
विनेश फोगाट का एशियन गेम्स 2026 में हिस्सा लेने का सपना टूट गया। शनिवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में हुए चयन ट्रायल्स के दौरान महिलाओं के 53 किग्रा वर्ग के सेमी-फाइनल में मीनाक्षी गोयत के हाथों 4-6 से हार के साथ विनेश के एशियन गेम्स खेलने की उम्मीद टूट गई। हार के बाद 31 वर्षीय विनेश ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की।
विनेश फोगाट ने कहा, "जब मैं हारी तो डब्ल्यूएफआई के अधिकारी खुश हो रहे थे। उन्हें अभी जश्न मनाने दो। मैं बहुत जिद्दी और जुनूनी हूं। ये हार मेरे इरादों को और मजबूत करती है। मैं वापसी करूंगी, और जब मैं वापसी करूंगी, तो अपने प्रदर्शन से हर उस इंसान का मुंह बंद कर दूंगी जिसे मुझ पर शक है। अभी तो महासंघ चाहता है कि मैं जल्दी मर जाऊं- कम से कम वे यही सोचते हैं।”
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विनेश फोगाट के क्वालीफाई नहीं कर पाने के बाद उनके पति और कोच सोमवीर राठी ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की मंशा पर सवाल उठाए। सोमवीर का आरोप है कि चयन ट्रायल के दौरान फेडरेशन नहीं चाहता था कि विनेश जीतें। राठी ने कहा कि जिस तरह से घटनाक्रम सामने आया, उससे परिवार को ठगा हुआ महसूस हुआ। उन्होंने दावा किया कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान महासंघ के कदम विनेश के खिलाफ ही रहे।
सोमवीर राठी ने कहा, "हमने कई फैसलों को चुनौती दी, लेकिन ऐसा लगा कि महासंघ नहीं चाहता था कि विनेश जीतें। कोर्ट की लड़ाई और डब्ल्यूएफआई से जुड़ी पूरी स्थिति मानसिक रूप से थकाने वाली रही है, लेकिन विनेश बहुत मजबूत इरादों वाली हैं। वह ट्रेनिंग पर वापस लौटेंगी, जोरदार वापसी करेंगी और उनका प्रदर्शन ही उनकी तरफ से बात करेगा।"
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विनेश की इन टिप्पणियों से उनके और महासंघ के बीच चल रहे तनाव का पता चलता है। ट्रायल में विनेश की भागीदारी को लेकर आखिरी घंटों तक अनिश्चितता बनी हुई थी। कुस्ती संघ ने शुरू में विनेश को 50 किलोग्राम वर्ग तक ही सीमित कर दिया था, जिस फैसले को विनेश ने चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के दखल और महासंघ के भीतर हुई चर्चाओं के बाद, आखिरकार विनेश को उनके पसंदीदा 53 किलोग्राम वर्ग में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति दी गई। हालांकि वह क्वालीफाई नहीं कर पाईं, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि उनका हार मानने का कोई इरादा नहीं है।
ट्रायल्स में विनेश की शुरुआत काफी जोरदार रही। लंबे ब्रेक के बाद प्रतिस्पर्धी कुश्ती में वापसी करते हुए, उन्होंने अपने पहले ही मैच में ज्योति को 7-1 से हराया, और फिर एक बेहद रोमांचक क्वार्टर-फाइनल में निशु को 7-6 के बेहद करीबी अंतर से हराकर सेमी-फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। एशियन गेम्स में जगह बनाने के बेहद करीब पहुंचकर, वह पूरे आत्मविश्वास और जोश के साथ सेमी-फाइनल में मीनाक्षी गोयत के खिलाफ उतरीं। हालांकि, एक कड़े मुकाबले में मीनाक्षी ने 6-4 से जीत हासिल करते हुए विनेश का सफर समाप्त कर दिया।
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इस हार के साथ ही विनेश की वापसी की कोशिश और इस साल के आखिर में जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करने का उनका सपना टूट गया। हार के साथ ही 31 साल की इस खिलाड़ी के लिए तनाव और भावनाओं से भरे 48 घंटे खत्म हो गए। इस अवधि में उन्हें सुप्रीम कोर्ट और भारतीय कुश्ती महासंघ के दखल के बाद ट्रायल्स में हिस्सा लेने का मौका मिला था।
विनेश ने इन ट्रायल्स में तब हिस्सा लिया, जब उनके शामिल होने को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई थी। डब्ल्यूएफआई ने शुरू में उन्हें ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति ही नहीं दी। कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर सिर्फ 50 किग्रा वर्ग तक ही सीमित रखा था, जिसका विनेश ने जोरदार विरोध किया। महासंघ के भीतर हुई चर्चाओं और डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह द्वारा उठाए गए कदमों के बाद, शनिवार सुबह उन्हें 53 किग्रा में ट्रायल देने की अनुमति दी गई।
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