हालात

अब एक व्यक्ति 10 नाम ही हटवा या जुड़वा पाएगा, चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 को लेकर बदला नियम

चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 को लेकर अहम फैसला लिया है। इसके तहत अब कोई भी व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म 7 ही भर सकता है। फॉर्म 7 वोटर का नाम काटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 का नियम बदला है
चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 का नियम बदला है 

  • चुनाव आयोग ने फॉर्म 7 को लेकर बदला नियम

  • अब एक व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म 7 ही भर सकता है

  • कुछ दिन पहले फॉर्म 6 को लेकर भी बदला गया था नियम

चुनाव आयोग फॉर्म 7 को लेकर अहम सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत अब कोई भी व्यक्ति इस फॉर्म को अधिकतम 10 बार ही भर सकेगा। यानी अब सिर्फ एक व्यक्ति अधिकतम 10 फॉर्म 7 ही भर सकेगा। यह फॉर्म किसी मतदाता के नाम को जोड़े जाने पर आपत्ति दर्ज करने के लिए होता है या फिर नया नाम जुड़वाने की मांग के लिए होता है। इस फॉर्म के आधार पर जांच करने के बाद बीएलओ फैसला लेता है कि संबंधित नाम को हटाना या जोड़ना है।

फॉर्म 7 को लेकर काफी शिकायतें सामने आ रही हैं। आरोप है कि कुछ लोग साजिश के तहत भारी संख्या में फॉर्म 7 भर रहे हैं और दूसरे लोगों के नाम कटवा रहे हैं।

ऐसे आरोपों के बीच अब चुनाव आयोग ने तय कर दिया है कि एक व्यक्ति अब 10 से ज्यादा बार ऐसे फॉर्म नहीं भर सकेगा। इसका मतलब हुआ कि कोई व्यक्ति अब 10 से ज्यादा नाम हटवा या जुड़वा नहीं सकेगा। इसके अलावा एक महीने के अंदर ऐसे 5 फॉर्म भरने की भी लिमिट तय हो गई है। यह लिमिट ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के फॉर्मों पर लागू होगी।

आयोग का फैसला ऐसे वक्त में आया है, जब यह आरोप लगे हैं कि वहां फॉर्म 7 का बेजा इस्तेमाल किया गया।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य चुनाव अधिकारियों को जारी निर्देशों में, चुनाव आयोग ने कहा कि बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' जमा किए जाने के मामले उसके संज्ञान में आए हैं। 'रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960' के नियम 13 (2) के अनुसार, मतदाता सूची में शामिल किए जाने के लिए प्रस्तावित किसी नाम पर आपत्ति या सूची से किसी नाम को हटाने के लिए आवेदन केवल 'फॉर्म 7' के ज़रिए ही किया जा सकता है, और इसे केवल वही व्यक्ति जमा कर सकता है जो उसी विधानसभा क्षेत्र में वोट देने के लिए रजिस्टर्ड हो।

हालांकि पहले चुनाव आयोग द्वारा एक व्यक्ति ऑनलाइन फॉर्म 7 जमा करने की सीमा 6 तक सीमित थी, लेकिन मतदाता पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) के पास फिजिकली जमा किए जा सकने वाले 'फॉर्म 7' की संख्या पर कोई सीमा नहीं थी।

चुनाव आयोग ने कहा है कि, "हालांकि, एक व्यक्तिगत निर्वाचक द्वारा ऑनलाइन दाखिल किए जाने वाले आवेदनों की संख्या निपटान के लिए एक समय में 6 निर्धारित की गई है, थोक में प्रस्तुत किए गए भौतिक फॉर्म 7 की संख्या को परिभाषित नहीं किया गया है और इसे ईआरओ के निर्णय पर छोड़ दिया गया है, जो क्षेत्र के अधिकारियों के लिए चुनौतियां पैदा कर रहा है। इसलिए, एक व्यक्तिगत निर्वाचक द्वारा बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल करने को रोकने के इरादे से आयोग ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में फॉर्म 7 आवेदन की संख्या निर्धारित करने का निर्णय लिया है।"

चुनाव आयोग ने कहा है कि अब, व्यक्ति दावों और आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से 10 फॉर्म 7 दाखिल कर सकते हैं, जो आमतौर पर विशेष सारांश संशोधन (स्पेशल समरी रिवीजन) या विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान ड्राफ्ट रोल के प्रकाशन के बाद एक महीने के लिए होता है। चुनाव आयोग ने कहा कि इसी तरह, जब पुनरीक्षण प्रक्रिया नहीं चल रही हो और मतदाता सूची लगातार अपडेट की जा रही हो, तो व्यक्ति प्रति माह अधिकतम पांच फॉर्म 7 दाखिल कर सकते हैं।