हालात

रद्द हो एसआईआर, सुप्रीम कोर्ट ले संज्ञान, CEC के खिलाफ चले महाभियोग: चुनाव आयोग में फूट की खबर पर विपक्ष की मांग

एसआईआर प्रक्रिया रद्द की जाए, सुप्रीम कोर्ट पूरे मामले का संज्ञान लेकर फैसला ले और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाया जाए। यह मांग विपक्ष ने उस खबर के बाद की है जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग में फैसलों पर एकमत नहीं है।

(बाएं से) चुनाव आयुक्त एस एस संधु, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी
(बाएं से) चुनाव आयुक्त एस एस संधु, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 

चुनाव आयोग के गहन केंद्रीकरण, मुख्य चुनाव आयुक्त की मनमानी, बाकी दो चुनाव आयुक्तों की राय के बिना फैसले और एसआईआर में हो रही गड़बड़ियों की बात एक मीडिया रिपोर्ट में सामने आने के बाद विपक्ष ने मांग उठाई है कि एसआईआर को रद्द किया जाए।

सीपीएम सांसद जॉन ब्रिटास ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट सामने आने के बाद स्पष्ट तौर पर कहा है कि ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाला आयोग अब चुनाव आयोग नहीं रहा। यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की एकतरफा तानाशाही बन गया है!!

उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को बिना देरी किए पूरी एसआईआर प्रक्रिया को रद्द कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब ​​तीन में से दो आयुक्त यह बात रिकॉर्ड पर लाते हैं कि यह प्रक्रिया गैर-कानूनी है और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को खत्म करने वाली है, तो न्यायपालिका की चुप्पी मिलीभगत बन जाती है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा है कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई है। उन्होंने नए वोटरों को जोड़ने और बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया को "अनधिकृत और गैर-कानूनी" बताया। उन्होंने चुपके से नाम हटाने, बहाल करने और फॉर्म 6 में बदलावों पर आपत्ति दर्ज कराई, जिनसे पहली बार वोट देने वाले युवा परेशान होते हैं — और यह सब उन्हें अंधेरे में रखकर किया गया। यह चुनाव आयोग और हमारे लोकतंत्र को खुलेआम कमजोर करने की कोशिश है!

जॉन ब्रिटास ने कहा है कि संसद को तुरंत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि “हमने असल में 24 अप्रैल, 2026 को संवैधानिक नियमों के अनुसार हटाने का नोटिस दिया था - जिसमें ठोस आधार और लगभग 70 सदस्यों के हस्ताक्षर थे (जबकि तय संख्या 50 है)। संविधान संस्थाओं पर कब्जे और उन्हें कमजोर करने के ऐसे ही मौकों के लिए यह अधिकार देता है।“

उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार जो कर रहे हैं, वह एक लोकतांत्रिक देश के लिए विनाशकारी है। उन्होंने हैशटैग इस्तेमाल करते हुए कहा है कि CEC को हटाओ। #SIR को रद्द करो। या फिर मान लो कि भारत में निष्पक्ष चुनाव पहले ही खत्म किए जा रहे हैं।

इसी बात को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी उठाया है। उन्होंने एक्स पर  लिखा कि, “ये एक बेहद गंभीर समाचार है कि पिछले 10 महीनों में 2 चुनाव आयुक्तों ने निर्वाचन आयोग के गलत निर्णयों पर 14 बार अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई है। इसका सीधा मतलब ये है कि सभी चुनाव आयुक्त अपना सही काम नहीं कर पा रहे हैं। एक स्वतंत्र निकाय के सदस्यों को अगर न्यायपूर्ण कार्य करने की स्वतंत्रता नहीं है या उनकी कोई सुनवाई नहीं है तो ये लोकतंत्र के लिए बेहद घातक और ख़तरनाक हालात हैं। कुछ लोगों द्वारा सत्ता की कठपुतली बनकर लोकतंत्र को धोखा देना घोर सांविधानिक अपराध है। ये लोकतंत्र को मिटाने के किसी षड्यंत्र से कम नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय स्वत: संज्ञान ले!”

राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के संसदीय दल के नेता, डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि , "पाँच महीने पहले, 60 से ज़्यादा राज्यसभा मेंबर्स ने राज्यसभा के चेयरमैन को चिट्ठी लिखकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव दिया था। यह पांच महीने पहले की बात है।" उन्होंने आगे कहा कि, "अब आज, इस बड़ी न्यूज़ ब्रेक के बाद कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कई कामों पर एतराज़ जताया है, अब समय आ गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त पर महाभियोग के लिए राज्यसभा में मोशन लाया जाए और लोकतंत्र को बचाया जाए।"

दिल्ली: चुनाव आयोग के ECI-SIR विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए AAP सांसद संजय सिंह ने कहा, "हम पहले दिन से ही कह रहे हैं कि स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) एक धोखाधड़ी वाली प्रक्रिया है जिसे BJP के कहने पर ज्ञानेश कुमार चला रहे हैं... अब यह बात सच साबित हो गई है। मामला अब सिर्फ़ विपक्ष के विरोध तक सीमित नहीं है; ज्ञानेश कुमार के साथ बैठने वाले दो चुनाव आयुक्तों की असहमति भी सामने आई है। जब आप बंगाल में 27 लाख वोटर्स के नाम हटा देते हैं, तो चुनाव का क्या मतलब रह जाता है? ...ज्ञानेश कुमार ने जानबूझकर वोट हटाने का अपराध किया है। उन्हें गिरफ़्तार करके जेल भेजा जाना चाहिए। जहाँ-जहाँ भी ये धोखाधड़ी हुई है, उन सभी चुनावों को तुरंत रद्द किया जाना चाहिए और नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। वरना, चुनाव का क्या महत्व रह जाता है?..."

विपक्षी दल चुनाव आयोग पर सत्ता पक्ष के दबाव में काम करने के आरोप लगाते रहे हैं। खास कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कई आरोप लगाए। इसी बीच चुनाव आयोग द्वारा देश भर में मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (SIR) अभियान को लेकर नया विवाद सामने आया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने फैसले लेने में मनमानी करने और उनकी आपत्तियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इस खुलासे पर कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी समते कई दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है।

प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए