
इजराइल में संसदीय चुनाव को महज एक दिन बाकी है। इस बीच, मतदान से ऐन पहले एक ऐसी “कार्रवाई” के निर्देश को लेकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सैन्य प्रमुख के बीच सोमवार को तनातनी की खबरें सामने आई, जिसके चलते सेना को ईरान के साथ तनाव बढ़ने की आशंका थी।
यह खबर सबसे पहले इजराइल के ‘चैनल-12’ पर प्रसारित की गई थी। हालांकि, नेतन्याहू के कार्यालय ने खबर को “फर्जी” बताकर खारिज कर दिया है।
रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी खबर का खंडन करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि इजराइल का इजराइल में होने वाले चुनावों से पहले ईरान पर हमले करने का कोई इरादा नहीं है।”
उन्होंने राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच मतभेद की खबरों को “पूरी तरह से झूठा और बेबुनियाद” करार दिया। हालांकि, काट्ज ने कहा कि अगर ईरान पहले हमला करता है, तो इजराइल कड़ा जवाब देगा।
विपक्षी उम्मीदवारों ने खबर पर चिंता जताते हुए नेतन्याहू पर आरोप लगाया कि वह अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहे हैं।
चीन ने सोमवार को कहा कि वह भारत के साथ हुए समझौतों का सख्ती से पालन कर रहा है और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए सीमा पर सामान्य गश्त करता है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यह टिप्पणी उस वक्त की, जब उनसे उनके भारतीय समकक्ष के एक बयान के बारे में पूछा गया।
पिछले हफ्ते नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति समय-समय पर बिगड़ जाती है, जब चीनी सेना स्थापित गश्ती पैटर्न से हट जाती है।
गुओ ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘चीन दोनों देशों के बीच हुए प्रासंगिक समझौतों, और बनी आपसी सहमति का सख्ती से पालन करता है। सीमावर्ती इलाकों में अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता तथा स्थिरता की रक्षा के लिए सामान्य सीमा गश्त करता है और नियंत्रण गतिविधियां करता है।’’
उन्होंने कहा कि चीन और भारत राजनयिक और सैन्य माध्यमों से संवाद जारी रखे हुए हैं।
गुओ ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि भारत, दोनों पक्षों के बीच बनी आम सहमति को संयुक्त रूप से लागू करके और ठोस कदमों के जरिए सीमावर्ती इलाकों में शांति व स्थिरता बनाए रखकर, चीन के साथ उसी दिशा में काम करेगा।’’
पिछले हफ्ते, नयी दिल्ली में जायसवाल ने कहा था कि एलएसी पर स्थिति समय-समय पर बिगड़ जाती है, जब चीनी सेना स्थापित गश्ती पैटर्न से हट जाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बहुत जरूरी है।
उन्होंने यह टिप्पणी एक सवाल के जवाब में की, जो भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के इस बयान के संदर्भ में पूछा गया था कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर कई स्थानों पर चीनी सैनिकों के साथ टकराव की घटनाएं लगातार हो रही हैं।
जायसवाल ने कहा था, ‘‘दोनों पक्ष एलएसी पर लंबित मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी तथा गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य तंत्र का इस्तेमाल करना जारी रखे हुए हैं।’’
गलवान घाटी में हुई 2020 की जानलेवा झड़पों और उसके बाद चार साल से भी ज़्यादा समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के रिश्तों में काफी तनाव आ गया था। इस तनाव के बाद, अपने संबंधों को फिर से सुधारने के लिए पिछले एक साल में दोनों देशों ने कई कदम उठाए हैं।
पछुआ पवनों और बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवात के कारण नेपाल में हफ्ते के आखिर में मध्यम से भारी बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
नेपाल मौसम विभाग के अनुसार, सप्ताह के मध्य से मौसम और अधिक अस्थिर होने की संभावना है। अगले पांच दिनों के दौरान हिमालयी और पहाड़ी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में बारिश और बर्फबारी होने के आसार हैं।
विभाग के मौसम विज्ञानी रोजन लामिछाने ने कहा, ‘‘सोमवार को देश के ज्यादातर हिस्सों में आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा। हालांकि हिमालयी क्षेत्र में कुछ स्थानों पर बादल छाए रहेंगे।’’
उन्होंने बताया कि सोमवार रात तक कोसी, बागमती, गंडकी और लुंबिनी प्रांतों के हिमालयी और पहाड़ी इलाकों में बादल छाने की उम्मीद है, क्योंकि देश पर पछुआ पवनों का आंशिक प्रभाव पड़ने वाला है।
मंगलवार को कोसी, मधेश, बागमती और गंडकी प्रांतों के साथ-साथ कर्णाली और सुदूर पश्चिम प्रांतों के हिमालयी क्षेत्रों में आंशिक रूप से बादल छाए रहने की संभावना है।
लामिछाने ने कहा कि बुधवार से खासकर हिमालयी और पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी की संभावना बढ़ सकती है।
इजराइल में संसदीय चुनाव मंगलवार को होंगे, जिनमें प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सत्ता में बने रहने की कोशिश करेंगे। चुनाव में सात अक्टूबर 2023 को हमास के हमले, उसके बाद हुए युद्धों और सरकार की घरेलू एवं विदेश नीतियों से निपटने के तरीके पर बहस के बीच नेतन्याहू के नेतृत्व की परीक्षा होगी।
इस चुनाव को नेतन्याहू के नेतृत्व की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट समेत विपक्षी नेता उनके दक्षिणपंथी गठबंधन को चुनौती देने की कोशिश कर रहे हैं।
चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों के अनुसार, किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय बहुमत मिलने का भरोसा नहीं है।
इजराइल का आकार पूर्वोत्तर भारत के मिजोरम राज्य के लगभग बराबर है। वहां आनुपातिक प्रतिनिधित्व की राष्ट्रव्यापी चुनाव प्रणाली लागू है। पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है, जहां से संसद यानी नेसेट के 120 सदस्य चुने जाते हैं।
मतदाता संसद के सदस्यों का सीधे चुनाव नहीं करते, बल्कि राजनीतिक दलों की बंद सूची के पक्ष में मतदान करते हैं। इस व्यवस्था के तहत कई राजनीतिक दल विधायिका में सीट हासिल करने के लिए चुनाव लड़ सकते हैं।
देश की संसद नेसेट में प्रवेश के लिए किसी दल को कम से कम 3.25 प्रतिशत मत हासिल करना जरूरी है। इस शर्त के कारण अक्सर चुनाव से पहले गठबंधन और दलों का विलय होता है।
नेसेट का कार्यकाल चार साल का होता है। हालांकि, यदि संसद स्वयं को भंग करने के पक्ष में मतदान करती है, निर्धारित अवधि में राज्य के बजट को मंजूरी देने में विफल रहती है या नई सरकार का गठन नहीं हो पाता, तो समय से पहले चुनाव कराए जा सकते हैं।
पाकिस्तान की पंजाब सरकार ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीन बहनों की हिरासत को जन सुरक्षा कानून के तहत 30 दिन के लिए और बढ़ा दिया है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
अलीमा खान, नोरीन नियाजी और डॉ. उज्मा खान पिछले एक महीने से अधिक समय से लाहौर की कोट लखपत जेल में पंजाब सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश, 1960 के तहत हिरासत में हैं।
अलीमा खान को 20 सितंबर को हिरासत में लिया गया था, जबकि उज्मा और नोरीन को अगले दिन हिरासत में लिया गया। यह कार्रवाई जेल में बंद पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान के समर्थन में लोगों को जुटाने की कोशिशों के दौरान की गई थी।
पंजाब के एक सहायक महाधिवक्ता ने सोमवार को लाहौर उच्च न्यायालय को बताया कि लाहौर के उपायुक्त की सिफारिश पर सरकार ने खान की तीनों बहनों की हिरासत 30 दिन के लिए और बढ़ा दी है।
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