
उत्तर प्रदेश के माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की बागपत जिला जेल में गोली मारकर हत्या कर दी गई है। करीब 27 सालों तक मुन्ना बजरंगी ने जुर्म की दुनाया में कई खौफनाक वारदातों को अंजाम दिया, जिसे सुनकर आज भी लोग खौफ खाते हैं। मुन्ना बजरंगी के जुर्म की दुनिया में कदम रखने और उसकी गिरफ्तारी तक की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
यूपी के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में 1967 में जन्मे प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी ने जुर्म की दुनिया में 1982 में कदम रखा था। बताया जाता है कि वह बड़ा आदमी बनना चाहता था। उसने 5वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और छोटे मोटे वारदात को अंजाम देने लगा था।
1984 में मुन्ना बजरंगी ने लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद एक व्यापारी की हत्या कर दी थी। जुर्म की दुनिया में कदम रखने के बाद बतौर सुपारी किलर उसने कई हत्याएं कीं। 1995 में यूपी एसटीएफ से मुठभेड़ के दौरान उसे गोली लगी थी। मुठभेड़ के दौरान वह भागने में सफल रहा था।
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मुठभड़ के दौरान मुन्ना बजरंगी के बच निकलने के बाद यूपी एसटीएफ ने उसकी गैंग पर काफी दबाव बनाया। बताया जाता है कि जब मुन्ना बजरंगी को लगा की उसकी ताकत कम हो रही है तो उसने पूर्वांचल के माफिया डॉन मुख्तार अंसारी से हाथ मिला लिया। इस गठजोड़ के बाद मुन्ना बजरंगी ने 2005 में गाजीपुर के मुहम्मदाबाद से बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कर दी थी।
कृषणानंद राय की हत्या के बाद करीब 9 सालों तक रंगदारी और हत्या समेत कई मामलों में उसका नाम आया। 29 अक्टूबर, 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना बजरंगी को मुंबई के मलाड इलाके से गिरफ्तार कर लिया था। ऐसा कहा जाता है कि एनकाउंटर के डर से उसने खुद की गिरफ्तारी करवाई थी।
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मुन्ना बजरंगी 2012 में मड़ियाहू विधानसभा चुनाव से चुनाव भी लड़ा था, लेकिन चुनाव में उसे करारी शिकस्त मिली थी।
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Published: 09 Jul 2018, 10:05 AM IST