
जब आम आदमी पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में था, तो आतिशी ही एक तरह से पार्टी के चेहरे के तौर पर सामने थीं। वह मीडिया से गुफ्तुगू करतीं, भाषण देतीं और जहां जरूरत पड़ती वहां जरूरी कदम उठातीं। आखिर उनके पास दिल्ली सरकार के सबसे ज्यादा विभाग का कार्यभार भी था और एक तरह से वे ही सरकार चला रही थीं।
आतिशी दिल्ली सरकार की अकेली महिला मंत्री रहीं और अब वह शीर्ष पद पर बैठेंगी। केजरीवाल आज शाम तक अपनी दो दिन पहले की गई घोषणा के मुताबिक इस्तीफा दे देंगे।
लेकिन दिल्ली विधानसभा के चुनावों से महज चंद महीने पहले केजरीवाल का इस्तीफा देना मजबूरी से ज्यादा राजनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, और आतिशी को केजरीवाल का नजदीकी माना जाता है।
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करीब एक दशक तक केजरीवाल दिल्ली सरकार के मुखिया रहे। लेकिन एक्साइज मामले में पहले उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और फिर उनकी अपनी गिरफ्तारी के बाद दिल्ली सरकार और आम आदमी पार्टी में एक तरह का शून्य पैदा हो गया था। कारण भी साफ था, क्योंकि केजरीवाल ने किसी दूसरे नेता को उस तरह उबरने का मौका ही नहीं दिया जिससे जरूरत पड़ने पर सरकार और पार्टी की कमान सौंपी जा सके। ऐसे में आतिशी मार्लेना सबसे प्रबल दावेदारों के रूप में सामने आई थीं, लेकिन उनके लिए भी चुनौतियां कम नहीं हैं।
विधायक दल की बैठक में केजरीवाल ने खुद ही मुख्यमंत्री पद के लिए आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा। हालांकि पार्टी में और भी वरिष्ठ नेता थे, लेकिन विधायकों के सामने केजरीवाल के प्रस्ताव पर मुहर लगाने के अलावा विकल्प नहीं था शायद।
केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद आतिशी ने पार्टी में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पार्टी के दूसरे नेता सौरभ भारद्वाज के साथ उन्होंने सरकार और पार्टी की कमान संभाली और लोकसभा चुनावों के दौरान वे पार्टी के सबसे ज्यादा दिखने वाले चेहरे के तौर पर सामने आईं। अपनी भाषण कला और प्रेस वार्ताओं में पत्रकारों के तुर्की ब तुर्की जबाव देने के चलते वे काफी चर्चा में रहीं।
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लोकसभा चुनाव के बाद भी आतिशी लगातार सुर्खियों में रहीं। इसी साल जून में उन्होंने दिल्ली में पानी के संकट को लेकर हरियाणा सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल की थी। इस तरह उन्होंने दिल्लीवासियों से जुड़े अहम मुद्दों पर जान लगा देने वाले तेवर दिखाए। उस दौरान उन्हें तबीयत खराब होने पर अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ा था।
मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी से पहले भी आतिशी के पास दिल्ली सरकार के अहम विभाग थे। वे शिक्षा, वित्त, योजना, पीडब्लूडी, जल, बिजली और जनसंपर्क मंत्रालय संभाल रही थीं। यूं तो दिल्ली में शिक्षा क्षेत्र में मनीष सिसोदिया ने शिक्षा मंत्री के रूप में काफी अहम काम किया है, लेकिन उनके जेल जाने के बाद आतिशी ने इस काम को बखूबी निभाया।
आम आदमी पार्टी शिक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक मानती रही है। दिल्ली के सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे और पाठ्यक्रम को बेहतर बनाने को उसने हमेशा एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया है। शिक्षा मंत्री के रूप में आतिशी ने इन सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आतिशी पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया की सलाहकार के रूप में काम कर चुकी थीं और उन्होंने 'हैप्पीनेस करिकुलम' और 'एंटरप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम' जैसी प्रमुख पहलों को शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
आतिशी संभवत: दिल्ली की सबसे ज्यादा शिक्षित मंत्री हैं। वे रोड्स स्कॉलर हैं और उन्होंने दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज और बाद में ऑक्सफर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ाई की है। उनकी शैक्षिक योग्यता दिल्ली के शहरी और मध्यवर्ग के वोटरों को काफी लुभाती है।
राजनीति में आने से पहले आतिशी ने मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव में ऑर्गेनिक खेती पर प्रयोग किए और कई एनजीओ के साथ मिलकर खेती में नए प्रयोग किए। इन सात वर्षों में उन्होंने किसानों से जुड़े अहम और जमीनी मुद्दों को गहराई से समझा।
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आम आदमी पार्टी जब 2013 में चुनावी मैदान में उतरी थी तो आतिशी ने पार्टी के घोषणापत्र को तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी।
इन तमाम योग्यताओं और काफी हद तक लोकप्रियता के बावजूद आतिशी के लिए केजरीवाल के पद चिह्नों पर चलना आसान काम नहं होगा, खासतौर से तब जबकि ईमानदारी के नारे के साथ सत्ता में आई पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रहा है। आतिशी की असली परीक्षा अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में होने वाली है।
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