का सरगना बताया गया था।

जयराम रमेश ने कहा कि मुखिया की पत्नी बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की घटक लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा त्वरित अदालतों की घोषणा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार सुबह ही सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम कानून, 2024 के तहत मामलों की सुनवाई के लिए तत्काल प्रभाव से एक नई त्वरित अदालत का गठन कर दिया।

जयराम रमेश ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि मौजूदा कानूनों के तहत भी फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाई जा सकती हैं और प्रधानमंत्री की घोषणा ‘‘खोखली तथा केवल हेडलाइन बनाने की कोशिश’’ है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘त्वरित अदालतें तभी प्रभावी होती हैं, जब जांच ठीक तरीके से और समयबद्ध हो तथा मामलों को उनके अंजाम तक पहुंचाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति हो।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में पेपर लीक के मामलों को लेकर मोदी सरकार की नीयत स्पष्ट रही है कि ‘‘पेपर लीक से इनकार करना और उनकी जांच को दबाना।’’

जयराम रमेश कहा कि त्वरित अदालतों की घोषणा ‘‘महज लीपापोती’’ है, ताकि जवाबदेही का दिखावा किया जा सके, जबकि वास्तविक जवाबदेही का पूरी तरह अभाव है। पार्टी ने अपनी मांगें दोहराते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए, छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और छात्रों से माफी मांगी जाए।

प्रधानमंत्री मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ कड़े प्रावधान वाला विधेयक अगले सप्ताह संसद में पेश किया जाएगा।

उन्होंने कहा था कि नीट प्रश्नपत्र लीक के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें त्वरित अदालतों की व्यवस्था करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में जिम्मेदार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।