
विवादित शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' में समय रैना, रणवीर इलाहाबादिया और अन्य इन्फ्लुएंसर्स द्वारा दिव्यांगों का मजाक उड़ाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान फटकार लगाते हुए कहा कि कॉमेडियन समय रैना ने अदालत को बेवकूफ बनाने की कोशिश की है और सुप्रीम कोर्ट के सामने गलत बयान दिए हैं। इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए अदालत ने समय रैना समेत इंडिया गॉट लेटेंट के विवादित शो में शामिल रहे कॉमेडियन और अन्य गेस्ट्स पर 3-3 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही कोर्ट ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि जुर्माने की राशि दो हफ्ते में जमा नहीं की गई, तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया, जब उन्हें बताया गया कि रैना ने अपने शो में किसी भी दिव्यांग व्यक्ति को आमंत्रित नहीं किया, जैसा कि पिछले आदेश में उससे कहा गया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अपने मंच पर दिव्यांग लोगों को आमंत्रित कर सकते हैं, ताकि ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए) जैसी दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त पीड़ित मरीजों के समय पर इलाज के लिए धन जुटाने के उद्देश्य को बढ़ावा दिया जा सके।
खंडपीठ ने कहा, ‘‘हमें इस बात में कोई संदेह नहीं है कि समय रैना ने अदालत को गुमराह किया है। उसने इस अदालत के सामने दिए गए बयानों/शपथ पत्रों का खुलेआम उल्लंघन किया है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘यह कहकर इस कदाचार पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है कि कल एक अनुपालन हलफनामा दाखिल किया गया था, जबकि वास्तव में कोई हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है।’’ सीजेआई ने टिप्पणी की कि वे सोचते हैं कि देश से बाहर बैठकर वे अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘अब उन्हें भुगतने दीजिए। अगर यह अहंकार नहीं है, तो फिर हमें ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी (शब्दकोश) को ही बदलना पड़ेगा।’’
इसे भी पढ़ेंः दिव्यांगों पर कमेंट करना समय रैना को पड़ा भारी, सुप्रीम कोर्ट ने पेश होने का दिया निर्देश
उच्चतम न्यायालय ‘क्योर एसएमए इंडिया फाउंडेशन’ नामक संगठन की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें आरोप लगाया गया है कि समय रैना ने ‘स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी’ (एसएमए-मांसपेशी एवं तंत्रिका से जुड़ी आनुवंशिक बीमारी) के इलाज की अत्यधिक लागत को लेकर असंवेदनशील टिप्पणी की थी। याचिका में यह भी आरोप है कि उसने इस बीमारी से पीड़ित एक व्यक्ति का कथित तौर पर मजाक उड़ाया था।
सुनवाई के दौरान संगठन क्योर एसएमए फाउंडेशन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने शीर्ष अदालत को बताया कि समय रैना ने पहले यह भरोसा दिलाया था कि उन्होंने दिव्यांगों के लिए कुछ इवेंट्स आयोजित किए हैं, लेकिन कोर्ट के निर्देश के बावजूद उन्होंने संस्था से कोई संपर्क नहीं किया। संस्था के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि समय रैना की तरफ से इस पूरे मामले पर कोई माफी नहीं मांगी गई है।
इसे भी पढ़ेंः अश्लील जोक्स मामलाः समय रैना और रणवीर समेत अन्य के खिलाफ शिकायत दर्ज, पुलिस पहुंची स्टूडियो
क्योर एसएमए फाउंडेशन का आरोप है कि समय रैना ने 'दैट कॉमेडी क्लब' में स्टैंडअप में स्पाइनल मस्क्यूलर अट्रॉफी (एसएमए) से पीड़ित एक नेत्रहीन नवजात का मजाक उड़ाया था, जिसे जीवित रहने के लिए 16 करोड़ के इंजेक्शन की जरूरत थी। उन्होंने कहा था, ''देखो, चैरिटी अच्छी बात है, करनी चाहिए। मैं एक चैरिटी देख रहा था, जिसमें एक दो महीने का बच्चा है, जिसे कुछ तो क्रेजी हो गया था। इलाज के लिए उसे 16 करोड़ रुपए का इंजेक्शन चाहिए था।''
इसके बाद समय ने शो में बैठी एक महिला से सवाल किया, ''मैम, आप बताइए... अगर आप वो मां होतीं और आपके बैंक में 16 करोड़ रुपए आ जाते, तो एक बार तो अपने पति को देखकर बोलती न कि महंगाई बढ़ रही है और कोई गारंटी नहीं है कि वो बच्चा उस इंजेक्शन के बाद भी बचेगा। मर भी तो सकता है। सोचो इंजेक्शन के बाद मर गया। उससे भी खराब सोचो कि 16 करोड़ के इंजेक्शन के बाद बच्चा बच गया, फिर बड़ा होकर बोले कि मैं पोएट बनना चाहता हूं।'
प्रिय पाठकों हमारे टेलीग्राम (Telegram) चैनल @navjivanindia से जुड़िए और पल-पल की ताज़ा खबरें पाइए